ब्यूटी पेजेंट के वैश्विक मंच से हिंदी सिनेमा के पर्दे तक का सफर तय करने वाली पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने अपने पेशेवर जीवन के अहम पड़ावों और अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की है। वर्ष 2017 में मिस वर्ल्ड का प्रतिष्ठित ताज जीतने के नौ साल बाद, उन्होंने बताया कि इस पूरे सफर ने उन्हें सबसे बड़ा सबक यह सिखाया है कि इंसान को हमेशा अपनी आंतरिक समझ और सहज प्रवृत्ति पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। ग्लैमर और मनोरंजन की चकाचौंध के बीच अपने खुद के फैसले लेने की क्षमता ही किसी कलाकार को लंबी राह पर आगे बढ़ने का हौसला देती है।
शुरुआती उत्साह और अनगिनत सलाहों से पैदा हुआ असमंजस
जब मानुषी छिल्लर ने पहली बार फिल्म जगत में कदम रखा था, तो वह बेहद उत्साहित थीं। उनके भीतर नई चीजें सीखने और काम को गहराई से समझने की गहरी ललक थी। सीखने की इसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने उद्योग में पहले से स्थापित और अनुभवी लोगों से राय मशविरा करना शुरू कर दिया। हालांकि, जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि जब आप एक साथ बहुत सारे लोगों की अलग-अलग राय सुनने लगते हैं, तो वह मार्गदर्शन करने के बजाय आपको गहरी उलझन में डाल देती है। हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है, जिससे खुद का निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है।
इसी अनुभव से मानुषी ने समझा कि करियर में निरंतर प्रगति करने के लिए सिर्फ दूसरों के अनुभवों या विचारों पर आश्रित नहीं रहा जा सकता। फिल्म उद्योग में खुद की पसंद, व्यक्तिगत समझ और अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लेना भी उतना ही जरूरी होता है। जब तक कोई कलाकार अपने फैसलों की जिम्मेदारी खुद नहीं लेगा, तब तक वह अपनी वास्तविक पहचान स्थापित नहीं कर सकता।
अनिश्चितताओं से भरा पेशा और बाहरी कलाकारों का संघर्ष
सिनेमा की दुनिया को अनिश्चितताओं से भरा पेशा बताते हुए मानुषी ने कहा कि यहां कभी भी यह निश्चित नहीं होता कि अगला प्रोजेक्ट कब मिलेगा या भविष्य में किस तरह का काम सामने आएगा। यहां का माहौल हर दिन बदलता है और सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यह यात्रा उन कलाकारों के लिए कहीं अधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण साबित होती है, जिनका किसी फिल्मी घराने से कोई ताल्लुक नहीं होता। बिना किसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के इस क्षेत्र में लगातार सक्रिय बने रहना और अपनी जगह तलाशना एक निरंतर संघर्ष है।
मानुषी ने अपने शुरुआती दौर के द्वंद्व का भी जिक्र किया। उनके सामने यह यक्ष प्रश्न था कि क्या उन्हें घर पर आराम से बैठकर किसी जाने-माने फिल्ममेकर द्वारा अपनी पसंद का मनचाहा किरदार लिखे जाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बहुत व्यावहारिक ढंग से स्वीकार किया कि हर कलाकार के पास ऐसे आदर्श मौके का इंतजार करते रहने की सुविधा या विशेषाधिकार नहीं होता। कई बार किसी ऐसे प्रोजेक्ट को भी स्वीकार करना अनिवार्य हो जाता है जो शायद पूरी तरह आपके सपनों के मुताबिक न हो, लेकिन वह आपको अपने बड़े लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता है।
व्यावहारिक नजरिया और आर्थिक आत्मनिर्भरता का महत्व
करियर के चयन को लेकर मानुषी का दृष्टिकोण बेहद व्यावहारिक है। उनका मानना है कि हर काम आपके सपनों का ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं हो सकता। कई बार कोई प्रोजेक्ट सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वह आपके करियर को गति देता है और भविष्य के नए दरवाजे खोलता है। काम में निरंतरता बनाए रखना ही फिल्म इंडस्ट्री में प्रासंगिक रहने का सबसे बड़ा आधार है।
मिस वर्ल्ड बनने के अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह खिताब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम और पहचान हासिल करने तक सीमित नहीं था। इस वैश्विक सफलता ने उन्हें आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने का मजबूत आधार मुहैया कराया। शुरुआती दिनों में ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए मिले आर्थिक संबल ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में अपने करियर को आगे बढ़ाने की जरूरी आजादी दी। आर्थिक स्थिरता की बदौलत ही वह बिना किसी अनावश्यक दबाव के अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ सकीं। अब वह भविष्य की सुरक्षा के लिए बिजनेस में निवेश के जरिए कमाई के नए और टिकाऊ अवसर तलाशने की योजना बना रही हैं।
फिल्मी पृष्ठभूमि से पूरी तरह दूर होने के कारण लगातार काम करते रहना उनके लिए एक सतत चुनौती रहा है। मिस वर्ल्ड बनने के उपरांत मानुषी ने वर्ष 2022 में अक्षय कुमार के साथ फिल्म सम्राट पृथ्वीराज से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। हालांकि, बड़े स्तर पर बनी यह पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई थी, जिससे आगे की राह और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई।


















