भारतीय सिनेमा के इतिहास में वर्ष 1985 में प्रदर्शित हुई फिल्म राम तेरी गंगा मैली ने अपनी रिलीज के समय दर्शकों के बीच गहरा असर छोड़ा था। इस फिल्म की कहानी एक निष्छल पहाड़ी लड़की और एक शहर के युवक के बीच पनपे अधूरे प्रेम पर आधारित थी। पर्दे पर इस प्रेम कहानी को जीवंत करने में महान संगीत और कर्णप्रिय गीतों का विशेष योगदान रहा।
मंदाकिनी की पहचान और वादियों का संगीत
महान फिल्मकार राज कपूर के निर्देशन में बनी इस सिनेमाई कृति में उनके सुपुत्र राजीव कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे। वहीं अपनी भूरी और हरी आंखों से पहली ही नजर में छाप छोड़ने वाली अभिनेत्री मंदाकिनी ने इस फिल्म से अपार प्रसिद्धि हासिल की। वादियों के मनमोहक दृश्यों के बीच फिल्माया गया प्रसिद्ध गीत 'हुस्न पहाड़ों का क्या कहना कि बारों महीने यहां मौसम जाड़ों का' दर्शकों का सर्वकालिक पसंदीदा बन गया। आज भी अभिनेत्री मंदाकिनी को इस मील का पत्थर साबित हुई फिल्म और इस लोकप्रिय गीत के लिए याद किया जाता है।
लता मंगेशकर के सुरों का जादू
इस भावपूर्ण गीत में एक मासूम पहाड़ी कन्या के दिल के उद्गार और शहरी बाबू के प्रति उसके खिंचाव को बेहद खूबसूरती से पिरोया गया था। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली और अमर गायकी से इस रचना में प्राणाहुति दी। लता जी की सुरीली तानों ने इस पहाड़ी प्रेम गीत को संगीत जगत में एक विशेष दर्जा दिलाया। दशकों बीत जाने के बाद भी यह गाना श्रोताओं को वादियों के सुकून और सच्चे प्यार का अहसास कराता है।



















