राजस्थान के विभिन्न विभागों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का काम लगातार चल रहा है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सुधार और विस्तार की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। सीकर स्थित कल्याण अस्पताल में अब छोटे बच्चों के इलाज के लिए एक विशेष शिशु रोग विभाग विकसित किया जाएगा। मौजूदा समय में जनाना अस्पताल के परिसर में चल रहे शिशु रोग विभाग को कल्याण अस्पताल की नई इमारत में स्थानांतरित करने की पूरी योजना तैयार कर ली गई है। इस नए परिसर में १०० बेड का एक समर्पित शिशु रोग विभाग स्थापित किया जाएगा, जिससे जिले के छोटे बच्चों और नवजातों को सभी जरूरी जांच, आधुनिक उपचार और वरिष्ठ विशेषज्ञों की सलाह सीधे जिला मुख्यालय पर ही मिल सकेगी।
शुरुआती दौर में बीमारियों की पहचान के लिए अर्ली डिटेक्शन सेंटर
इस नए शिशु विभाग के साथ ही जिला मुख्यालय पर एक विशेष अर्ली डिटेक्शन सेंटर की शुरुआत भी की जाएगी। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य बच्चों में जन्म के समय मौजूद रहने वाली या उनके विकास के दौरान सामने आने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की बहुत शुरुआती स्तर पर ही पहचान करना होगा। संबंधित अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी बीमारी या विकासात्मक परेशानी का पता समय रहते चल जाता है, तो बच्चे को तुरंत जरूरी इलाज, आवश्यक थैरेपी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मुहैया कराई जा सकती है। इससे उपचार में किसी भी तरह की देरी होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़े पहलुओं की होगी गहन जांच
शुरू होने जा रहे अर्ली डिटेक्शन सेंटर के माध्यम से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की बारीकी से जांच की जा सकेगी। जन्म के बाद बच्चे की शारीरिक गतिविधियों, उसके विकासात्मक पड़ावों, सुनने और बोलने की क्षमता के साथ-साथ देखने की शक्ति और अन्य जरूरी शारीरिक संकेतों पर पूरी निगाह रखी जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी भी बच्चे में सामान्य विकास से जुड़ी कोई भी बाधा या जन्मजात परेशानी के शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे बिना किसी देरी के संबंधित चिकित्सा विशेषज्ञ के पास आगामी जांच और उचित उपचार के लिए भेज दिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अशोक कुमार के अनुसार इस विशेष अर्ली डिटेक्शन सेंटर का पूरा ध्यान बच्चों में विकास से जुड़ी देरी तथा जन्म के समय या शुरुआती महीनों में उभरने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं को समय पर पकड़ने पर रहेगा। कई बार अभिभावकों को यह समझ ही नहीं आ पाता कि उनके बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास उसकी उम्र के हिसाब से सही दिशा में हो रहा है या नहीं। ऐसे में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में होने वाली इन शुरुआती जांचों से समस्याओं को सही समय पर समझने और उनका समाधान खोजने में बहुत मदद मिलेगी।
बड़े शहरों की ओर रुख करने की मजबूरी होगी खत्म
वर्तमान समय में बच्चों को उम्र के मुताबिक बोलने, चलने, सुनने या देखने में दिक्कत होने जैसी समस्याओं के अलावा शारीरिक तथा मानसिक विकास में देरी के मामलों की जांच कराने के लिए यहां के कई परिवारों को मजबूरन जयपुर या अन्य बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता है। दूरदराज के अस्पतालों तक लंबी यात्रा करने से मरीजों का बहुमूल्य समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होते हैं। इसके अलावा कई बार सही समय पर बीमारी की पहचान न हो पाने के कारण समय पर इलाज और थैरेपी शुरू करने में भी काफी विलंब हो जाता है, जिससे बच्चों की रिकवरी प्रभावित होती है।
जनाना अस्पताल में बाल रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अक्सर मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सीकर के कल्याण अस्पताल में १५ करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले इस १०० बेड के स्वतंत्र शिशु रोग विभाग के तैयार हो जाने के बाद बच्चों के उपचार की व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित हो जाएगी। अस्पताल प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यहां जयपुर के जेके लोन अस्पताल की तर्ज पर अत्याधुनिक बाल चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
जिला मुख्यालय पर एक समर्पित शिशु रोग विभाग और आधुनिक अर्ली डिटेक्शन सेंटर के शुरू होने से सीकर शहर के अलावा आसपास के तमाम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के परिवारों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। नवजात शिशुओं और बच्चों की सामान्य स्वास्थ्य जांच से लेकर गंभीर उपचार, विशेषज्ञ परामर्श और जरूरत पड़ने पर उचित रेफरल की पूरी प्रक्रिया एक ही छत के नीचे और बेहतर ढंग से संचालित हो सकेगी। इसके साथ ही सरकारी व्यवस्था के तहत मरीजों को पूरी तरह निशुल्क उपचार मिलने से निजी चिकित्सालयों में खर्च होने वाली भारी-भरकम धनराशि से भी राहत मिल सकेगी।



















