साल 1999 में रिलीज हुई एक जबरदस्त एक्शन फिल्म ने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया था, जिसमें मुख्य अभिनेता ने एक खूंखार गैंगस्टर की भूमिका निभाकर अपार सफलता हासिल की। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो कामयाब रही ही, साथ ही इसके दमदार संवाद आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स के जरिए लोगों की जुबान पर रहते हैं। इस फिल्म का नाम वास्तव: द रियालिटी है, जिसे जाने-माने निर्देशक महेश मांजरेकर ने निर्देशित किया था। इस प्रोजेक्ट में संजय दत्त के साथ-साथ नम्रता शिरोडकर, संजय नार्वेकर, मोहनीश बहल, परेश रावल, रीमा लागू और शिवाजी साटम जैसे दिग्गज कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। कहानी के केंद्र में रघु नाम का किरदार था, जिसे संजय दत्त ने बड़े ही शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा था।
रीमा लागू और संजय दत्त की उम्र का दिलचस्प समीकरण
फिल्म की स्टार कास्ट से जुड़ा एक बेहद रोचक तथ्य यह है कि पर्दे पर मां का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री रीमा लागू असल जिंदगी में मुख्य अभिनेता संजय दत्त से केवल एक साल बड़ी थीं। रीमा लागू का जन्म वर्ष 1958 में हुआ था, जबकि संजय दत्त का जन्म 1959 में हुआ था। इस फिल्म में रीमा लागू ने रघु यानी संजय दत्त की मां की भूमिका निभाई थी, जबकि शिवाजी साटम उनके पिता के रोल में दिखाई दिए थे। इसके अलावा, फिल्म में मोहनीश बहल और एकता सोहिनी ने एक पति-पत्नी का किरदार निभाया था, जो असल जीवन में भी एक-दूसरे के हमसफर हैं। इन दोनों ने साल 1992 में विवाह किया था और आगे चलकर उनके दो बच्चे प्रणिता बहल और कृषा बहल हुए।
डायलॉग्स और स्क्रीनप्ले का जादू
इस फिल्म की सफलता में इसके लोकप्रिय संवादों ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई, जो आज भी लोगों को अच्छी तरह याद हैं। पचास तोला वाला संवाद, खेल खल्लास और आत्मा सड़ेली है जैसे बेहतरीन लाइन्स ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी, जिनमें पचास तोला वाला डायलॉग सबसे ज्यादा चर्चित रहा। फिल्म का स्क्रीनप्ले, मूल कहानी और निर्देशन का जिम्मा महेश मांजरेकर के पास था, जबकि इसके वजनदार और यादगार डायलॉग्स को इम्तियाज हुसैन ने लिखा था। उस दौर में विवादों के कारण मुख्य अभिनेता का फिल्मी करियर काफी संकट में था, ऐसे में यह फिल्म उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई और इसने उनके डूबते करियर को पटरी पर ला दिया। इस शानदार अभिनय के दम पर उन्हें वर्ष 2000 में फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिला, और इसके कुछ साल बाद 2004 में उन्हें मुन्ना भाई एमबीबीएस के लिए भी यह सम्मान दोबारा प्राप्त हुआ।
सीक्वल की नाकामी और आगे की कहानी
इस जबरदस्त सफलता को भुनाने के लिए मेकर्स ने इसका अगला भाग बनाने का निर्णय लिया और साल 2002 में हथियार: फेस टू फेस विद रियालिटी सिनेमाघरों में उतरी। हालांकि, यह फिल्म अपने पहले भाग की लोकप्रियता और जादुई असर को दोहराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इसे दर्शकों का वैसा प्यार नहीं मिला और थिएटरों में सन्नाटा पसरा रहा, जिसके परिणामस्वरूप यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरकर फ्लॉप हो गई। इस सीक्वल की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां पहला भाग समाप्त हुआ था, जिसमें मारे जा चुके गैंगस्टर रघु भाई के बेटे रोहित की जिंदगी को दिखाया गया था, जिसे बॉक्सर भी कहा जाता है। फ्लैशबैक दृश्यों में रघु भाई की झलकियां भी देखने को मिलती हैं, और इस बार इस प्रोजेक्ट में शिल्पा शेट्टी की एंट्री हुई थी जिनके साथ शक्ति कपूर, गुलशन ग्रोवर, रीमा लागू, दीपक तिजोरी और अनूप सोनी जैसे कई जाने-माने कलाकार भी शामिल थे।



















