बॉलीवुड सिनेमा और ब्रांड विज्ञापनों का गठजोड़ नया नहीं है। बड़ी कंपनियां अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए नामचीन सितारों को अपना चेहरा बनाती हैं। लेकिन जब यही विज्ञापन पान मसाला, गुटखा या माउथ फ्रेशनर के नाम पर चलने वाले सरोगेट कैंपेन से जुड़ते हैं, तो समाज और प्रशंसकों के बीच कड़ा विरोध देखने को मिलता है। साल 2026 में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने विमल इलाइची के विज्ञापनों को लेकर कड़ी कार्रवाई की है। इस सिलसिले में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस भेजा गया है। अधिकारियों का तर्क है कि इलायची के नाम पर दिखाए जाने वाले ये विज्ञापन दरअसल प्रतिबंधित पान मसाला का परोक्ष प्रचार करते हैं। नोटिस में तीनों कलाकारों से जवाब तलब किया गया है और उनसे इस विज्ञापन के सभी अभियानों को तत्काल रोकने के लिए कहा गया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब पान मसाला ब्रांड्स से जुड़कर स्टार्स विवादों में पड़े हैं। फिल्म इंडस्ट्री के 10 प्रमुख नाम ऐसे विज्ञापनों को लेकर भारी आलोचना झेल चुके हैं।
महाराष्ट्र एफडीए का नोटिस और तीन बड़े सितारों की भूमिका
विमल इलायची अभियान से जुड़े विवाद में सबसे पहला नाम शाहरुख खान का आता है। शाहरुख खान काफी समय से इस ब्रांड के प्रचार अभियान का हिस्सा रहे हैं। शुरुआत में वह अजय देवगन के साथ विमल के विज्ञापनों में दिखाई देते थे और बाद में इसमें टाइगर श्रॉफ की भी एंट्री हुई। 2026 में महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी कानूनी नोटिस के बाद शाहरुख खान के इस एंडोर्समेंट पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
वहीं दूसरी तरफ अजय देवगन का नाम तो कई वर्षों से विमल ब्रांड के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी चर्चित टैगलाइन 'जुबान केसरी' की वजह से वह इस ब्रांड का प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। इससे पहले जब इन विज्ञापनों को लेकर जनता के बीच आलोचना शुरू हुई थी, तब अजय देवगन ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा था। उनका कहना था कि यदि किसी उत्पाद को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, तो उस पर बिक्री प्रतिबंध लगना चाहिए और उसे बाजार में बेचा ही नहीं जाना चाहिए। साल 2026 में एफडीए द्वारा भेजे गए ताजा नोटिस ने उनके इस लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दोबारा जांच के दायरे में खड़ा कर दिया है।
अपनी बेहतरीन फिटनेस और स्वस्थ जीवन शैली के लिए जाने जाने वाले टाइगर श्रॉफ भी पान मसाला सरोगेट विज्ञापनों से जुड़ने के कारण दर्शकों के निशाने पर आ चुके हैं। विमल के अभियान में शामिल होने से पहले टाइगर श्रॉफ 'पान बहार' के एक विज्ञापन में दक्षिण भारतीय अभिनेता महेश बाबू के साथ नजर आए थे। बाद में वह विमल के प्रचार से जुड़े। अब 2026 में महाराष्ट्र एफडीए की हालिया कार्रवाई और कानूनी नोटिस के बाद उनके विज्ञापन करियर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अक्षय कुमार और अमिताभ बच्चन: जब सार्वजनिक विरोध के बाद वापस लेने पड़े कदम
साल 2022 में विमल इलायची के एक नए विज्ञापन में अक्षय कुमार, शाहरुख खान और अजय देवगन एक साथ दिखाई दिए थे। इस विज्ञापन के ऑन-एयर होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। दर्शकों और प्रशंसकों ने अक्षय कुमार की जमकर क्लास लगाई, क्योंकि वह अतीत में कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों से कह चुके थे कि वह तंबाकू या उससे जुड़ी हानिकारक वस्तुओं का विज्ञापन कभी नहीं करेंगे। जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर प्रशंसकों से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने इस ब्रांड अभियान से तुरंत अलग होने का फैसला किया और यह घोषणा भी की कि उन्हें इस एंडोर्समेंट से जो भी फीस मिली है, उसे वह पूरी तरह से एक सामाजिक और परोपकारी कार्य के लिए दान कर देंगे।
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी पान मसाला विज्ञापन के विवाद से अछूते नहीं रहे। साल 2021 में अमिताभ बच्चन 'कमला पसंद' ब्रांड के सिल्वर कोटेड इलायची वाले विज्ञापन में युवा अभिनेता रणवीर सिंह के साथ नजर आए थे। विज्ञापन के टीवी पर आते ही स्वास्थ्य संगठनों, तंबाकू विरोधी संस्थाओं और आम प्रशंसकों ने अमिताभ बच्चन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। स्थिति की संवेदनशीलता को समझते हुए अमिताभ बच्चन ने तुरंत कमला पसंद के साथ अपना अनुबंध समाप्त कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रांड से प्राप्त अपनी एंडोर्समेंट फीस भी वापस लौटा दी और स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह सरोगेट एडवरटाइजिंग के दायरे में आता है।
