विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कनाडाई डॉलर में मजबूती का रुख देखने को मिला है। बैंक ऑफ कनाडा की ब्याज दरों से जुड़ी मजबूत होती उम्मीदों और अमेरिका तथा कनाडा के बीच सरकारी बॉन्ड यील्ड के फासले में आई कमी ने कनाडाई मुद्रा को सहारा दिया है। वित्तीय विश्लेषकों शॉन ओसबोर्न और एरिक थियोरेट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर और कनाडाई डॉलर की जोड़ी अपने हालिया उच्च स्तरों से तेजी से नीचे की ओर पलटी है। इस गिरावट के बाद दोनों मुद्राओं के बीच विनिमय दर का उचित मूल्य यानी फेयर वैल्यू लगभग 1.4140 के करीब आंका गया है, जो मौजूदा बाजार स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है।
बॉन्ड यील्ड का घटता अंतर और ब्याज दरों का समीकरण
मुद्रा बाजार में हालिया बदलाव की एक बड़ी वजह दोनों देशों के ऋण बाजार में बदलती परिस्थितियां हैं। बीते सप्ताह के दौरान बैंक ऑफ कनाडा की मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की धारणा में मजबूती आई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका और कनाडा के बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर कम हुआ है। यह घटता हुआ यील्ड स्प्रेड सीधे तौर पर कनाडाई डॉलर के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यील्ड में आए इस बदलाव ने यूएसडी और सीएडी के मूल्यांकन मॉडल पर दबाव बनाया है, जिससे इसका उचित मूल्य अनुमान 1.4140 पर आ टिका है और स्पॉट भाव के साथ इसका अंतर काफी हद तक समाप्त हो गया है।
उत्तरी अमेरिकी कारोबारी सत्र की शुरुआत में कनाडाई डॉलर ने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले लगभग 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। हालांकि व्यापक बाजार में जोखिम लेने की भूख बढ़ने और अमेरिकी डॉलर की सामान्य कमजोरी के बीच, अन्य प्रमुख जी10 मुद्राओं की तुलना में क्रॉस करेंसी व्यापार में कनाडाई डॉलर पर कुछ दबाव भी देखा गया। जब वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने का माहौल बनता है, तो निवेशक अक्सर उच्च यील्ड वाली या तेजी से भागने वाली मुद्राओं को प्राथमिकता देते हैं, जिसका असर इस जोड़ी की चाल पर भी दिखाई पड़ता है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर अहम बदलाव
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से इस मुद्रा जोड़ी का 1.4200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आना काफी अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। इस स्तर के टूटने से पहले से चला आ रहा तेज बुलिश मोमेंटम धीमा पड़ गया है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI गिरकर 50 के न्यूट्रल यानी तटस्थ स्तर पर आ पहुंचा है, जो दर्शाता है कि खरीदारी का आक्रामक दबाव अब शांत हो चुका है। वर्तमान में लाइव बाजार के आंकड़ों के अनुसार यह जोड़ी 1.41 के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव 1.42 से 0.40 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है।
विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा भाव और 1.40 के स्तर के बीच चार्ट पर बहुत सीमित तकनीकी सपोर्ट उपलब्ध है। यदि गिरावट का यह सिलसिला बना रहता है, तो विनिमय दर तेजी से 1.40 के प्रमुख सपोर्ट स्तर तक खिसक सकती है। दूसरी तरफ, किसी भी संभावित उछाल की स्थिति में अब 1.4200 और 1.4300 के स्तर पर कड़ा रेजिस्टेंस देखने को मिलेगा। लंबी अवधि के मूविंग एवरेज को देखें तो 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.41 पर और 200 दिवसीय ईएमए 1.39 पर स्थित है, जो दीर्घकालिक स्तर पर बने हुए अपट्रेंड की पुष्टि करते हैं, भले ही अल्पकालिक समय सीमा में सुधार हावी दिख रहा हो।
फेडरल रिजर्व और एशियाई सत्र में अन्य मुद्राओं का हाल
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का असर केवल कनाडाई डॉलर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ता नजर आया। इस उछाल को फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के बयानों से और अधिक हवा मिली। वॉर्श ने अपनी टिप्पणी में दोहराया कि वे मूल्य स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर कोई स्पष्ट संकेत देने से परहेज किया। केंद्रीय बैंक के इस अनिश्चित रुख ने डॉलर इंडेक्स पर दबाव बढ़ा दिया।
इसी तरह जापानी येन के मुकाबले भी अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का नया दौर देखने को मिला। शुक्रवार के सत्र में यूएसडी और जेपीवाई की जोड़ी फिसलकर 158.00 के अहम स्तर से नीचे आ गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर किसी आक्रामक सख्ती के ठोस संकेत न मिलने से वैश्विक ट्रेडर्स ने डॉलर में मुनाफावसूली करना बेहतर समझा, जिसका फायदा जापानी मुद्रा को मिला।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का मिजाज
मुद्रा बाजार में डॉलर के उतार चढ़ाव का सीधा प्रभाव कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स पर भी साफ झलका। सोने की कीमतों में 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में उतार चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर में हल्की नरमी के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए मामूली सुधार ने सोने को एकतरफा बड़ी बढ़त हासिल करने से रोके रखा, जिसके चलते कीमती धातु में उतार चढ़ाव का मिला जुला रुख बना रहा।
दूसरी तरफ डिजिटल संपत्ति बाजार में अक्टूबर का महीना दबाव भरा साबित हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस सप्ताह 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई थी। हालांकि शुक्रवार को इसमें थोड़ा सुधार दर्ज किया गया और यह दोबारा 82,000 डॉलर के आसपास संभलने में कामयाब रही। व्यापक आर्थिक चुनौतियों और संस्थागत मांग में आई नरमी ने पूरे क्रिप्टो क्षेत्र में निवेशकों के उत्साह को सीमित कर रखा है।


















