मनोरंजन की दुनिया में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टीवी शो, फीचर फिल्मों और बड़ी वेब सीरीज में अब प्रशिक्षित कलाकारों की जगह सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। इस बदलते ट्रेंड ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या अब कैमरे के सामने एक्टिंग की काबिलियत से ज्यादा मायने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के फॉलोअर्स की संख्या रखती है। फिल्म निर्माता और कास्टिंग डायरेक्टर्स भी अक्सर उन चेहरों को प्राथमिकता देते नजर आते हैं, जिनकी डिजिटल दुनिया में पहले से ही एक बड़ी फैन फॉलोइंग मौजूद है। इस गंभीर मुद्दे पर अब मशहूर वेब सीरीज 'राख' में अपनी बेहतरीन अदाकारी का जलवा बिखेर चुकीं एक्ट्रेस नैना सरीन ने बेबाकी से अपनी बात सामने रखी है। उनका मानना है कि कैमरे के सामने किसी भी कलाकार की असली पहचान उसकी कला, टैलेंट और कड़ी मेहनत से होनी चाहिए, न कि इस बात से कि इंटरनेट पर उसे कितने लोग फॉलो करते हैं या उसकी ऑनलाइन इमेज कैसी है।
सोशल मीडिया के दौर में टैलेंट की अनदेखी
आज के डिजिटल युग में, कास्टिंग की प्रक्रिया काफी हद तक बदल चुकी है। नैना सरीन ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम करते हुए बहुत कुछ करीब से देखा और सीखा है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि एक सच्चे कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका अपना टैलेंट होता है। इंटरनेट पर डाले गए चंद पोस्ट, फॉलोअर्स का बड़ा आंकड़ा या किसी भी तरह की बनाई गई पब्लिक इमेज यह कतई तय नहीं कर सकती कि एक एक्टर के अंदर कितनी क्षमता है। इसके बावजूद, यह इंडस्ट्री की एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है कि आज के समय में कई बार प्रतिभाशाली कलाकारों के बजाय उन लोगों को बड़े प्रोजेक्ट्स सौंप दिए जाते हैं जिनकी ऑनलाइन दुनिया में लोकप्रियता ज्यादा होती है। यह स्थिति उन कलाकारों के लिए काफी निराशाजनक होती है जो सालों तक थिएटर करते हैं और एक्टिंग की बारीकियां सीखते हैं।
कम फॉलोअर्स की वजह से छूटे मौके
सोशल मीडिया के इस भारी दबाव का असर खुद नैना सरीन के करियर पर भी पड़ा है। उन्होंने कास्टिंग के मौजूदा मापदंडों पर सवाल उठाते हुए अपनी स्थिति भी स्पष्ट की। नैना ने बताया, "कई बार मुझे लगता है कि अगर मेरे सोशल मीडिया फॉलोअर्स ज्यादा होते तो शायद मुझे कुछ और मौके मिल सकते थे।" हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि इंडस्ट्री में अब भी ऐसे कई अच्छे फिल्ममेकर्स मौजूद हैं जो सिर्फ सोशल मीडिया के आंकड़ों के पीछे नहीं भागते। ये निर्माता अभी भी कलाकारों का चुनाव उनकी असली काबिलियत, एक्टिंग स्किल्स और उनकी मेहनत को देखकर ही करते हैं, जो सिनेमा के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।
कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग का महत्व
शॉर्टकट और रातों-रात मिलने वाली शोहरत के इस दौर में, नैना सरीन को अब भी उम्मीद है कि आने वाले समय में फिर से सिर्फ और सिर्फ असली प्रतिभा को ही सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा। उन्होंने अपने खुद के संघर्ष और सफर का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में कई मुश्किल ऑडिशन दिए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी कला को निखारने के लिए पेशेवर रूप से एक्टिंग की ट्रेनिंग भी ली है। वह लगातार खुद को एक बेहतर कलाकार के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव कोशिश करती रही हैं। नैना का साफ तौर पर कहना है कि आज वह जिस मुकाम पर हैं और उन्हें जो भी काम हासिल हुआ है, वह किसी इंटरनेट ट्रेंड की वजह से नहीं, बल्कि उनकी दिन-रात की कड़ी मेहनत और काम के प्रति उनके पूरे समर्पण का नतीजा है।
संघर्षरत कलाकारों को धैर्य रखने की सलाह
अपने कड़वे और मीठे अनुभवों को साझा करते हुए, नैना सरीन ने उन सभी नए और संघर्षरत कलाकारों के लिए एक अहम सलाह भी दी है, जो इस बदलती हुई इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सच्चे कलाकार को हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए और अपने काम पर पूरा भरोसा बनाए रखना चाहिए। उनका पक्का मानना है कि अगर किसी इंसान के अंदर सच में एक्टिंग की प्रतिभा है, तो आज नहीं तो कल उसे उसकी सही पहचान जरूर मिलेगी। भले ही इस सफर में और सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन ईमानदारी से की गई मेहनत और अपने काम के प्रति सच्ची लगन कभी भी बेकार नहीं जाती।




