युवाओं पर प्रभाव और ब्रांडिंग का खेल: रणवीर सिंह, ऋतिक रोशन और सैफ अली खान
कमला पसंद के उसी 2021 वाले विज्ञापन में अमिताभ बच्चन के साथ रणवीर सिंह भी मुख्य भूमिका में थे। इस प्रचार अभियान को लेकर समाजशास्त्रियों और मीडिया विश्लेषकों ने सवाल उठाया कि तंबाकू कंपनियां अपने पान मसाला ब्रांड्स की पहचान को मजबूत करने के लिए बड़े अभिनेताओं के स्टारडम का किस तरह इस्तेमाल करती हैं। यह पूरा मामला भारतीय मीडिया जगत में सरोगेट एडवरटाइजिंग यानी अप्रत्यक्ष विज्ञापन की बहस का एक बेहद चर्चित उदाहरण बना।
अपनी शानदार फिटनेस, डांस और युवाओं के बीच स्टाइल आइकन की छवि रखने वाले ऋतिक रोशन को भी इस तरह के विज्ञापन के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा। ऋतिक रोशन 'दिलबाग' ब्रांड की सिग्नेचर इलायची के प्रचार अभियान में नजर आए थे। एक यूथ आइकन द्वारा इस श्रेणी के उत्पाद का प्रचार किए जाने पर फैंस ने निराशा जताई थी।
इसके अलावा सैफ अली खान का नाम भी पान मसाला विज्ञापनों की विवादित सूची में शामिल है। सैफ अली खान 'पान बहार' के विज्ञापन में दिखाई दिए थे। इस विज्ञापन को लेकर एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) में बाकायदा एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। एएससीआई ने अपनी जांच में माना था कि जिन उत्पादों पर वैधानिक स्वास्थ्य चेतावनी दी जाती है, उनके विज्ञापनों में लोकप्रिय फिल्मी हस्तियों की मौजूदगी से बच्चों और कम उम्र के युवाओं के मानस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अदालती कार्रवाई और बयानों का दोहरापन: सलमान खान और सनी देओल
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान 'राजश्री' पान मसाला के विज्ञापन अभियान में नजर आ चुके हैं। उनके इस एंडोर्समेंट को लेकर आम जनता में काफी नाराजगी देखी गई और यह मामला आखिरकार उपभोक्ता अदालत तक पहुंच गया। वर्ष 2026 में राजस्थान के कोटा स्थित उपभोक्ता अदालत में इस केस की सुनवाई जारी रही। अदालत में विज्ञापन की प्रामाणिकता और कानूनी दस्तावेजों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर कानूनी बहस हुई।
दिग्गज अभिनेता सनी देओल का मामला बाकी सभी सितारों से थोड़ा अलग और दिलचस्प है। हाल ही में सनी देओल ने एक बयान देकर कहा था कि वह पैसे के लिए कभी भी पान मसाला या इलायची जैसे हानिकारक ब्रांड्स का विज्ञापन नहीं करेंगे। हालांकि, उनके इस दावे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक बेहद पुराना विज्ञापन वायरल हो गया। इस पुराने वीडियो में सनी देओल खुद भोजपुरी अभिनेता रवि किशन के साथ एक पान मसाला ब्रांड का जोर-शोर से प्रचार करते दिख रहे थे। इस पुराने वीडियो क्लिप के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने सनी देओल के पुराने आचरण और नए दावों के अंतर पर सवाल उठाए और जमकर चर्चा की।
सरोगेट विज्ञापनों की सच्चाई और नियामक संस्थाओं का सख्त रुख
भारत में तंबाकू, गुटखा और सीधे तौर पर पान मसाला का विज्ञापन करने पर कानूनी रूप से कड़ा प्रतिबंध लागू है। इस कानूनी बाधा से बचने के लिए कंपनियां सरोगेट एडवरटाइजिंग का रास्ता चुनती हैं। इसके तहत कंपनियां अपने मुख्य हानिकारक उत्पाद के नाम से ही माउथ फ्रेशनर, इलायची या मिनरल वाटर बाजार में उतारती हैं और बड़े फिल्मी सितारों को ब्रांड एंबेसडर बनाकर उनका प्रचार करती हैं। इससे दर्शकों के दिमाग में ब्रांड का नाम स्थापित हो जाता है और जब वे दुकान पर जाते हैं तो वही ब्रांड मांगते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेताओं को अपने सामाजिक दायित्व को समझना चाहिए। जब कोई फिट और लोकप्रिय अभिनेता किसी ब्रांड से जुड़ता है, तो युवा प्रशंसक उसे आदर्श मानकर उस ओर आकर्षित होते हैं। 2026 में महाराष्ट्र एफडीए की इस कार्रवाई और कोटा कंज्यूमर कोर्ट की सुनवाई के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में सरोगेट विज्ञापनों पर और ज्यादा कड़े नियम लागू किए जाएंगे ताकि ब्रांड्स और सेलिब्रिटीज दोनों की जवाबदेही तय की जा सके।



















