भारत अगले दस साल में करीब 16,000 जहाजों को रीसाइकिल करने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसके साथ ही सरकार ने जहाज निर्माण और जहाज रीसाइक्लिंग के क्षेत्र को मजबूती देने के लिए 8 अरब डॉलर लगाने का भरोसा दिलाया है। यह ऐलान ऐसे मौके पर आया, जब भारत और यूरोपीय संघ भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्ड को व्यापक मान्यता दिलाने के कदमों पर चर्चा कर रहे थे।
दोनों पक्षों ने टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग पर आपसी सहयोग को दोहराया। भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ने भरोसा जताया कि भारतीय सुविधाओं को यूरोपीय संघ के शिप रीसाइक्लिंग रेगुलेशन (EUSRR) के दायरे में शामिल करने की दिशा में अच्छी प्रगति होगी। यह बातचीत जहाजों के आखिरी चरण यानी उन्हें तोड़ने के काम में सुरक्षा और पर्यावरण के मानकों को ऊपर उठाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा थी।
सोनोवाल और रोसवाल की मुलाकात
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक सोनोवाल ने यूरोपीय आयोग की पर्यावरण, जल सुदृढ़ता और प्रतिस्पर्धी सर्कुलर इकोनॉमी मामलों की कमिश्नर जेसिका रोसवाल से मुलाकात की। दोनों ने यूरोपीय ढांचे के तहत मान्यता चाहने वाले भारतीय यार्ड के ऑडिट और अनुपालन जांच की समीक्षा की। इस पूरी प्रक्रिया में रेगुलेशन की शर्तें पूरी करने के लिए निरीक्षण और दस्तावेजीकरण शामिल रहा।
रोसवाल ने इस प्रगति का स्वागत किया और एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) बनाने का सुझाव दिया। इस समूह में पर्यावरण मंत्रालय के साथ-साथ दूसरे मंत्रालय और संगठन भी होंगे। इसका मकसद अगले चरण के आकलन के दौरान बेहतर तालमेल बनाना है। रोसवाल ने यह भी कहा कि अनुपालन, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बिना पूर्व सूचना वाले निरीक्षण बेहद जरूरी हैं।
रोजगार और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ाव
सोनोवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त भारतीय सुविधाओं की संख्या बढ़ने से वैश्विक सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। उन्होंने मान्यता को साफ-सुथरी रीसाइक्लिंग प्रक्रियाओं, ज्यादा रोजगार और मजबूत समुद्री टिकाऊपन से जोड़ा। बयान में कहा गया कि यह बातचीत भारत और यूरोपीय संघ के बीच टिकाऊ समुद्री कार्यप्रणालियों को लेकर बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दिखाती है।
रोसवाल ने बताया कि इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ शरद ऋतु के सत्र में चर्चा होगी। कोई अंतिम फैसला इसी चरण के बाद ही आएगा। रोसवाल ने यह भी कहा कि वह भारतीय शिप रीसाइक्लिंग सुविधाओं का दौरा करने को तैयार हैं। यह दौरा सलाह-मशविरे और आकलन पूरे होने के बाद होगा।
वैश्विक हिस्सेदारी में बढ़त
व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) के अनुमानों से पता चलता है कि वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह 2024 में 30.1 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 35.4 प्रतिशत हो गई। भारत ने 2025 में 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (GT) जहाजों को रीसाइकिल किया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1.86 मिलियन GT था।
सोनोवाल ने कहा कि सरकार ऑडिट और निरीक्षण के जरिए भारतीय यार्ड को सूचीबद्ध कराने में मदद कर रही है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियामकीय अनुपालन पर आधारित है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए भारतीय सुविधाओं ने बेहतर बुनियादी ढांचे और संचालन में निवेश किया है।
पर्यावरण और मजदूरों की सुविधाएं
सोनोवाल के मुताबिक भारतीय शिप रीसाइक्लिंग सुविधाओं में पर्यावरण से जुड़ी व्यवस्थाएं और मजदूरों के कल्याण के इंतजाम मौजूद हैं। उन्होंने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणालियों का जिक्र किया। उन्होंने रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से चलने वाली मल्टी-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का भी उल्लेख किया। इसके अलावा मजदूरों के लिए अलग से आवास की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि सरकार समय-समय पर निरीक्षण और बिना सूचना दिए जांच करती रहती है। इनका मकसद पर्यावरणीय अनुपालन और मजदूरों की सुरक्षा को बनाए रखना है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि यूरोपीय संघ की मान्यता से वैश्विक रीसाइक्लिंग क्षमता बेहतर हो सकती है। इसमें यह भी जोड़ा गया कि यह मान्यता जहाजों के सुरक्षित अंतिम प्रबंधन और मजबूत समुद्री आपूर्ति श्रृंखलाओं को सहारा दे सकती है।













