अंबिकापुर की रानी सोनी ने यूट्यूब से सीखकर शुरू किया 'स्वाद स्टेशन', बेटे के साथ मिलकर खड़ा किया कारोबारविविधता और फीचर्स से भरपूर विवलडी ब्राउज़र के ये 10 बेहतरीन ट्रिक्सपाली में शादियों की धूम, कपड़े से मैच करती राजस्थानी जूतियां सात दिन में हो रहीं तैयारदिल्ली के स्वरूप नगर में 16 साल की लड़की से गैंगरेप के बाद हत्या, चार गिरफ्तारसोनीपत में नाबालिग की हत्या पर उबाल, परिजनों ने अंतिम संस्कार रोका और श्मशान घाट के बाहर दिया धरनाईरानी हमलों में अमेज़न वेब सर्विसेज़ का कुछ ग्राहक डेटा हमेशा के लिए खो गयाक्लैरिटी डिजिटल एसेट विधेयक अटकने के बीच पैसिव फ्यूचर्स सॉफ्टवेयर को CFTC की चुनिंदा राहतत्योहारों का मजा बढ़ाएं: बोकारो के शेफ देवाशीष की इस आसान रेसिपी से घर पर बनाएं नारियल के लड्डूप्रिंसेस ऐनी ने कैनॉक चेस जर्मन सैन्य कब्रिस्तान में नए इतिहास केंद्र का किया उद्घाटनएस. जयशंकर ने थिम्पू में भूटान नरेश से की मुलाकात, दोनों देशों के रिश्तों पर हुई चर्चा
यूपीआई पेमेंट पर नहीं बढ़ेगा आम जनता का बोझ, सरकार ने एमडीआर नियमों को लेकर कसी कमरव्यापार
18 सित॰ 2026, 6:57 am (42 मिनट पहले)· 0

यूपीआई पेमेंट पर नहीं बढ़ेगा आम जनता का बोझ, सरकार ने एमडीआर नियमों को लेकर कसी कमर

दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होने के बाद भी सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि इसका कोई भी अतिरिक्त वित्तीय भार सामान्य ग्राहकों की जेब पर न पड़े।

देशभर में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि इस व्यवस्था में किसी भी तरह के शुल्क का सामना आम नागरिकों को नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद लोगों के मन में संशय बना हुआ है कि क्या रोजमर्रा के लेन-देन महंगे हो जाएंगे। विशेष तौर पर दो हजार रुपये से अधिक के कमर्शियल भुगतानों पर लगने वाले नए शुल्कों के प्रभाव को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है, ताकि इसका सीधा असर आम आदमी तक न पहुंचे।

पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ उच्चस्तरीय चर्चाएं

इस पूरी स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में मिली जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्रालय से जुड़े अधिकारी और संबंधित महकमे इस डिजिटल इकोसिस्टम से जुड़े तमाम पेमेंट एग्रीगेटर्स और अन्य अहम स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य यही तय करना है कि हालिया बदलावों के तहत आने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट का अनुचित लाभ उठाकर कोई भी व्यापारी ग्राहकों से वसूली न करे। सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि डिजिटल लेनदेन की यह प्रक्रिया पूरी तरह सुगम और बिना किसी अतिरिक्त बोझ के जारी रहे।

ये भी पढ़ें

मर्चेंट डिस्काउंट रेट और उसकी सीमाएं

आगामी पंद्रह अक्टूबर से दो हजार रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतानों पर शून्य दशमलव चार प्रतिशत की दर से एमडीआर लागू होने जा रहा है। प्रशासनिक नियमों के अनुसार यह शुल्क पूरी तरह से व्यापारियों द्वारा वहन किया जाएगा, न कि सामान खरीदने वाले आम ग्राहकों द्वारा। इसके अलावा पचहत्तर हजार रुपये या उससे ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन के मामलों में इस शुल्क की अधिकतम सीमा तीन सौ रुपये तय की गई है। सरकार इन तमाम प्रावधानों के बीच यह आशंका भी दूर करना चाहती है कि बड़े डिजिटल भुगतानों के कारण ग्राहकों की कुल लागत में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी दर्ज की जाए।

कड़ी निगरानी व्यवस्था का निर्माण

व्यापारियों द्वारा इस शुल्क को ग्राहकों पर स्थानांतरित किए जाने की संभावनाओं को रोकने के वास्ते सरकार एक मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रही है। इस तंत्र के जरिए इस बात पर कड़ी नजर रखी जाएगी कि बाजार में कोई भी दुकानदार इस नियम की आड़ में ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे न ऐंठे। राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पहले ही काफी गहमागहमी देखने को मिल चुकी है, जिसके बाद से प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था को किसी भी तरह का झटका न लगे।

सवाल-जवाब

क्या आम ग्राहकों को यूपीआई पेमेंट पर कोई चार्ज देना होगा?
नहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई फीस या एमडीआर का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।
नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट कब से लागू हो रहा है?
दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर यह नियम पंद्रह अक्टूबर से लागू किया जा रहा है।
बड़े ट्रांजैक्शन पर अधिकतम कितना चार्ज लग सकता है?
पचहत्तर हजार रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा तीन सौ रुपये होगा।
क्या यह शुल्क ग्राहक देंगे या व्यापारी?
यह फीस मर्चेंट यानी कारोबारी देंगे, इसे ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा।
सरकार इस बात की निगरानी कैसे करेगी कि चार्ज ग्राहकों से न वसूला जाए?
वित्त मंत्रालय इस बात को पक्का करने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp