भारतीय सिनेमा में दीपिका पादुकोण की पहचान केवल उनकी बड़ी फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि किरदार में ढलने के लिए उनकी लगन भी चर्चा में रही है। हाल के दिनों में फिल्म ‘सिंघम अगेन’ में नजर आईं दीपिका पादुकोण साल 2024 में बेटी दुआ के जन्म के बाद अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और काम के संतुलन को लेकर सुर्खियों में रही हैं। अपनी ‘8 ऑवर शिफ्ट डिमांड’ और ‘स्पिरिट’ तथा ‘कल्कि 2’ जैसी फिल्मों से बाहर होने की खबरों के बीच, उनके करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। मशहूर अभिनेत्री और थिएटर ट्रेनर जयति भाटिया ने एक बातचीत में खुलासा किया कि कैसे एक एक्टिंग वर्कशॉप के दौरान दीपिका पादुकोण ने अपनी झिझक मिटाने के लिए बिना किसी डर के खुलकर गाली देने का अभिनय किया था।
करियर का टर्निंग पॉइंट और वर्कशॉप की शुरुआत
दीपिका पादुकोण ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से की थी, लेकिन ‘कॉकटेल’ को उनके करियर का असली टर्निंग पॉइंट माना जाता है। इस फिल्म के बाद उनकी अभिनय क्षमता में बड़ा बदलाव देखा गया। जब फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह को अपनी बड़ी फिल्म ‘राम लीला’ के लिए कास्ट किया, तो वे चाहते थे कि दीपिका अपने किरदार में पूरी तरह रच-बस जाएं। इसके लिए उन्होंने प्रसिद्ध थिएटर आर्टिस्ट जयति भाटिया को दीपिका के साथ एक विशेष एक्टिंग वर्कशॉप करने की जिम्मेदारी सौंपी।
यह वर्कशॉप कुल सात दिनों के लिए तय की गई थी, जिसमें रोजाना चार घंटे तक अभ्यास किया जाना था। इसका मुख्य उद्देश्य दीपिका की संवाद अदायगी, बॉडी लैंग्वेज और भावाभिव्यक्ति को और अधिक तीखा बनाना था ताकि वे भंसाली के निर्देशन की उच्च अपेक्षाओं पर खरी उतर सकें।
चौथे दिन भंसाली को दी गई खास सलाह
सिद्धार्थ कन्नन को दिए गए एक इंटरव्यू में जयति भाटिया ने उस दौर की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि दीपिका ने पहले दिन से ही वर्कशॉप में गजब का जोश और समर्पण दिखाया। लेकिन अभ्यास के चौथे दिन ही जयति भाटिया को अहसास हो गया कि दीपिका को पारंपरिक ट्रेनिंग की अब आवश्यकता नहीं है।
जयति भाटिया ने संजय लीला भंसाली से सीधे बात की और कहा कि ‘कॉकटेल’ फिल्म के बाद दीपिका एक बेहद निडर अभिनेत्री बन चुकी हैं। उन्होंने निर्देशक से स्पष्ट कहा कि यदि वे तीन दिन और वर्कशॉप जारी रखते हैं, तो यह केवल समय की बर्बादी होगी। जयति ने भंसाली से कहा कि दीपिका किसी भी चुनौतीपूर्ण दृश्य में आसानी से ढल सकती हैं, इसलिए वे बिना किसी संकोच के सीधे शूटिंग के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
बालकनी से गालियां देने का अनोखा टास्क
दीपिका के अंदर के कलाकार को पूरी तरह से परखने के लिए जयति भाटिया ने एक अनोखा अभ्यास कराने का फैसला किया। संजय लीला भंसाली के दफ्तर की बालकनी के ठीक नीचे एक स्ट्रीट स्नैक वेंडर की दुकान थी। जयति ने दीपिका को टास्क दिया कि वे बालकनी में खड़ी होकर जोर-जोर से चिल्लाकर गालियां दें, मानों वे किसी से तीव्र विवाद कर रही हों, लेकिन नीचे वेंडर की तरफ न देखें।
एक बड़ी स्टार होने के बावजूद दीपिका पादुकोण ने बिना किसी झिझक के इस टास्क को स्वीकार किया। उन्होंने तुरंत बालकनी का दरवाजा खोला और जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। जब जयति भाटिया ने तय सीमा पर सीन खत्म करने का संकेत दिया, तब भी दीपिका अपनी रौ में आगे बढ़ती रहीं और ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जो आमतौर पर उनसे सुनने की उम्मीद नहीं की जाती थी। जयति भाटिया के अनुसार, दीपिका को इस बात की जरा भी परवाह नहीं थी कि आसपास का कोई व्यक्ति उन्हें देख या सुन रहा है, जो उनके निडर स्वभाव को उजागर करता है।



















