भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई पांच मुकाबलों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में 3-2 से रोमांचक जीत हासिल की। हालांकि सीरीज में जीत दर्ज करने के बावजूद अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का प्रदर्शन टीम प्रबंधन के लिए चिंता का सबब बन गया। लगभग चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी करने वाले भुवनेश्वर के लिए यह दौरा बेहद निराशाजनक साबित हुआ। पूरी श्रृंखला के दौरान खेले चार मुकाबलों में वे केवल 1 विकेट चटकाने में सफल रहे, जबकि हर मैच में उन्होंने 40 से अधिक रन लुटा दिए। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने टीम चयन और योजना पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
चयनकर्ताओं की रणनीति पर इरफान पठान का विश्लेषण
इरफान पठान ने अपने यूट्यूब चैनल पर चर्चा करते हुए कहा कि न्यूजीलैंड के खिलाफ इस द्विपक्षीय सीरीज में भुवनेश्वर को शामिल करना चयनकर्ताओं की तरफ से एक रणनीतिक भूल थी। पठान के अनुसार इस फैसले के पीछे का तर्क समझ से परे है, क्योंकि फिलहाल कोई टी20 विश्व कप नजदीक नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर चयन समिति भुवनेश्वर कुमार को आगामी 50 ओवर के एकदिवसीय विश्व कप के मद्देनजर तैयार कर रही होती, तो उन्हें योजना में शामिल करने का कोई औचित्य बनता। टी20 प्रारूप में उनकी अचानक वापसी से टीम को भविष्य के लिए कोई ठोस दिशा नहीं मिली।
युवा तेज गेंदबाजों का अवसर छिनने पर जताई चिंता
पूर्व ऑलराउंडर का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ी को खिलाने के चक्कर में टीम प्रबंधन ने युवा तेज गेंदबाजों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने का बहुमूल्य अवसर गंवा दिया। उन्होंने विशेष रूप से मयंक यादव और प्रिंस यादव का नाम लेते हुए कहा कि यह दौरा इन दोनों के विकास के लिए काफी अहम साबित हो सकता था। मयंक यादव को सभी मैचों में मौका देकर उनकी क्षमता को परखा जा सकता था, जबकि प्रिंस यादव को भी कीवी धरती पर मैच खेलने का अनुभव दिया जाना चाहिए था। विदेशी पिचों और न्यूजीलैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में गेंदबाजी करने का जो व्यावहारिक अनुभव युवाओं को मिलता, वह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता।
अनुभव और बदकिस्मती के पहलू पर स्पष्टीकरण
अपनी समीक्षा में पठान ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भुवनेश्वर के कौशल या उनके कद को कम आंकने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर एक बेहतरीन और बेहद सीनियर गेंदबाज हैं, लेकिन इस श्रृंखला में परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं रहीं। कई मौकों पर शुरुआती दो ओवरों में बेहतरीन नियंत्रण दिखाने के बाद भी पावरप्ले के अंतिम ओवर में वे महंगे साबित हुए और बड़े रन खर्च हो गए। क्रिकेट में इस तरह के दौर किसी भी स्थापित गेंदबाज के सामने आ सकते हैं, लेकिन व्यापक रणनीति के लिहाज से युवाओं को आगे न बढ़ाना चयन प्रक्रिया की सबसे बड़ी कमी रही।



















