हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकारों की कहानियां दर्ज हैं, जिनका सफर किसी तयशुदा लीक पर नहीं चला। उन्हीं में से एक नाम अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह का भी है, जिन्होंने बड़े पर्दे पर अपनी एक बिल्कुल अलग और सौम्य छाप छोड़ी। एक समय ऐसा था जब वह अभिनय से कोसों दूर देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने की तैयारी में जुटे थे, लेकिन उनकी राहें बदलती चली गईं। स्कूल में बच्चों को संगीत और इतिहास की तालीम देने से लेकर फिल्मों के सेट तक पहुंचने का उनका यह सफर बेहद दिलचस्प रहा। जब सिनेमा के पर्दे पर उनकी मौजूदगी सामने आई, तो पहली ही बड़ी चर्चा बटोरने वाली फिल्म के बाद लोग उनकी सादगी भरे अंदाज के कायल हो गए। 11 अक्टूबर 1968 को जन्मे अभिनेता 11 अक्टूबर को अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं।
शाही घराने और सियासत से जुड़ा पारिवारिक इतिहास
चंद्रचूड़ सिंह का जन्म देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था। उनका पारिवारिक ताल्लुक राजनीति और राजसी पृष्ठभूमि दोनों से काफी गहरा रहा है। उनके पिता कैप्टन बलदेव सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में खैर क्षेत्र से जुड़े थे और वह सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी रहे। वहीं, दूसरी तरफ उनकी मां कृष्णा कुमारी देवी ओडिशा के बोलांगीर के शाही घराने से ताल्लुक रखती थीं। घर में तीन भाइयों का माहौल था और रचनात्मकता परिवार के भीतर काफी घुली-मिली थी। चंद्रचूड़ के दोनों भाई भी आगे चलकर सिनेमाई दुनिया से जुड़े। उनके एक भाई अभिमन्यु सिंह ने अभिनेता और निर्देशक के तौर पर अपनी पहचान बनाई, जबकि दूसरे भाई आदित्य सिंह फिल्म निर्माण के काम से जुड़े रहे।
दून स्कूल, वेल्हम और सेंट स्टीफंस: क्लासरूम से यूपीएससी तक
उनकी शुरुआती तालीम देहरादून के जाने-माने संस्थानों वेल्हम बॉयज स्कूल और दून स्कूल में पूरी हुई। स्कूल का दौर खत्म होने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली लौटे, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला लिया और वहां से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS की राह चुनने का पक्का मन बनाया और यूपीएससी परीक्षा की कठिन तैयारी में पूरी तरह जुट गए।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ उनके भीतर कला और संगीत का गहरा लगाव भी हमेशा जीवित रहा। वह बाकायदा शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षित गायक हैं। फिल्मी दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने से पहले उन्होंने कुछ समय तक अध्यापन का काम भी संभाला। उन्होंने दिल्ली के वसंत वैली स्कूल में नन्हे बच्चों को संगीत की शिक्षा दी। इसके अलावा, जिस दून स्कूल में उन्होंने खुद अपनी स्कूली पढ़ाई की थी, वहां उन्होंने इतिहास के शिक्षक के रूप में भी अध्यापकीय जिम्मेदारी निभाई। हालांकि, धीरे-धीरे उनका रुझान सिनेमा की तरफ बढ़ता चला गया और आखिरकार उन्होंने अभिनय को ही अपनी मंजिल बनाने का फैसला किया।
पहली फिल्म की दस्तक और माचिस से रातोंरात स्टारडम
सिनेमाई पर्दे पर चंद्रचूड़ सिंह का पहला कदम साल 1996 में पड़ा, जब उनकी पहली फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ रिलीज हुई। यह फिल्म दिग्गज अभिनेता की कंपनी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी ABCL के बैनर तले बनाई गई थी। इस शुरुआत के फौरन बाद उसी दौर में आई फिल्म ‘माचिस’ ने उनके पूरे करियर का रुख ही बदलकर रख दिया।
गंभीर और संजीदा विषय पर बनी फिल्म ‘माचिस’ में चंद्रचूड़ के सशक्त और स्वाभाविक अभिनय को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों ने भी हाथों-हाथ लिया। इस फिल्म में उनके काम को इतनी बड़ी पहचान मिली कि उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी दिया गया। इस बड़ी कामयाबी ने उन्हें 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में हिंदी सिनेमा के एक बेहद होनहार और उभरते हुए चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया। इस कामयाबी के बाद निर्देशकों और निर्माताओं के बीच उनकी मांग तेजी से बढ़ी और उनके पास फिल्मों की कतार लग गई।
ऐश्वर्या राय के साथ जोड़ी और अन्य यादगार किरदार
सफलता का यह दौर आगे भी कई चर्चित फिल्मों में जारी रहा। उन्होंने अपने करियर में रोमांटिक, संजीदा और पारिवारिक हर तरह के जॉनर में काम किया। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में ‘दिल क्या करे’, ‘क्या कहना’, ‘दाग: द फायर’ और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया’ जैसी फिल्में शामिल रहीं। खासकर साल 2000 के दौर में आई फिल्म ‘जोश’ में वह अभिनेत्री ऐश्वर्या राय के हीरो के रूप में नजर आए, जहां उनके किरदार को काफी पसंद किया गया।
चंद्रचूड़ सिंह को दर्शकों के बीच उनकी सादगी, स्क्रीन पर गरिमामयी मौजूदगी और शांत स्वभाव वाले किरदारों के लिए हमेशा याद किया जाता है। भले ही उनका फिल्मी करियर कई समकालीन सितारों की तुलना में बहुत लंबा या लगातार विवादों और सुर्खियों में रहने वाला नहीं रहा, लेकिन ‘माचिस’ समेत उनकी तमाम फिल्मों में निभाए गए किरदारों ने दर्शकों के जेहन में एक अमिट छाप छोड़ी है।
निजी जीवन और आज का मुकाम
अगर उनके निजी जीवन की बात करें, तो चंद्रचूड़ सिंह ने साल 1999 में अवंतिका कुमारी के साथ शादी रचाई थी। हालांकि, समय बीतने के साथ दोनों की राहें अलग हो गईं और उनका वैवाहिक रिश्ता खत्म हो गया। इस शादी से उनका एक बेटा है। सिविल सेवा में जाकर प्रशासनिक अधिकारी बनने की ख्वाहिश से लेकर सिनेमा के रुपहले पर्दे पर अपनी खास पहचान बनाने तक, चंद्रचूड़ सिंह का सफर इस बात का गवाह है कि लगन और हुनर किस तरह किसी भी इंसान को अप्रत्याशित रास्तों पर भी एक अलग मुकाम दिला सकते हैं।



















