देश भर के महानगरों में 16 अक्टूबर को घरेलू रसोई गैस के दामों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं देखा गया है, जिससे आम परिवारों को अपने मासिक बजट में सीधी राहत मिली है। तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दरों को पुराने स्तर पर ही कायम रखा है। हालांकि, महीने की शुरुआत में 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की दरों में बढ़ोतरी की गई थी, जिसका सीधा असर खानपान और होटल व्यवसाय पर बना हुआ है।
प्रमुख महानगरों में घरेलू गैस सिलेंडर की ताजा दरें
राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर स्थिर है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 941.50 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। दक्षिण भारत के प्रमुख तकनीकी केंद्र बेंगलुरु में यह दर 944.50 रुपये दर्ज की गई है। विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिलता है।
प्रमुख महानगरों की सूची पर नजर डालें तो हैदराबाद में घरेलू रसोई गैस सबसे महंगी बिक रही है, जहां प्रति सिलेंडर का भाव 994 रुपये है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 968 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में घरेलू गैस की मौजूदा कीमत 957.50 रुपये प्रति सिलेंडर पर बनी हुई है।
व्यावसायिक सिलेंडरों पर बढ़ा हुआ बोझ
घरेलू उपभोक्ताओं के विपरीत व्यावसायिक उपयोग वाले 19 किलोग्राम के सिलेंडरों के दाम काफी ऊंचे बने हुए हैं। अक्टूबर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियों ने इन सिलेंडरों की कीमतों में 62.50 रुपये से लेकर 70 रुपये तक का इजाफा किया था। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,810 रुपये हो गई थी। दिल्ली में प्रति सिलेंडर 62.50 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई थी।
मुंबई में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर का नया दाम 2,764.50 रुपये है, जबकि बेंगलुरु में यह 2,898 रुपये पर बिक रहा है। कोलकाता में 70 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दर 2,954 रुपये हो गई थी। चेन्नई में व्यावसायिक सिलेंडर का भाव 2,983 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि हैदराबाद में कारोबारियों को इसके लिए 3,065 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
रेस्टोरेंट और खानपान उद्योग की चुनौतियां
व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के दामों में आई तेजी के कारण होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवा प्रदाताओं और क्लाउड किचन संचालकों के परिचालन खर्चों पर दबाव बढ़ गया है। खानपान से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी एक प्रमुख बुनियादी जरूरत है। बार-बार कीमतों में होने वाली वृद्धि से इन व्यवसायों के मुनाफे का मार्जिन प्रभावित होता है, क्योंकि वे बढ़ी हुई लागत का बोझ तत्काल ग्राहकों पर नहीं डाल पाते हैं।
छोटे ढाबों और टिफिन सेवाओं को भी दैनिक आधार पर बढ़ी हुई लागत का प्रबंधन करना पड़ रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान खानपान की मांग में तेजी आने की उम्मीद रहती है, लेकिन ईंधन का बढ़ता खर्च व्यवसायों के लिए बजट संतुलन बनाए रखना कठिन कर देता है।
अगली समीक्षा पर टिकी नजरें
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह रही कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में हुए संशोधन के दौरान घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर को पूरी तरह अछूता रखा गया था। इससे आम जनता को रसोई के मासिक खर्च में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से बचाव मिला।
ईंधन की कीमतों में होने वाले अगले उतार-चढ़ाव पर अब 1 नवंबर को नजर रहेगी। तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों की स्थिति, कच्चे तेल के रुझान और विनिमय दरों की समीक्षा करके एलपीजी के नए दाम घोषित करती हैं। तब तक के लिए वर्तमान दरें ही सभी शहरों में प्रभावी रहेंगी।


















