भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गाने बने हैं जिन्होंने अपनी धुनों और अनोखे प्रस्तुतीकरण के दम पर समय की सीमा को पार किया है। साल 1970 में आई फिल्म हमजोली का प्रसिद्ध गीत ढल गया दिन हो गई शाम इसी श्रेणी में शामिल है। अभिनेता जितेंद्र और अभिनेत्री लीना चंदावरकर पर फिल्माया गया यह रोमांटिक युगल गीत रिलीज के 50 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय बना हुआ है।
बैडमिंटन कोर्ट पर फिल्माया गया अनोखा गीत
इस गाने की सबसे बड़ी खासियत इसका दृश्यांकन था। सिनेमा के पर्दे पर पहली बार किसी गाने को आउटडोर बैडमिंटन मैच के साथ इतनी खूबसूरती से जोड़ा गया था। खेल के दौरान शटलकॉक की हर हिट को संगीत की ताल के साथ मिलाया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्दे पर जितेंद्र और लीना चंदावरकर की सहज केमिस्ट्री ने इस खेल को एक चंचल और यादगार प्रेम प्रसंग में बदल दिया।
संगीत दिग्गजों की जुगलबंदी और रचना
इस कालजयी रचना के पीछे भारतीय संगीत जगत के दिग्गजों का योगदान था। गाने को सुरीली आवाज मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने दी थी, जिनकी युगल गायकी ने गानों में जान फूंक दी। इस गाने की धुन प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने तैयार की थी, जबकि इसके बोल गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे। इन सभी कलाकारों के मिलाजुला प्रयास का ही नतीजा है कि पांच दशक बाद भी यह गाना नए और पुराने दोनों तरह के श्रोताओं को समान रूप से आकर्षित करता है।



















