सिनेमा की दुनिया में कुछ ऐसे कलाकार होते हैं जो अपनी नकारात्मक भूमिकाओं से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ते हैं। ऐसे ही एक दिग्गज अभिनेता चंद्रशेखर दुबे थे, जिन्हें पर्दे पर खलनायक की भूमिकाएं निभाने के लिए जाना जाता था। अपने लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने ज्यादातर धूर्त, चालाक और निर्दयी लाला या जमींदार के किरदार निभाए। पर्दे पर उनकी ऐसी छवि बन गई थी कि दर्शक उन्हें देखकर भड़क जाते थे और सिनेमाघरों में उन्हें गालियां तक दे डालते थे।
लगभग दो सौ फिल्मों में किया काम
हिंदी सिनेमा के मशहूर चरित्र अभिनेता चंद्रशेखर ने 1950 के दशक से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और करीब 150 से 200 फिल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया। उनके हिस्से ज्यादातर साहूकार, मुनीम और कपटी लाला जैसे नेगेटिव रोल ही आए। अभिनय के साथ-साथ वह रेडियो कार्यक्रम भी किया करते थे। उनकी फिल्मों की सूची में 'पतिता', 'सीमा', 'तीसरी कसम', 'मौसम', 'छोटी सी बात' और 'रोटी कपड़ा और मकान' जैसी तमाम बेहतरीन फिल्में शामिल हैं।
'राम तेरी गंगा मैली' में निभाया था यादगार रोल
राज कपूर के निर्देशन में 1985 में बनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' में चंद्रशेखर दुबे ने एक ऐसा किरदार निभाया जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। इस फिल्म में मंदाकिनी जब अपने प्रेमी की तलाश में कलकत्ता पहुंचती हैं, तब चंद्रशेखर एक पंडित के वेश में उन्हें रास्ता दिखाने के बहाने अपने घर ले जाते हैं और उनके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, पंडिताईन वक्त पर सब कुछ देख लेती हैं और पुलिस की मदद से मंदाकिनी की जान बचा ली जाती है। इस फिल्म में मंदाकिनी के साथ उनका यह दृश्य काफी चर्चित रहा था। इसके अलावा मनोज कुमार की फिल्म 'रोटी कपड़ा और मकान' में भी उन्होंने लाला का किरदार निभाया था, जहां मौसमी चटर्जी के साथ उनका दुर्व्यवहार वाला दृश्य आज भी दर्शकों को अच्छी तरह याद है।
महज 18 साल की उम्र में जेल गए स्वतंत्रता सेनानी
पर्दे पर भले ही चंद्रशेखर दुबे ने क्रूर और महिलाओं के साथ गलत करने वाले किरदारों को जिया हो, लेकिन असल जिंदगी में उनका व्यक्तित्व बिल्कुल विपरीत था। वह एक सच्चे देशभक्त और क्रांतिकारी विचारों वाले इंसान थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर जब 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, तो वह सब कुछ छोड़कर इस राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े। उस वक्त उनकी उम्र महज 18 साल थी और देश की खातिर उन्हें गिरफ्तार भी होना पड़ा था। देश की सेवा के लिए समर्पित रहने वाले चंद्रशेखर की किस्मत उन्हें अभिनय की दुनिया में ले आई और वह हिंदी सिनेमा के एक बेहद सम्मानित कलाकार बन गए।


















