बहराइच जिले के मिर्जापुर गाँव के एक युवा किसान ने पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर खेती की दिशा में एक नया उदाहरण पेश किया है। आजकल जहाँ महँगे उर्वरक और कीटनाशकों के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और कई किसान इससे परेशान नजर आते हैं, वहीं त्रिलोकी ने काला नमक धान की सफल खेती कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कम समय और न्यूनतम खर्च में बंपर मुनाफा कमाने का यह तरीका क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ा सबक बन गया है।
सिर्फ नब्बे दिनों में तैयार होती है फसल
गाँव के अन्य खेतों में जहाँ अभी धान की फसल हरी नजर आ रही है, वहीं त्रिलोकी का एक एकड़ का खेत पूरी तरह से लहलहा रहा है और इसका रंग काला नमक धान की खासियत को बयां कर रहा है। त्रिलोकी के अनुसार उनके खेतों में उगाई गई यह विशेष किस्म महज 90 दिनों के भीतर पूरी तरह से पककर तैयार हो जाती है। वर्तमान में यह फसल कटाई के बेहद करीब है और अनुमान है कि अगले 15 दिनों के भीतर इसकी कटाई का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।
जीरो-बजट प्राकृतिक खेती का कमाल
इस पूरी सफलता के पीछे जीरो-बजट प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों का अहम योगदान रहा है। त्रिलोकी ने पारंपरिक रसायन और महँगे कीटनाशकों से पूरी तरह तौबा करते हुए पूरी तरह प्राकृतिक विधियों से फसल का उत्पादन किया है। यही वजह है कि एक एकड़ के पूरे खेत में धान की रोपाई करने और उसकी शुरुआती देखभाल करने में उनका कुल खर्च महज़ पाँच हजार रुपये ही आया है। लागत में यह भारी कमी सीधे तौर पर मुनाफे को बढ़ाने का काम करती है।
बाजार में छह हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव
काला नमक धान अपनी बेहतरीन खुशबू, अनोखे स्वाद और भरपूर पौष्टिकता के लिए देश भर में जाना जाता है। इसी उच्च गुणवत्ता के कारण बाजार में इस खास धान की माँग हमेशा आसमान पर रहती है। त्रिलोकी बताते हैं कि यह प्रीमियम धान बाजार में आराम से 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक जाता है। चूँकि यह फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है, इसलिए जब तक बाजार में सामान्य धान की आवक शुरू होती है, तब तक इनकी फसल कटकर बिकने के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को बहुत अच्छी कीमत मिलती है।
किसानों की आय बढ़ाने का अचूक माध्यम
कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बहराइच के इस युवा किसान की यह पहल प्रदेश के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। बेहद कम लागत, सिर्फ 90 दिनों की 짧 अवधि और बाजार में मिलने वाला बेहतर मूल्य किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। त्रिलोकी की यह सफलता साबित करती है कि अगर सही दिशा में प्राकृतिक खेती की जाए, तो लागत को न्यूनतम रखकर बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है।


















