भारतीय खुफिया तंत्र की नींव रखने वाले दिग्गज जासूस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ के पहले प्रमुख रामेश्वर नाथ काओ की अनसुनी दास्तान अब सिनेमाघरों के बड़े पर्दे पर उतरने जा रही है। फिल्म निर्माता करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शंस और लियो मीडिया कलेक्टिव ने मिलकर इस भव्य स्पाई एक्शन प्रोजेक्ट का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। फिलहाल फिल्म का शीर्षक गोपनीय रखा गया है, लेकिन निर्माताओं ने इसके प्रदर्शन की तारीख तय करते हुए 11 अगस्त 2028 का दिन सुरक्षित कर लिया है।
रॉ के 60 वर्ष पूरे होने पर आएगी फिल्म
भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रॉ की स्थापना वर्ष 1968 में की गई थी। फिल्म निर्माताओं की योजना इस ऐतिहासिक संस्था के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस कहानी को दर्शकों के बीच पेश करने की है। यह सिनेमाई प्रोजेक्ट अभी शुरुआती विकास चरण में है। देशभक्ति और असल नायकों के जीवन पर आधारित सिनेमा के क्षेत्र में करण जौहर पहले भी ‘राजी’, ‘शेरशाह’, ‘केसरी’ और ‘केसरी: चैप्टर 2’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बना चुके हैं। अब उनका ध्यान देश के सबसे बड़े जासूस के जीवन संघर्ष और रणनीतिक उपलब्धियों पर केंद्रित हुआ है।
नितिन गोखले की किताब पर आधारित होगी पटकथा
इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का कथानक प्रसिद्ध लेखक नितिन गोखले की चर्चित किताब ‘जेंटलमैन स्पाईमास्टर’ पर आधारित रहेगा। कहानी मुख्य रूप से 1955 से लेकर 1971 के ऐतिहासिक घटनाक्रमों और आर.एन. काओ के पेशेवर सफर को बारीकी से उजागर करेगी। इसमें उस महत्वपूर्ण दौर की पृष्ठभूमि दिखाई जाएगी जब देश की सीमाओं के बाहर खुफिया गतिविधियों के संचालन के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की सख्त जरूरत महसूस हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप रॉ का गठन संभव हुआ। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एजेंसी के पहले गुप्त मिशनों और देश की जीत में निभाई गई गोपनीय भूमिका को भी प्रमुखता से पर्दे पर पेश किया जाएगा।
रिसर्च और प्रोजेक्ट को लेकर निर्माताओं की तैयारी
इस प्रोजेक्ट के बारे में करण जौहर ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि लियो मीडिया कलेक्टिव पिछले दो वर्षों से इस पूरी कहानी पर गहन शोध और जमीनी काम कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि टीम सच्ची घटनाओं पर आधारित एक बेहद रोमांचक और मनोरंजक फिल्म तैयार करना चाहती है। करण जौहर के अनुसार, इस सिनेमाई प्रयास का मुख्य उद्देश्य रॉ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करना और इस प्रतिष्ठित खुफिया एजेंसी की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करना है। पूरी टीम इस बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने को लेकर काफी उत्साहित है।
भारतीय जासूसी व्यवस्था में आर.एन. काओ का कद
आर.एन. काओ को भारतीय गुप्तचर इतिहास के सबसे प्रभावशाली और दूरदर्शी रणनीतिकारों में गिना जाता है। वर्ष 1968 में रॉ के गठन के साथ ही उन्हें एजेंसी का पहला मुखिया नियुक्त किया गया था। भारत की बाहरी खुफिया व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने और उसे पेशेवर रूप से स्थापित करने में उनकी भूमिका सर्वोपरि रही। उनकी जिंदगी जासूसी मिशनों, कूटनीतिक चालों, राष्ट्रीय सुरक्षा और तत्कालीन राजनीतिक निर्णयों के जटिल ताने-बाने से भरी हुई है, जिसे अब दर्शक सेल्युलाइड पर देख सकेंगे।



















