बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों की वो कहानियां साझा कीं जो शायद ही किसी ने पहले सुनी हों। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके लुक का मज़ाक उड़ाया जाता था और कैसे उन्होंने बिना किसी फिल्मी पहचान के इस मुश्किल इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई।
रोज़ सुनते थे 'कटी-फटी शक्ल' का ताना
जब शत्रुघ्न सिन्हा से पूछा गया कि क्या किसी ने उनसे कभी यह कहा था कि वे अपनी शक्ल के साथ हीरो नहीं बन सकते, तो उन्होंने बड़े बेबाक अंदाज में जवाब दिया। उनके शब्दों में, "ये तो मैं रोज ही सुनता था। मेरी कटी-फटी शक्ल देखकर लोग बोलते ही थे कि ये कहां से आ गया। जब मैं स्ट्रगल करने गया तो लोग बोलते थे कि बिहार से कौन सा नमूना आ गया है।"
शत्रुघ्न सिन्हा ने यह भी साफ किया कि जब उन्होंने एक्टर बनने का फैसला किया था, उस वक्त उनकी फैमिली या जान-पहचान में कोई भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा नहीं था। कोई गॉडफादर नहीं, कोई अंदर का रास्ता नहीं, बस जुनून और खुद पर भरोसा।
अमिताभ बच्चन ने लगाया था कार को धक्का
इंटरव्यू की सबसे चौंकाने वाली बात थी शत्रुघ्न सिन्हा और अमिताभ बच्चन की दोस्ती का यह किस्सा। शत्रुघ्न ने बताया कि संघर्ष के दिनों में उनके पास अपना फ्लैट भी था और एक कार भी, और उस कार को उनके करीबी दोस्त अमिताभ बच्चन धक्का लगाते थे।
उन्होंने कहा, "हमारी बहुत पुरानी दोस्ती है, संघर्ष के दिनों से साथ हैं। वो उम्र में मुझसे बड़े हैं, लेकिन फिल्मों के मामले में मैं थोड़ा उनसे बड़ा हूं। उन्होंने खुद कहा था कि मेरे पास फ्लैट था और गाड़ी भी थी। उनसे मैं कार में धक्का भी लगवाता था।"
जब पूछा गया कि भला इस बात पर कौन यकीन करेगा, तो शत्रुघ्न सिन्हा ने मुस्कुराते हुए कहा, "वो दोस्त हैं हमारे। आपके भी दोस्त होंगे पुराने। वो तो आपसे वैसे ही बात करेंगे ना।"
यारों की टोली और राज कपूर का सम्मान
शत्रुघ्न सिन्हा ने यह भी बताया कि उन्हीं संघर्ष के दिनों में वे असरानी, अमिताभ बच्चन, सुभाष घई और अनिल धवन के साथ मिलकर फिल्में देखने जाया करते थे। यह एक ऐसी मंडली थी जिसमें सभी अपने-अपने सपनों के पीछे भाग रहे थे और एक-दूसरे का हौसला बनाए रखते थे।
इसके अलावा उन्होंने मशहूर फिल्ममेकर राज कपूर को याद किया। शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया कि राज कपूर ने हमेशा उन्हें बहुत मान-सम्मान दिया, जो उनके लिए एक बड़ी प्रेरणा रही।













