राजस्थान की पारम्परिक पाक कला पूरे देश में अपने विशिष्ट स्वाद और पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। इस राज्य की खानपान संस्कृति में बाजरे का विशेष महत्व रहा है, जिससे कई तरह के स्वादिष्ट पकवान खासतौर पर सर्दियों और मांगलिक अवसरों पर तैयार किए जाते हैं। घरों में अमूमन गेहूं के आटे अथवा सूजी का हलवा तो बार-बार बनता है, लेकिन बाजरे के आटे से बना पारम्परिक हलवा अपनी एक अलग ही पहचान रखता है। दादी-नानी के दौर से बनता आ रहा यह देशी मिष्ठान न सिर्फ मुंह का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर को भरपूर ऊर्जा भी प्रदान करता है।
रसोई की सामान्य सामग्रियों से कम समय में होता है तैयार
इस पारम्परिक मिष्ठान की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने के लिए किसी दुर्लभ या जटिल सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। रसोईघर में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजों से ही इसे सरलता से बनाया जा सकता है। भीलवाड़ा निवासी काजल कुमारी बताती हैं कि इस हलवे को बनाने में केवल 20 से 30 मिनट का समय लगता है।
इसके रख-रखाव की बात करें तो यह जल्दी खराब नहीं होता। इसे किसी स्वच्छ और वायुरोधी डिब्बे में बंद करके फ्रिज के अंदर दो से तीन दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बस ध्यान यह रखना होता है कि फ्रिज से निकालने के बाद परोसने से पूर्व इसे अच्छी तरह से गर्म कर लिया जाए।
हलवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री और चरणबद्ध तरीका
इस स्वादिष्ट व्यंजन को पकाने के लिए मुख्य रूप से बाजरे का आटा, शुद्ध देशी घी, गुड़ अथवा चीनी, पानी और सुगंध के लिए इलायची पाउडर चाहिए होता है। अतिरिक्त स्वाद और बनावट के लिए इसमें काजू, बादाम और किशमिश जैसे सूखे मेवे भी शामिल किए जा सकते हैं। इसे बनाने की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार है
- सबसे पहले एक मोटे और भारी तले वाली कढ़ाई लेकर उसमें देशी घी डालकर गर्म करें।
- घी गर्म होने के पश्चात उसमें बाजरे का आटा डालें और धीमी आंच पर करछी से लगातार चलाते हुए भूनते रहें।
- जब आटे का रंग हल्का भूरा होने लगे और उसमें से सोंधी महक उठने लगे, तब उसमें आहिस्ता-आहिस्ता गर्म पानी डालें ताकि गुठलियां या गांठें बिल्कुल न बनें।
- जैसे ही आटा सारा पानी सोख ले और कड़ाही में मिश्रण गाढ़ा होने लगे, उसमें अपनी रुचि के अनुसार गुड़ या चीनी मिला दें।
- आखिर में कुटी हुई इलायची का पाउडर और बारीक कतरे हुए सूखे मेवे डालें और तब तक पकाते रहें जब तक कि हलवा कढ़ाई के किनारों से घी न छोड़ने लगे।
पोषक तत्वों का खजाना और सेहत से जुड़े लाभ
बाजरा सिर्फ स्वाद में ही उम्दा नहीं होता, बल्कि यह कई प्रकार के आवश्यक पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अंदर मौजूद डाइटरी फाइबर पेट की पाचन क्रिया को सुचारू रखने में मददगार साबित होता है और इससे पेट काफी समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इसके साथ ही, हलवे में इस्तेमाल होने वाला शुद्ध देशी घी और मेवे शरीर को भीतरी ताकत और ऊर्जा देते हैं। हालांकि, इसमें गुड़ और घी की प्रचुर मात्रा होने के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा इसे संतुलित मात्रा में खाना ही सबसे मुफीद बताया जाता है।


















