भारतीय सिनेमा के इतिहास में किसी एक ऑन-स्क्रीन नाम का सफर इतना दिलचस्प और परिवर्तनकारी नहीं रहा जितना कि प्रेम शब्द का रहा है। 1970 और 1980 के दशक के दौरान जब भी सिनेमाघरों के बड़े पर्दे पर कोई चरित्र कहता था कि प्रेम नाम है मेरा, तो दर्शकों के दिलों में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती थी। उस दौर में यह नाम चालाकी, क्रूरता और पर्दे पर खौफ का प्रतीक बन चुका था। हालांकि 1980 के दशक के अंतिम वर्षों में एक नया मोड़ आया, जिसने इस नाम की पूरी परिभाषा ही बदलकर रख दी। एक नए कलाकार की सिनेमा की दुनिया में एंट्री हुई, जिसने खलनायक के इस कड़क नाम को अपनाकर उसे प्यार, पारिवारिक संस्कारों और मासूमियत की पहचान बना दिया। वह कलाकार कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड के सुल्तान कहे जाने वाले सलमान खान थे।
विलेन के खौफ से रोमांटिक हीरो के आगमन तक की कहानी
एक समय था जब खलनायक के रूप में स्थापित अभिनेता ने गर्व से कहा था कि वे ऐसी चिड़िया हैं जिसे फंसाने का जाल किसी शिकारी ने नहीं बनाया। लेकिन सिनेमाई इतिहास ने ऐसी करवट ली कि उसी नाम की पहचान को एक नए अंदाज में ढालने वाले नायक का आगमन हुआ। 1989 में निर्देशक सूरज बड़जात्या की क्लासिक फिल्म मैंने प्यार किया रिलीज हुई, जिसमें सलमान खान पहली बार इस ऐतिहासिक नाम के साथ दर्शकों के सामने आए। सफेद कबूतर, ढलती शाम का खूबसूरत दृश्य और हाथ में गिटार थामे इस सीधे-साधे युवक ने पूरे देश में प्रेम की एक नई लहर चला दी। फिल्म का एक संवाद दोस्ती का एक वसूल है मैडम, नो सॉरी, नो थैंक यू बेहद लोकप्रिय हुआ और इसने उस युवा अभिनेता को हर घर का चहेता बना दिया। दशकों पुराना खौफनाक किरदार अब शराफत और मोहब्बत का नया नाम बन गया था।
नब्बे के दशक में बॉक्स ऑफिस की सफलता की गारंटी
नब्बे के दशक की शुरुआत होते-होते यह ऑन-स्क्रीन नाम केवल एक साधारण पहचान नहीं रहा, बल्कि सिनेमाघरों में सफलता और भारी कमाई का एक मजबूत आधार बन गया। जब भी थिएटर्स में इस नाम की स्क्रीन पर घोषणा होती थी, दर्शक तालियों और सीटियों के साथ खुशियां मनाने लगते थे। 1994 में आई फिल्म हम आपके हैं कौन में एक बार फिर यह किरदार पर्दे पर लौटा। संवाद भगवान किस रूप में आकर हमारी मदद कर दे, कोई नहीं जानता के साथ इस चरित्र ने भाभी का आदर करने वाले और भाई के लिए अपनी खुशियां न्योछावर करने वाले आज्ञाकारी देवर के रूप में हर परिवार का दिल जीत लिया। इस पारिवारिक ड्रामा ने भारतीय सिनेमा में कमाई के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।
इसी साल रिलीज हुई फिल्म अंदाज़ अपना अपना में सलमान खान ने हास्य शैली में कदम रखा और प्रेम भोपाली का मजेदार किरदार निभाया। अभिनेता आमिर खान के साथ उनकी बेहतरीन जोड़ी और गलती से मिस्टेक हो गया जैसी कॉमिक टाइमिंग ने यह साबित कर दिया कि यह ऑन-स्क्रीन पहचान केवल भावुक दृश्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि दर्शकों को हंसाने में भी पूरी तरह सक्षम है। इसके बाद 1997 की फिल्म जुड़वा में दोहरे किरदार निभाते हुए उन्होंने एक तरफ टपोरी राजा का रोल किया, तो दूसरी तरफ बेहद शांत और मासूम जादूगर के रूप में इसी लोकप्रिय नाम को पर्दे पर जीवंत किया।
