छुट्टियों और वीकेंड के दौरान सिनेमा प्रेमियों को अक्सर ऐसा कंटेंट देखना पसंद होता है जो उन्हें अंत तक बांधे रखे। अगर आप भी साधारण कहानियों से ऊब चुके हैं और इस वीकेंड अपनी नसों में सनसनी का अहसास चाहते हैं, तो हॉरर और सस्पेंस जॉनर आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। भारतीय सिनेमा से लेकर हॉलीवुड की दुनिया में ऐसी कई बेहतरीन फिल्में बनी हैं जिन्होंने दर्शकों को स्क्रीन से चिपके रहने पर मजबूर कर दिया है। चाहे वह सदियों पुरानी पौराणिक कथाओं से उपजा डर हो या फिर भूतिया हवेलियों का गॉथिक सस्पेंस, ये कहानियां सीधे इंसान की आत्मा को कंपा देती हैं। सच्ची घटनाओं पर आधारित पैरानॉर्मल तफ्तीश से लेकर इंसानी भावनाओं में छिपे शैतानी साए तक, यह फिल्मों का ऐसा संयोजन है जो आपकी रातों की नींद चुरा सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 6 चुनिंदा हॉरर फिल्मों के बारे में, जिन्हें आपको इस वीकेंड अपनी देखने वाली लिस्ट में जरूर शामिल करना चाहिए।
स्त्री: हॉरर और कॉमेडी का बेजोड़ संगम
वर्ष 2018 में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली फिल्म 'स्त्री' ने भारतीय दर्शकों को डर और हंसी का एक ऐसा अनोखा अनुभव कराया जिसे भूल पाना मुमकिन नहीं है। अमर कौशिक के कुशल निर्देशन में बनी यह फिल्म मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर चंदेरी की एक मशहूर लोककथा 'ओ स्त्री कल आना' से प्रेरित है। कहानी एक ऐसी अदृश्य चुड़ैल के इर्द-गिर्द घूमती है जो त्योहारों के दिनों में रात के अंधेरे में शहर के पुरुषों को किडनैप कर लेती है और केवल उनके कपड़े पीछे छोड़ जाती है। फिल्म में राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। यह फिल्म केवल डराती ही नहीं है, बल्कि इसमें बेहद सटीक डरावना हास्य और एक गहरा सामाजिक संदेश भी छुपा हुआ है। चंदेरी का देसी माहौल, शानदार संवाद और अंत तक बना रहने वाला अनोखा सस्पेंस इसे हॉरर-कॉमेडी जॉनर की एक कालजयी रचना बनाते हैं।
तुम्बाड़: इंसानी लालच और पौराणिक खौफ की अमर दास्तान
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी हॉरर और फैंटेसी के मेल का जिक्र होगा, तब फिल्म 'तुम्बाड़' का नाम सबसे ऊपर आएगा। राही अनिल बर्वे द्वारा निर्देशित यह फिल्म महाराष्ट्र के तुम्बाड गांव की पृष्ठभूमि पर रची गई है। यह कहानी एक परिवार की कई पीढ़ियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पौराणिक राक्षस 'हस्तर' के खौफनाक श्राप से जुड़ी हुई है। फिल्म का मुख्य पात्र विनायक अपने पुश्तैनी खजाने की बेइंतहा चाहत में एक ऐसे दलदल में फंसता चला जाता है जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं है। फिल्म में लगातार होती बारिश, नमी से भरा सीलनदार माहौल और अदभुत सिनेमैटोग्राफी दर्शकों के दिलों में एक गहरा खौफ पैदा करती है। 'तुम्बाड़' केवल भूतों की आम कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी लालच के भयानक और विनाशकारी नतीजों को दर्शाने वाली एक अद्भुत विजुअल कलाकृति है।
1920: गॉथिक सस्पेंस और अलौकिक शक्तियों का तांडव
