सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख वित्तीय संस्थान बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी सावधि जमा यानी एफडी योजनाओं की ब्याज दरों में संशोधन करने का फैसला लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो दर में की गई बढ़ोतरी के बाद ऋण महंगा होने का दौर शुरू हुआ था, जिसके बाद अब जमाकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए बचत योजनाओं की दरों को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। 2 नवंबर से प्रभावी हुए इन बदलावों के तहत बैंक ने 1 वर्ष से 3 वर्ष की अवधि वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों को उनकी बचत पर पहले की तुलना में अधिक मुनाफा मिलेगा।
500 दिनों वाली स्टार अक्षय फिक्स्ड डिपॉजिट योजना का आगाज
नियमित जमा योजनाओं के अलावा बैंक ऑफ इंडिया ने एक नई विशेष मियादी जमा योजना पेश की है, जिसे स्टार अक्षय फिक्स्ड डिपॉजिट नाम दिया गया है। इस योजना की कुल परिपक्वता अवधि 500 दिनों की निर्धारित की गई है। इस खास योजना के तहत सामान्य नागरिकों को प्रति वर्ष 6.85 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 7.35 प्रतिशत सालाना रखी गई है। बैंक ने अति वरिष्ठ नागरिकों यानी सुपर सीनियर सिटीजंस को और अधिक राहत देते हुए इसी 500 दिनों की मियाद पर सालाना 7.5 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज देने की घोषणा की है।
3 करोड़ रुपये से कम राशि की एफडी पर नई दरें
खुदरा जमाकर्ताओं के लिहाज से 3 करोड़ रुपये से कम की राशि वाली जमा योजनाओं की दरों को भी नया रूप दिया गया है। इस श्रेणी में 1 वर्ष की अवधि वाली एफडी पर अब निवेशकों को सालाना 6.60 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। यदि कोई ग्राहक 1 वर्ष से अधिक और 3 वर्ष से कम समय के लिए पैसा जमा करता है, तो उसे 6.70 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज दिया जाएगा। इस वर्ग में बुजुर्ग नागरिकों को विशेष सुविधा दी गई है। सामान्य निवेशकों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों को 0.50 प्रतिशत अधिक ब्याज का लाभ मिल रहा है, जबकि सुपर सीनियर सिटीजंस को सामान्य दरों से 0.65 प्रतिशत अधिक सालाना रिटर्न दिया जा रहा है।
3 करोड़ से 10 करोड़ रुपये की थोक जमा और नॉन-कॉलेबल विकल्प
बैंक ने बड़े कॉर्पोरेट और संस्थागत निवेशकों के लिए 3 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक की जमा राशि वाली योजनाओं की दरों में भी इजाफा किया है। इस दायरे में आने वाली 1 साल की एफडी पर अब 6.55 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा, जबकि 1 से 3 साल के कार्यकाल वाली जमा पर ब्याज दर 6.65 प्रतिशत तय की गई है। इसके साथ ही बैंक ने नॉन-कॉलेबल एफडी पर अतिरिक्त प्रतिफल की पेशकश की है। 1 से 3 साल की नॉन-कॉलेबल एफडी पर सामान्य दरों की तुलना में 0.15 प्रतिशत अधिक ब्याज दिया जा रहा है। कॉलेबल एफडी वह होती है जिसमें निवेशक जरूरत पड़ने पर थोड़ा ब्याज शुल्क देकर समय से पहले निकासी कर सकते हैं, जबकि नॉन-कॉलेबल एफडी में एक सख्त लॉक इन अवधि होती है जिसके दौरान परिपक्वता से पहले फंड नहीं निकाला जा सकता।


