इसके बाद 1997 में ही आई बहुतारका फिल्म दीवाना मस्ताना में उन्होंने एक मजेदार कैमियो किया, जिसमें उनका नाम फिर से यही रखा गया। 1999 की ब्लॉकबस्टर हम साथ-साथ हैं में नसीब वाले हैं वो लोग जिन्हें परिवार का प्यार मिलता है जैसे विचार के साथ यह किरदार परिवार के सबसे शांत और आज्ञाकारी बेटे के रूप में सामने आया। 2000 में आई फिल्म चल मेरे भाई में अभिनेता संजय दत्त के साथ जोड़ी जमाते हुए वे इसी नाम से दर्शकों के दिलों पर छाए रहे। उसी वर्ष फिल्म कहीं प्यार न हो जाए में दिल टूटे हुए शादी के गायक प्रेम कपूर का भावुक रोल निभाकर उन्होंने दर्शकों की खूब सहानुभूति हासिल की।
दो हजार के दशक में बदला मिजाज और हास्य का नया अंदाज
समय बदलने के साथ-साथ इस ऑन-स्क्रीन पहचान का मिजाज भी बदला। शुरुआती दौर के शर्मीले अंदाज से अलग हटकर 2005 में आई निर्देशक अनीस बज्मी की कॉमेडी फिल्म नो एंट्री में इस नाम का एक बेहद चतुर और फ्लर्ट करने वाला शादीशुदा रूप देखने को मिला, जिसने दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। इसके बाद फिल्म मैंने प्यार क्यों किया? में अभिनेत्री कटरीना कैफ और सुष्मिता सेन के साथ एक डॉक्टर के किरदार में उन्होंने रोमांस और हास्य का बेहतरीन संतुलन पेश किया। 2007 की ब्लॉकबस्टर फिल्म पार्टनर में लव गुरु का रोल निभाते हुए उन्होंने अभिनेता गोविंदा के किरदार को प्यार के तरीके सिखाए और सिनेमाघरों को ठहाकों से भर दिया।
दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक के दौर में 2011 में आई फिल्म रेडी ने एक बार फिर उनके अनूठे स्टारडम का लोहा मनवाया। जिंदगी में तीन चीज़ें कभी अंडरएस्टीमेट मत करना आई, मी एंड मायसेल्फ जैसे असरदार संवाद के साथ प्रेम कपूर के इस नए रूप ने सिनेमाघरों में खूब वाहवाही लूटी। कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जब सूरज बड़जात्या और सलमान खान दोबारा एक साथ आए, तो 2015 में रिलीज हुई फिल्म प्रेम रतन धन पायो में वे प्रेम दिलवाला बनकर पर्दे पर लौटे। इस फिल्म ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब भी यह जोड़ी और यह नाम साथ आते हैं, तो बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता दर्ज होना तय होता है।
फ्लॉप फिल्मों के बावजूद कायम रहने वाला मजबूत स्टारडम
पुराने दौर के विलेन के किरदार का एक प्रसिद्ध संवाद था कि सच्चाई की राह में कांटे भले हों, पर मंजिल हमेशा खूबसूरत होती है। बॉलीवुड के इस सफर में सलमान खान का स्टारडम कुछ इसी तरह अटूट बना रहा है। उनकी फिल्में समीक्षकों को पसंद आएं या न आएं, लेकिन यदि सिनेमाघर के पर्दे पर उनका स्वैग नजर आ जाए, तो दर्शक खिंचे चले आते हैं। ट्यूबलाइट, रेस 3 और दबंग 3 जैसी कई ऐसी फिल्में रहीं जिन्हें फिल्म समीक्षकों की ओर से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन इसके बावजूद व्यावसायिक स्तर पर इन फिल्मों ने सौ से डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार आसानी से कर लिया।
हिंदी फिल्म उद्योग में जिस कमाई को अन्य अभिनेताओं के लिए एक बड़ी सफलता माना जाता है, उतना बिजनेस सलमान खान की कमजोर मानी जाने वाली फिल्मों का भी हो जाता है। यही कारण है कि उन्हें बॉलीवुड का ऐसा अकेला सुपरस्टार कहा जाता है जो व्यावसायिक रूप से कमजोर फिल्मों के बावजूद हमेशा सुपरहिट बना रहता है। पर्दे पर खलनायक के रूप में मशहूर हुए एक कड़क नाम को अपनाकर उसे देश के सबसे बड़े रोमांटिक और पारिवारिक नायक की पहचान देना एक अभूतपूर्व करिश्मा है। समय के साथ कई नए सितारे आए और चले गए, लेकिन भारतीय सिनेमा में भाईजान का यह सिंहासन आज भी पूरी मजबूती के साथ अपनी जगह कायम है।


















