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गोबरधन योजना से 5 अरब डॉलर घट सकता है भारत का गैस आयात बिल, भारतीय बायोगैस संघ का बड़ा दावाव्यापार
9 अग॰ 2026, 1:48 pm (14 घंटे पहले)· 0

गोबरधन योजना से 5 अरब डॉलर घट सकता है भारत का गैस आयात बिल, भारतीय बायोगैस संघ का बड़ा दावा

23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन योजना भारत के प्राकृतिक गैस आयात बिल में 5 अरब डॉलर की बचत करा सकती है। भारतीय बायोगैस संघ के अनुसार 1,500 सीबीजी संयंत्र चालू होने से देश को बड़ा आर्थिक लाभ होगा।

भारत सरकार द्वारा मंजूर की गई 23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन' योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है। भारतीय बायोगैस संघ (IBA) के अनुसार, इस योजना को सामान्य सरकारी खर्च के तौर पर देखने के बजाय एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश माना जाना चाहिए। कृषि अवशेषों, पशुओं के गोबर और अन्य जैविक कचरे को हरित ऊर्जा में बदलने पर केंद्रित यह पहल आने वाले वर्षों में भारत के प्राकृतिक गैस आयात बिल में लगभग 5 अरब डॉलर की भारी कटौती करने में मदद कर सकती है।

प्राकृतिक गैस आयात पर निर्भरता और व्यापार घाटा

वर्तमान में भारत अपनी कुल प्राकृतिक गैस जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों के उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश का एलएनजी (LNG) आयात बिल करीब 15.2 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। इस भारी-भरकम वित्तीय बोझ को कम करने में बायोगैस क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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IBA का आकलन है कि यदि देश में लगभग 1,500 कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करने लगें, तो प्राकृतिक गैस के आयात से जुड़े व्यापार घाटे में करीब एक-तिहाई तक की कमी लाई जा सकती है। इस कदम से लगभग 5 अरब डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) की सीधी विदेशी मुद्रा बचत संभव हो सकेगी, जिससे देश का बाहरी व्यापार संतुलन मजबूत होगा।

उर्वरक आयात बिल और चालू खाते के घाटे में कमी

गैस आयात के अलावा, यह योजना भारत के उर्वरक आयात बोझ को हल्का करने में भी मददगार साबित होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का उर्वरक आयात बिल लगभग 18 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जिससे सरकारी खजाने पर भारी सब्सिडी का दबाव बना रहता है। CBG संयंत्रों के संचालन से उत्पन्न होने वाले जैविक उप-उत्पादों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर रसायन आधारित उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।

IBA के अनुमानों के मुताबिक, 1,500 CBG संयंत्रों के सुचारू संचालन से उर्वरक आयात में कम से कम 5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। आयात में इस कमी से देश के चालू खाते के घाटे (CAD) में करीब 1 अरब डॉलर की राहत मिलेगी, जो कि भारत के समष्टि आर्थिक संकेतकों के लिए काफी फायदेमंद रहेगा।

ग्रामीण इलाकों में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

गोबरधन (गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना का आर्थिक असर केवल ऊर्जा और उर्वरक बचत तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक कचरे के संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण केंद्रों के निर्माण से रोजगार के व्यापक अवसर निर्मित होंगे।

इस योजना के जमीनी कार्यान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल और अर्द्ध-कुशल दोनों श्रेणियों के श्रमिकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन मजबूत होंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद मिलेगी।

सवाल-जवाब

गोबरधन योजना के लिए सरकार ने कितना बजट रखा है?
सरकार ने इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
IBA का अनुमान क्या है कि इस योजना से गैस आयात बिल में कितनी बचत हो सकती है?
IBA के अनुसार, 1,500 CBG संयंत्र पूरी क्षमता से चलने पर प्राकृतिक गैस आयात बिल में लगभग 5 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।
भारत फिलहाल अपनी जरूरत का कितना प्राकृतिक गैस आयात करता है?
भारत अपनी कुल प्राकृतिक गैस आवश्यकता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का LNG और उर्वरक आयात बिल कितना था?
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का LNG आयात बिल लगभग 15.2 अरब डॉलर और उर्वरक आयात बिल लगभग 18 अरब डॉलर रहा था।
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