राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत आने वाले लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बुटोली गांव में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहाँ नौ साल का एक मासूम बच्चा खेलते समय खुले बोरवेल में जा गिरा। बोरवेल की कुल गहराई करीब 400 फीट बताई जा रही है, जिसमें यह बच्चा फिलहाल लगभग 40 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ घटनास्थल पर एकत्र हो गई है। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और राहत एजेंसियों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। बालक को सकुशल बाहर निकालने के लिए घटनास्थल पर तीन जेसीबी मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर खुदाई का काम किया जा रहा है। अब तक बोरवेल के पास लगभग 25 फीट तक की गहराई तक जमीन खोदी जा चुकी है, ताकि बच्चे तक पहुंचने का रास्ता बनाया जा सके। इस बचाव अभियान को गति देने के लिए राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की विशेष टीमें भी मौके पर पहुंच चुकी हैं। दोनों ही एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया है और स्थानीय पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ऑपरेशन के दौरान पूरी सावधानी बरती जा रही है ताकि बच्चे को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
बचाव दल के सामने आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। रेस्क्यू के दौरान बोरवेल के भीतर पहले से ही फंसे एक बड़े पत्थर को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस पत्थर को हटाने के बाद बच्चे को ऊपर खींचने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इसके अलावा, बोरवेल के अंदर लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है ताकि रेस्क्यू अभियान पूरा होने तक बच्चे को सांस लेने में किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े और उसकी सेहत सुरक्षित बनी रहे।
यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब नौ साल का भानु पतंग लूटने के चक्कर में दौड़ रहा था। दौड़ते वक्त उसका पैर अचानक उस खुले बोरवेल पर रखे एक पत्थर पर आ गया। बच्चे का वजन पड़ते ही वह पत्थर अपनी जगह से खिसक गया, जिसके कारण भानु का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे बोरवेल के भीतर जा गिरा। कुछ ही पलों में घटी इस अचानक हुई घटना से वहां हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत अपनी तरफ से बच्चे को बचाने का प्रयास शुरू किया और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद भारी मशीनें और बचाव दल मौके पर पहुंचे।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के लिए रामगढ़ के विधायक सुखवंत सिंह स्वयं घटनास्थल पर मौजूद हैं। इसके अलावा अलवर की जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर डेरा डाले हुए हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बुटोली गांव की हर गली और चौराहे पर लोग चिंतित मुद्रा में खड़े हैं और सबकी निगाहें इस बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं। हर कोई भगवान से यही प्रार्थना कर रहा है कि नन्हा भानु सुरक्षित बाहर आ जाए।
दूसरी ओर, इस भयानक हादसे के बाद से भानु के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के तमाम लोग अपने जिगर के टुकड़े को सकुशल देखने की आस लगाए बैठे हैं। मौके पर मौजूद ग्रामीण पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बोरवेल की गहराई और भीतर फंसे पत्थरों के बीच बच्चे तक बिना किसी बाधा के पहुंचा जाए। करीब 400 फीट गहरे बोरवेल में 40 फीट की गहराई पर अटके भानु को बचाने के लिए जेसीबी से खुदाई, ऑक्सीजन सप्लाई और पत्थर हटाने का काम एक साथ चल रहा है। अब पूरा देश और स्थानीय लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि बचाव टीमें जल्द से जल्द इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करेंगी।




















