पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी बात रखी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया बयानों का संदर्भ देते हुए उन्होंने राज्य के शासन, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। दिलीप घोष के अनुसार राज्य के नागरिक बहुत समय से इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे कि वे बिना किसी प्रशासनिक दबाव या भय के अपने धार्मिक विश्वासों को प्रकट कर सकें और 'जय श्री राम' का उद्घोष कर सकें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज जो अनुकूल वातावरण दिख रहा है, वह किसी राजनीतिक कृपा से नहीं बल्कि प्रदेश की जनता के दृढ़ संकल्प और संघर्ष के दम पर संभव हुआ है।
धार्मिक नारों और पिछली प्रशासनिक कार्रवाई पर बयान
राज्य के पुराने दौर की चर्चा करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक तंत्र का अनुचित इस्तेमाल किया गया था। उस समय अगर कोई सामान्य नागरिक भी 'जय श्री राम' का नारा लगाता था, तो पुलिस उसे पकड़कर जेल भेज देती थी और उन्हें दुर्व्यवहार तथा मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में यह पूरी तस्वीर बदल चुकी है। आज राज्यभर में लोग बिना किसी हिचकिचाहट के अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और धार्मिक नारे लगा रहे हैं। उनके अनुसार यह सामाजिक परिवर्तन स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि जनता ने किस प्रकार अपने मौलिक अधिकारों और सांस्कृतिक स्वतंत्रता को बहाल करने का फैसला किया है।
ममता बनर्जी के चुनावी सफर और राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिलीप घोष ने उनके हालिया चुनावी रिकॉर्ड को सामने रखा। उन्होंने कहा कि वह दो अलग-अलग चुनावों में लगातार दो बार पराजित हो चुकी हैं। पिछली बार उनकी पार्टी भले ही चुनाव जीत गई थी, लेकिन वह स्वयं पिछले दरवाजे से सत्ता में दाखिल होकर मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुई थीं। दिलीप घोष का दावा है कि इस बार के चुनावी नतीजों ने उनकी पार्टी का पूरी तरह सफाया कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की मुख्यधारा की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए कोई व्यावहारिक जमीन या गुंजाइश नहीं बची है। इसी राजनीतिक हाशिए पर जाने के कारण वह अब दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और हंगामा करने की रणनीति अपना रही हैं। जब गृह राज्य की जनता ही उन्हें पूरी तरह नकार चुकी है, तब राष्ट्रीय राजधानी में उनके राजनीतिक आधार का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
राहुल गांधी पर आरोप और विदेशी ताकतों का संदर्भ
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कार्यशैली की कड़ी आलोचना करते हुए दिलीप घोष ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विदेशी शक्तियों, विदेशी धन और बाहरी इशारों के प्रभाव में आकर देश के भीतर अस्थिरता और सामाजिक अशांति उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री का कहना था कि देश की चुनी हुई सरकार और लोकतांत्रिक संवैधानिक संस्थानों का विरोध करना राहुल गांधी का नियमित राजनीतिक ढर्रा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर देश की छवि को नुकसान पहुंचाना उनकी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा बन गया है और वह लगातार इसी नकारात्मक रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।
नशीले पदार्थों का संकट और सामूहिक सतर्कता की जरूरत
राजनीतिक बहसों के अतिरिक्त दिलीप घोष ने समाज में तेजी से फैलते नशीले पदार्थों के चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ड्रग्स का यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इस जटिल समस्या से जूझ रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि युवा पीढ़ी तेजी से इस दलदल की चपेट में फंसती जा रही है, जिससे उनके भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए बहुआयामी कदम उठा रही है और स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने स्तर पर भी पूरी तरह सतर्क रहें और अगली पीढ़ी को इस अभिशाप से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक प्रयासों में सक्रिय सहयोग प्रदान करें।



















