सिनेमा के पर्दे पर अपनी अदाकारी और लावण्य से दशकों तक राज करने वाली ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने अपने पूरे सफर में कई चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए। आमतौर पर पारंपरिक और चुलबुले किरदारों में नजर आने वाली इस अदाकारा ने साल 1976 में दर्शकों को उस वक्त पूरी तरह हैरान कर दिया, जब उन्होंने फिल्म महबूबा में एक तवायफ की भूमिका स्वीकार की। इस फिल्म में उनके साथ मुख्य भूमिका में राजेश खन्ना नजर आए थे। फिल्म के दृश्यों में जब हेमा मालिनी मंच पर उतरती हैं और राजेश खन्ना खामोशी से उन्हें देखते रह जाते हैं, वह दृश्य भारतीय सिनेमा के यादगार लम्हों में गिना जाता है।
लता मंगेशकर और आर डी बर्मन की जुगलबंदी से अमर हुआ गीत
इस फिल्म का एक गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है। वह गीत था मैं तवायफ हूं मुजरा करूंगी, जिसमें हेमा मालिनी ने तवायफ के वेश में ऐसा मनमोहक नृत्य पेश किया कि पूरी महफिल मंत्रमुग्ध हो गई। इस रचना को सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सजाया था, जबकि इसका संगीत संगीतकार आर डी बर्मन ने तैयार किया था। लता मंगेशकर की भावपूर्ण आवाज और आर डी बर्मन के संगीत संयोजन ने इस गीत को उस दौर में जबर्दस्त लोकप्रियता दिलाई।
पुनर्जन्म के ताने-बाने पर बुनी गई थी फिल्म की दास्तान
फिल्म महबूबा की पूरी पटकथा पुनर्जन्म के रहस्य और रोमांस के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी के प्रवाह में राजेश खन्ना का किरदार धीरे-धीरे अपनी पूर्व जन्म की स्मृतियों को याद करने लगता है। जीवन के इसी रहस्यमयी मोड़ पर ऐसा वाकया आता है जब हेमा मालिनी महफिल के बीच पहुंचकर उनके सामने मुजरा पेश करती हैं। हेमा मालिनी ने इस पूरे क्रम में जिस संजीदगी और ऊर्जा के साथ नृत्य किया, उसने यह साबित कर दिया कि वह किसी भी तरह के जटिल किरदार में पूरी तरह ढल सकती हैं।
सच्चे पारिवारिक अनुभव से उपजा था फिल्म का विचार
इस क्लासिक फिल्म का निर्देशन शक्ति सामंत ने किया था। पुनर्जन्म और परलौकिक अनुभवों से जुड़ी इस कहानी की प्रेरणा शक्ति सामंत को किसी काल्पनिक किस्से से नहीं, बल्कि अपने एक बेहद करीबी दोस्त के परिवार में घटी वास्तविक घटना से मिली थी। उनके दोस्त की पहली पत्नी के निधन के बाद दोस्त ने अपनी दिवंगत पत्नी की छोटी बहन से विवाह कर लिया था। शक्ति सामंत ने स्वयं यह महसूस किया कि वह दूसरी पत्नी कई मौकों पर अचानक बिल्कुल वैसा ही आचरण करने लगती थी जैसा उनकी दिवंगत बहन किया करती थी। इसी विस्मयकारी और अलौकिक व्यवहार ने निर्देशक के मन में पुनर्जन्म पर फिल्म बनाने की सोच पैदा की।
कलाकारों की मजबूत टोली ने किरदारों को बनाया जीवंत
हेमा मालिनी और राजेश खन्ना के केंद्रीय किरदारों के अलावा इस फिल्म में कई अन्य मंझे हुए अभिनेताओं ने अपनी अदाकारी का हुनर दिखाया था। फिल्म में असरानी, योगिता बाली, लीला मिश्रा, मदन पुरी और सुजीत कुमार जैसे कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को बखूबी निभाया, जिससे कहानी में गहराई और स्वाभाविकता बनी रही।



















