उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में मौसमी गतिविधियों के कारण तापमान में तब्दीली देखने को मिल रही है। राज्य के ऊंचे शिखरों पर सर्दी की आहट तेज हो गई है, जबकि निचले मैदानी इलाकों में दिन के समय खिली धूप राहत दे रही है। बीते चौबीस घंटों के दौरान कई जगहों पर बौछारों के साथ गिरे ओलों और तेज हवाओं ने समूचे वातावरण में ठंडक घोल दी है। पर्वतीय हिस्सों में गरज-चमक और बादलों की आवाजाही बनी हुई है, जिससे पारे में गिरावट दर्ज की गई है।
पर्वतीय जिलों में बर्फबारी और हल्की वर्षा की संभावना
पहाड़ी ढलानों और ऊंची चोटियों पर बादलों का पहरा बना रहेगा। विशेष रूप से 3500 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर स्थित स्थानों पर बर्फ की सफेद चादर बिछने के आसार हैं। इस दौरान हल्की से बहुत हल्की वर्षा के साथ आकाशीय बिजली चमकने की गतिविधियां भी सामने आ सकती हैं।
तिथि वार पूर्वानुमान के अनुसार 11 और 12 अक्टूबर को देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के ऊंचे क्षेत्रों में मौसमी बदलाव नजर आएगा। इसके बाद 13 अक्टूबर को नैनीताल जिले के कुछ इलाकों में गरज के साथ हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। वहीं 14 और 15 अक्टूबर को भी उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग तथा पिथौरागढ़ के पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा की संभावना बनी रहेगी।
हरिद्वार और उधम सिंह नगर में शुष्क रहेगा मौसम
पहाड़ों के उलट मैदानी जिलों में स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। हरिद्वार तथा उधम सिंह नगर जनपदों में 11 अक्टूबर को आसमान खुला रहेगा और अच्छी धूप खिलेगी। यहां दिन के वक्त मौसम पूरी तरह शुष्क रहने से जनजीवन सामान्य रहेगा। हालांकि रात के समय और तड़के न्यूनतम तापमान में कमी आने से स्थानीय निवासियों को हल्की सर्दी महसूस होगी।
प्रशासन और आम नागरिकों के लिए संतोष की बात यह है कि 11 से 14 अक्टूबर के अंतराल में पूरे राज्य के लिए किसी प्रकार का गंभीर अलर्ट या चेतावनी जारी नहीं की गई है। मैदानी भागों में सामान्य परिस्थितियों के चलते खेतों में काम कर रहे किसानों और सड़कों पर सफर करने वाले मुसाफिरों को आवाजाही में कोई परेशानी नहीं होगी।
मानसून लौटने के बाद मौसमी हलचल की वजह
अक्टूबर के महीने में मानसूनी हवाओं की वापसी के उपरांत भी होने वाली वर्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार, अक्टूबर में मानसून विदा होने का मतलब यह नहीं कि वर्षा पूरी तरह थम गई है।
वायुमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ जब प्रचुर नमी के संपर्क में आता है, तो पर्वतीय ढलानों पर अचानक तीव्र बौछारें, ओलावृष्टि और ऊंची चोटियों पर हिमपात की परिस्थितियां जन्म ले लेती हैं। इसी कारण मानसून बाद भी पहाड़ी इलाकों में सीमित अवधि के लिए यह मौसमी हलचल बनी हुई है।
























