भारतीय सिनेमा पर सेंसर बोर्ड की पाबंदियों और उसके कामकाज के तरीके को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने हाल ही में भारतीय फिल्मों में सेंसरशिप के इतिहास और उनसे जुड़े अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार की चर्चित फिल्म गंगा जमुना से जुड़ा एक बहुचर्चित किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह सेंसर बोर्ड ने फिल्म में बोले गए एक मुख्य संवाद पर ऐसी अजीब आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मामला देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया था।
फिल्म गंगा जमुना और हे राम संवाद पर सेंसर बोर्ड का ऐतराज
दिलीप कुमार की प्रसिद्ध फिल्म गंगा जमुना के निर्माण और प्रमाणन के दौरान सेंसर बोर्ड ने एक विचित्र रुकावट पैदा की थी। फिल्म के अंतिम दृश्यों में दिलीप कुमार का किरदार गंगा मरते समय हे राम शब्द का उच्चारण करता है। सेंसर बोर्ड के अधिकारियों को इसी बात पर आपत्ति थी। उनका तर्क था कि चूंकि दिलीप कुमार वास्तविक जीवन में एक मुस्लिम हैं, इसलिए वे पर्दे पर हे राम जैसा धार्मिक संवाद कैसे बोल सकते हैं।
फिल्म के निर्माताओं ने बोर्ड के सदस्यों को समझाने की काफी कोशिश की कि दिलीप कुमार फिल्म में एक हिंदू चरित्र गंगा का अभिनय कर रहे हैं और यह संवाद कहानी के प्रभाव के लिए बेहद जरूरी है। इसके बावजूद सेंसर बोर्ड अपनी बात पर अड़ा रहा और फिल्म के प्रमाणन को रोक दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पास पहुंचा। प्रधानमंत्री नेहरू ने खुद हस्तक्षेप करते हुए फिल्म देखी और पूरी स्थिति को समझा। फिल्म देखने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दृश्य में कोई समस्या नहीं है और उन्होंने फिल्म को हरी झंडी दे दी।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय सिनेमा और संगीत का योगदान
भारतीय सिनेमा के ऐतिहासिक परिदृश्य पर बात करते हुए तिग्मांशु धूलिया ने स्वतंत्रता आंदोलन में फिल्मकारों की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने बताया कि आजादी की लड़ाई के समय देश के निर्देशकों, कहानीकारों और गीतकारों ने ऐसी रचनाएं पेश कीं जिन्होंने आम जनता में देशभक्ति की अलख जगाई। उस दौर में बनाए गए गीतों और कहानियों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम का संदेश लोगों तक पहुंचता था, जबकि ब्रिटिश हुकूमत के अधिकारी इन सांस्कृतिक संकेतों और छुपे हुए अर्थों को समझ नहीं पाते थे।
फिल्म राग देश की रुकावट और 7 साल तक फीस का इंतजार
तिग्मांशु धूलिया ने साल 2017 में बनी अपनी फिल्म राग देश से जुड़े अपने व्यक्तिगत कड़वे अनुभव भी साझा किए। राज्यसभा टीवी के लिए बनाई गई यह फिल्म इंडियन नेशनल आर्मी के अफसरों और ऐतिहासिक आईएनए ट्रायल्स पर आधारित थी। जब यह फिल्म पहली बार सेंसर बोर्ड के पास गई, तो बोर्ड के तत्कालीन निदेशक ने फिल्म की खूब सराहना की और तिग्मांशु धूलिया को गले लगाते हुए बिना किसी कट के फिल्म पास कर दी।
हालांकि शुरुआती तारीफ और मंजूरी के बावजूद बाद में फिल्म को अचानक रोक दिया गया। इतना ही नहीं, निर्देशक को अपने काम के भुगतान के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ा। तिग्मांशु धूलिया को अपनी फीस प्राप्त करने के लिए लगभग 7 साल का समय लगा और काफी भागदौड़ तथा मिन्नतें करने के बाद ही उन्हें अपना बकाया भुगतान मिल सका।



















