गुवाहाटी में एक अहम घोषणा करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को बताया कि इस साल राज्य के 1,000 प्रगतिशील और शिक्षित किसानों को मुख्यमंत्री कृषि उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक विजेता किसान को 1 लाख रुपये की वित्तीय राशि प्रदान की जाएगी, जिससे खेती के क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहन मिल सके।
आधुनिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने इस पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य शिक्षित युवाओं को कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित करना है। इसके साथ ही इसका मकसद राज्यभर में आधुनिक, उत्पादक और टिकाऊ खेती के तरीकों को लोकप्रिय बनाना भी है।
सरकारी योजनाओं से जुड़ाव और भविष्य की योजनाएं
चयनित किसानों को केवल नकद पुरस्कार ही नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और कृषि कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा। सरकार की दूरगामी योजना आने वाले पांच वर्षों में इस सम्मान का दायरा बढ़ाकर 10,000 किसानों तक ले जाने की है।
कृषि अनुसंधान और आर्थिक आत्मनिर्भरता
यह पूरा कार्यक्रम खेती-किसानी के तौर-तरीकों में सुधार लाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिए कृषि अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को अपनी पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ अधिक आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
युवा कल्याण विभाग का गठन
कृषि के अलावा मुख्यमंत्री ने एक अलग युवा कल्याण विभाग के गठन की भी रूपरेखा साझा की। इस नए विभाग के बनने से युवाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और पहलों को एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत लाया जा सकेगा।
राष्ट्रीय कैडेट कोर और अन्य कार्यक्रम
प्रस्तावित नया विभाग राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी एनसीसी, राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस, रोजगार कार्यालयों और अन्य युवा-केंद्रित कार्यक्रमों की देखरेख करेगा। फिलहाल इन सभी कार्यक्रमों का प्रबंधन शिक्षा क्षेत्र द्वारा किया जाता है।
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर लॉन्चिंग की संभावना
इस नए विभाग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन यानी 17 सितंबर के आसपास लॉन्च किए जाने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इस कदम से युवाओं को लक्षित करने वाली योजनाओं का बेहतर समन्वय और क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
सरकारी कर्मचारियों की पत्नियों के लिए वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री ने उन महिलाओं के लिए एक प्रस्तावित वित्तीय सहायता तंत्र की भी रूपरेखा पेश की, जिनके सरकारी नौकरी करने वाले पति उन्हें बिना कानूनी तलाक दिए छोड़ देते हैं।
वेतन कटौती का नियम
प्रस्तावित प्रणाली के तहत यदि कोई कर्मचारी अपनी पहली पत्नी को कानूनी रूप से अलग किए बिना दोबारा शादी कर लेता है और पहली पत्नी सरकारी सहायता मांगती है, तो उस कर्मचारी के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा काटकर सीधे उसकी पहली पत्नी के बैंक खाते में जमा किया जाएगा।
सेवा नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
सरमा ने स्पष्ट किया कि शादी और बहुविवाह से जुड़े सेवा नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
माता-पिता को छोड़ने वालों पर पहले से है नियम
उन्होंने अपनी सरकार की एक पुरानी पहल का भी जिक्र किया जिसके तहत माता-पिता को छोड़ने वाले कर्मचारियों के वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा माता-पिता को ट्रांसफर किया जाता है। मुख्यमंत्री ने इस पिछली योजना को बेहद सफल बताया था।
प्रोजेक्ट सद्भावना का दूसरा चरण
असम सरकार असम में लंबित सरकारी फाइलों की पहचान करने और उनका निपटारा करने के लिए 2 अक्टूबर से 31 जनवरी तक प्रोजेक्ट सद्भावना का दूसरा चरण भी चलाएगी।
लंबित फाइलों का अंबार
मुख्यमंत्री के अनुसार इस समय सरकारी विभागों, निदेशालय और उपायुक्त कार्यालयों में तीन लाख से अधिक फाइलें लंबित पड़ी हुई हैं। इनमें से कुछ फाइलें भले ही सामान्य प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी हों, लेकिन इस अभियान का मुख्य फोकस इस बैकलॉग को व्यवस्थित रूप से कम करना होगा।
ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ट्रैकिंग
नागरिकों की सुविधा के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसकी मदद से लोग उन फाइलों की रिपोर्ट कर सकेंगे जो लंबे समय से अटकी हुई हैं। इसके बाद ऐसे मामलों को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित जिला प्रशासन या निदेशालय को भेज दिया जाएगा।
ई-फाइल प्रणाली से आएगी पारदर्शिता
सरमा ने याद दिलाया कि सरकार ने 2021 में भी ऐसा ही एक अभियान चलाया था, उस समय रिकॉर्ड मैनुअल तरीके से रखे जाते थे। अब चूंकि ई-फाइल प्रणाली पूरी तरह से चालू है, इसलिए अधिकारी लंबित मामलों को ट्रैक कर सकेंगे और निपटान दरों का अधिक प्रभावी ढंग से आकलन कर पाएंगे।
भ्रष्टाचार और सिंडिकेट के खिलाफ रुख
अधिकारियों को इस अभियान के तहत विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और प्रोजेक्ट सद्भावना 2 के समाप्त होने के बाद सरकार निपटाई गई फाइलों की संख्या की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही राज्य में भ्रष्टाचार के अन्य मोर्चों पर भी सख्ती बरती जा रही है, जैसे कि असम कांग्रेस कोयला, पत्थर और रेत सिंडिकेट के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।



















