सुरैया: शूटिंग देखने पहुंची लड़की कैसे बन गई अपने दौर की सबसे महंगी हीरोइन, अधूरे प्यार में बीत गई पूरी जिंदगीबॉलीवुड
3 घंटे पहले· 4

सुरैया: शूटिंग देखने पहुंची लड़की कैसे बन गई अपने दौर की सबसे महंगी हीरोइन, अधूरे प्यार में बीत गई पूरी जिंदगी

महज शूटिंग देखने स्टूडियो गई सुरैया को निर्देशक ने पहली नजर में फिल्म थमा दी और वह सिनेमा की चमकती सितारा बन गईं, मगर देव आनंद से अधूरा प्यार उन्हें ताउम्र कुंवारा छोड़ गया।

हिंदी सिनेमा के शुरुआती सुनहरे दौर की कुछ हस्तियां ऐसी रहीं जिनकी चमक समय के साथ धुंधली नहीं पड़ती। सुरैया उन्हीं चुनिंदा नामों में से एक थीं। खूबसूरती, बेहतरीन अभिनय और मखमली आवाज के मेल ने उन्हें वह ऊंचाई दी, जिसे दशकों बाद आज भी सम्मान से याद किया जाता है। दिलचस्प यह है कि उन्होंने कभी पर्दे पर आने का ख्वाब नहीं बुना था, बल्कि हालात उन्हें सीधे फिल्मी दुनिया तक खींच लाए। और इससे भी बड़ी बात यह कि अपने प्यार की खातिर उन्होंने जिंदगीभर शादी नहीं की।

लाहौर से मुंबई तक का सफर

सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर में हुआ था और उनका पूरा नाम सुरैया जमाल शेख था। उम्र जब महज एक साल की थी, तभी परिवार मुंबई आ बसा। उनके मामा एम. जहूर पहले से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय थे, लिहाजा बचपन से ही सुरैया को कैमरे, सेट और गीत-संगीत का माहौल देखने को मिला। बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के बच्चों के कार्यक्रमों में गाना शुरू कर दिया था, और उनकी मीठी आवाज सुनने वालों के दिल में उतर जाती थी।

एक नजर ने बदल दी किस्मत

जिंदगी का असली मोड़ तब आया जब सुरैया अपने मामा के साथ फिल्म ‘ताजमहल’ की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो पहुंचीं। मकसद सिर्फ शूटिंग का नजारा देखना था, लेकिन वहां मौजूद निर्देशक नानूभाई वकील की नजर उन पर ठहर गई। उनकी मासूमियत और सादगी से प्रभावित होकर निर्देशक ने उसी फिल्म में उन्हें मुमताज महल का किरदार सौंप दिया। बस यहीं से उनके फिल्मी सफर की नींव पड़ गई।

आवाज ने भी दिलाई अलग पहचान

अभिनय अकेला उनका हुनर नहीं था। एक गायिका के रूप में भी सुरैया ने खूब शोहरत बटोरी। जाने-माने संगीतकार नौशाद उनकी आवाज से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने फिल्म ‘शारदा’ में सुरैया को गाने का मौका दिया। इसके बाद तो उनके गाए कई नगमे ऐसे बने जो आज भी संगीतप्रेमियों की जुबान पर रहते हैं। ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है’, ‘तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी’, ‘वो पास रहे या दूर’, ‘चुप-चुप खड़े हो जरूर कोई बात है’ और ‘धीरे-धीरे आ रे बादल’ जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया।

पर्दे की कामयाब फिल्में और देव आनंद संग जोड़ी

फिल्मों के मोर्चे पर भी सुरैया का खाता लंबा रहा। ‘अनमोल घड़ी’, ‘प्यार की जीत’, ‘विद्या’, ‘दिल्लगी’, ‘बड़ी बहन’, ‘शायर’, ‘दास्तान’, ‘अफसर’, ‘सनम’, ‘दीवाना’ और ‘मिर्जा गालिब’ जैसी कई हिट फिल्में उनके नाम रहीं। दर्शकों को उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा अभिनेता देव आनंद के साथ भाती थी। पर्दे पर दिखने वाली यह केमिस्ट्री असल जिंदगी में भी प्यार का रूप ले चुकी थी।

वह प्रेम कहानी जो अधूरी रह गई

मगर सुरैया और देव आनंद की यह मोहब्बत शादी की दहलीज तक नहीं पहुंच सकी। परिवार और धर्म से जुड़ी अड़चनों के चलते दोनों एक नहीं हो पाए। उनका यह अधूरा रिश्ता आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा चर्चित प्रेम कहानियों में गिना जाता है।

स्टारडम की बुलंदी

उन दिनों सुरैया की लोकप्रियता किसी भी बड़े सुपरस्टार से कमतर नहीं थी। उनके घर के बाहर प्रशंसकों का हुजूम जमा रहता और लोग एक झलक पाने के लिए घंटों डटे रहते। वह अपने दौर की सबसे ऊंची फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं, और उनका जादू सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि विदेशों तक फैला हुआ था।

सादगी भरी विदाई

लंबे अरसे तक इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के बाद सुरैया ने धीरे-धीरे फिल्मों से किनारा कर लिया। उन्होंने ताउम्र शादी नहीं की और बेहद सादा जीवन जिया। उम्र बढ़ने के साथ सेहत कमजोर पड़ती गई और आखिरकार 31 जनवरी 2004 को 74 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन अपने गीतों, फिल्मों और यादगार अदाकारी के जरिए वह आज भी लाखों दिलों में जिंदा हैं।

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