विक्रम भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म '1920' को भारतीय सिनेमा की एक बेहतरीन गॉथिक हॉरर फिल्म माना जाता है। बीसवीं सदी की शुरुआत के दौर में सेट की गई यह कहानी अर्जुन और ललिता नाम के एक प्रेमी जोड़े की है। अपने प्यार को पाने के लिए वे अपने परिवारों को छोड़ देते हैं और एक पुरानी, विशालकाय ऐतिहासिक हवेली में रहने चले जाते हैं। हालांकि, उस हवेली में कदम रखते ही ललिता पर एक बेहद दुष्ट और शापित आत्मा का कब्ज़ा हो जाता है। इसके बाद शुरू होती है आस्था, सच्चे प्यार और भयंकर अलौकिक ताकतों के बीच की खौफनाक जंग। फिल्म का बेहद डरावना बैकग्राउंड म्यूजिक, बेहतरीन स्पेशल इफेक्ट्स और अदा शर्मा का रोंगटे खड़े कर देने वाला अभिनय दर्शकों को अंदर तक सिहरा देता है।
द कॉन्ज्यूरिंग: सच्ची घटना पर आधारित हॉलीवुड का कालजयी खौफ
हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक जेम्स वान की फिल्म 'द कॉन्ज्यूरिंग' को दुनिया की सबसे डरावनी फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी कहानी असल जिंदगी के प्रसिद्ध पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर एड और लोरेन वॉरेन की केस फाइलों पर आधारित है। फिल्म की कथावस्तु पेरोन परिवार के आसपास घूमती है, जो अपने बच्चों के साथ एक नए फार्महाउस में रहने जाते हैं। वहां पहुंचते ही उनका सामना एक बहुत ही भयानक और बुरी सुपरनैचुरल ताकत से होता है। बिना किसी फालतू खून-खराबे का सहारा लिए, यह फिल्म केवल अपने बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स, डरावने विजुअल्स और सस्पेंस के दम पर खौफ का एक माहौल तैयार करती है। 'एक सच्ची घटना पर आधारित' होना इस फिल्म के डर को कई गुना बढ़ा देता है।
रात: साधारण घर में पसरा सन्नाटा और राम गोपाल वर्मा की क्लासिक शैली
निर्देशक राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'रात' को भारतीय हॉरर सिनेमा की एक कल्ट क्लासिक फिल्म माना जाता है। दिग्गज अभिनेत्री रेवती के शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म 90 के दशक में रिलीज हुई थी। कहानी एक साधारण परिवार की है जो एक नए मकान में शिफ्ट होता है। जल्द ही उनकी बेटी एक शापित बिल्ली की आत्मा के रहस्यमयी असर में आने लगती है। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका साउंड डिजाइन और बेहतरीन कैमरावर्क था। बिना किसी भारी-भरकम विजुअल इफेक्ट के भी यह फिल्म एक सामान्य घर के माहौल में इतना गहरा सन्नाटा और दहशत पैदा कर देती है कि इसे देखने के बाद इंसान अकेले रहने से भी कतराने लगता है।
परी: डार्क साइकोलॉजिकल हॉरर का अनूठा रूप
वर्ष 2018 में रिलीज हुई अनुष्का शर्मा स्टारर 'परी' पारंपरिक भूत-प्रेत की कहानियों से पूरी तरह अलग एक डार्क और इंटेंस साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म है। प्रोसित रॉय के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी अर्नब नाम के एक बेहद सीधे-सादे इंसान के इर्द-गिर्द बुनी गई है। अर्नब को जंगल के एक पुराने मकान में जंजीरों से बंधी रुक्साना (अनुष्का शर्मा) नाम की एक रहस्यमयी लड़की मिलती है, जिसे वह तरस खाकर अपने घर ले आता है। बाद में खुलासा होता है कि रुक्साना का तार एक बहुत ही भयानक और डरावने शैतानी पंथ (इफ्रिट) से जुड़ा हुआ है। फिल्म की डार्क टोन, बेहतरीन मेकअप और इंसानी भावनाओं के भीतर छुपा डर इसे एक बेहद संजीदा और खौफनाक सिनेमाई अनुभव बनाते हैं।



















