अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजारों में सोने की चाल फिलहाल एक सीमित दायरे में सिमटती दिखाई दे रही है। सख्त मौद्रिक नीति और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़े रुख के कारण बहुमूल्य धातुओं पर दबाव जरूर बना हुआ है, लेकिन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में निवेश छह महीने के शीर्ष स्तर पर पहुंचने और केंद्रीय बैंकों की अनवरत खरीदारी के चलते भारी गिरावट की आशंका काफी सीमित हो गई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की मांग सोने की कीमतों के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है।
सोने की कीमतों पर मौद्रिक नीति और भू-राजनीति का दोहरा असर
यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने में बिकवाली का दबाव देखा गया और यह 0.50 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग $4,350 के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि, यह स्तर पिछले बुधवार को बने छह सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है। बाजार प्रतिभागी मध्य पूर्व में जारी संकट और वहां के घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहे हैं, क्योंकि इस तनाव का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। यदि महंगाई के आंकड़े चढ़ते हैं, तो इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों का अनुमान प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर बिना ब्याज देने वाली इस सुरक्षित संपत्ति यानी बुलियन की चाल पर पड़ेगा।
चीन की मांग और अमेरिकी व्यापार नीतियों से कॉपर में मजबूती
लंदन मेटल एक्सचेंज यानी एलएमई पर कॉपर की कीमतें $14,500 प्रति टन के ऊपर टिकी हुई हैं, जिसे चीन में सुधरती मांग का मजबूत समर्थन मिला है। चीन में यांगशान कॉपर प्रीमियम बढ़कर $124 प्रति टन पर पहुंच गया है, जो नवंबर 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। प्रीमियम में यह उछाल साफ संकेत देता है कि चीन में आयात की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि वहां घरेलू उत्पादन में अगस्त के दौरान मामूली नरमी देखी गई थी।
साल 2026 के दौरान अब तक कॉपर की कीमतों में 16 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की जा चुकी है। अमेरिका में संभावित रिफाइंड कॉपर टैरिफ लागू होने की आशंका के चलते आयातकों ने पहले ही खरीदारी तेज कर दी है, जिससे आपूर्ति में लगातार तंगी बनी हुई है। हालांकि व्यापक आर्थिक चुनौतियों और अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर किसी ठोस स्पष्टता के अभाव में निकट भविष्य में कॉपर का मूल्य दायरा सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि आपूर्ति का जोखिम व्यापक आर्थिक दबावों को संतुलित कर रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार: डॉलर, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
मुद्रा बाजार में सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना रहा। जुलाई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचे अमेरिकी डॉलर की हालिया नरमी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते थम गई है। वहीं दूसरी ओर, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न किए जाने और यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव देखा गया। इसके बावजूद, ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के कयासों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचला समर्थन मिल रहा है।
इसी तरह यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) एशियाई सत्र में फिसलकर 157.00 से नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा किए गए रेट चेक के बाद बाजार में हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई, जिससे जापानी येन को मजबूती मिली। जापान में अवकाश के दिन रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने कारोबारियों को सतर्क रखा है, जिससे डॉलर की गिरावट सीमित रही और इस मुद्रा जोड़े का नुकसान थम गया।
केंद्रीय बैंकों का नीतिगत रुख और सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में हलचल
बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। नीति समिति में यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की आम उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा।
तीसरी तिमाही के अंतिम सप्ताहों में प्रवेश करते हुए वैश्विक वित्तीय बाजार एक असाधारण स्थिति का सामना कर रहे हैं। अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव ने समूचे बाजार को जकड़ रखा है, लेकिन इसके विपरीत कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। दूसरी तरफ अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुलने की स्थिति में दिखे। बाजार का तनाव मुख्य रूप से सॉवरेन बॉन्ड में केंद्रित रहा, जहां शुक्रवार देर रात यूरोपीय और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल दर्ज किया गया था। बॉन्ड बाजार की यह अस्थिरता और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के कड़े फैसले आने वाले दिनों में सभी प्रमुख संपत्तियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।


















