सर्दियों के मौसम में पारे में गिरावट आते ही मवेशियों के रख-रखाव को लेकर सजगता जरूरी हो जाती है. खासकर गर्भधारण कर चुकी गायों के मामले में थोड़ी सी भी असावधानी उनके स्वास्थ्य और पेट में पल रहे बच्चे की सेहत को प्रभावित कर सकती है. इसी संदर्भ में बोकारो कृषि विज्ञान केंद्र की पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. सुषमा ने गर्भवती गायों की उचित देखभाल, उनके आहार प्रबंधन और मौसमी बीमारियों से बचाव के अहम तौर-तरीके साझा किए हैं.
ठंडी हवा से सुरक्षा और गोशाला का सही प्रबंधन
सर्दियों की शुरुआत होते ही पशुपालकों को गाभिन गायों के रहने के स्थान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है. मवेशियों को सीधी सर्द हवा के संपर्क में आने से बचाना बेहद जरूरी है. गोशाला की बनावट ऐसी होनी चाहिए जहां दिन के समय पर्याप्त धूप पहुंच सके और हवा की उचित निकासी यानी वेंटिलेशन की व्यवस्था बनी रहे. सर्द हवा के झोंकों से बचाव के लिए गोशाला के खुले हिस्सों को अच्छी तरह ढक कर रखना चाहिए.
इसके अलावा गायों को कभी भी नम या गीले फर्श पर नहीं बैठाना चाहिए. उनके बैठने की जगह पूरी तरह सूखी और साफ-सुथरी होनी चाहिए. ठंड से बचाव के लिए फर्श पर पुआल बिछाकर सूखा बिछावन तैयार किया जा सकता है. गोशाला परिसर में नियमित सफाई जरूरी है और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, जिससे मच्छरों व अन्य परजीवियों का प्रकोप न फैले.
संतुलित आहार और पानी की उचित व्यवस्था
गर्भावस्था के दौरान गाय के पोषण की जरूरतें बढ़ जाती हैं, इसलिए आहार में संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है. डॉ. सुषमा के अनुसार गाय को हरे और सूखे चारे के साथ निश्चित अनुपात में खली तथा मिनरल मिक्सचर दिया जाना चाहिए. यह पोषण भ्रूण के समुचित विकास और गाय की शारीरिक क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है.
हालांकि चारे और सप्लीमेंट की मात्रा पशु के कुल वजन, गर्भ के चरण, शारीरिक दशा और उसके दूध उत्पादन के आधार पर तय की जानी चाहिए. केवल सामान्य चारा देने से मवेशी की संपूर्ण पोषण जरूरतें पूरी नहीं होती हैं. साथ ही पशुपालकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गाय को रोजाना 75 से 80 लीटर साफ और ताजा पानी पीने के लिए मिले, क्योंकि ठंड में अक्सर पानी की कमी से पाचन संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं.
बीमार पशुओं से दूरी और लक्षणों पर निगरानी
संक्रमण के खतरे को देखते हुए गाभिन गाय को अस्वस्थ या बीमार पशुओं के संपर्क में बिल्कुल नहीं लाना चाहिए. स्वस्थ पशुओं के रहने और खाने की व्यवस्था हमेशा अलग रखनी चाहिए. गर्भावस्था के पूरे समय गाय के खान-पान, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए. यदि गाय अचानक चारा खाना कम कर दे, सुस्त दिखने लगे या किसी अन्य तरह की परेशानी के लक्षण प्रकट हों, तो बिना देर किए पशु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.
सर्दियों में नहलाने से परहेज और सफाई का तरीका
शीत ऋतु में गाभिन गायों को नियमित रूप से पानी से नहलाने की आवश्यकता नहीं होती है. अत्यधिक ठंड में पानी से नहलाने पर उन्हें ठंड लगने और बीमार पड़ने का जोखिम रहता है. पशु को स्वच्छ रखने के लिए पानी की जगह सूखे कपड़े अथवा ब्रश की सहायता से उसके शरीर की धूल और गंदगी साफ की जा सकती है.



















