राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसे आध्यात्मिक साधक का जीवन चर्चा का विषय बना हुआ है जिनकी जीवनशैली हर किसी को अचंभित कर देती है। पाली-उदयपुर मेगा हाईवे के पास बूसी गांव के बाहरी हिस्से में बनी एक सामान्य सी कुटिया में संत त्यागी जी महाराज का निवास स्थान है। इस स्थान पर वे पिछले 26 वर्षों से अधिक समय से बिना किसी अन्न का सेवन किए अपना जीवन गुजार रहे हैं। उनकी यह साधना साधारण उपवास से परे है और पूरी तरह से ईश्वर आराधना को समर्पित है।
उनकी यह अनूठी दिनचर्या केवल भोजन त्याग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनका रहन-सहन भी बेहद कठिन नियमों से बंधा हुआ है। चाहे चिलचिलाती गर्मी हो जब तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है, कड़ाके की सर्दी का समय हो या फिर तेज बारिश का मौसम, वे हर स्थिति में सिर्फ एक ही वस्त्र पहनते हैं। रात के समय विश्राम करते वक्त भी वे किसी तरह के कंबल या चादर का उपयोग नहीं करते हैं। उनका पूरा समय अपनी कुटिया के भीतर बैठकर भगवान के नाम का स्मरण करने और माला फेरने में ही गुजरता है।
संत त्यागी जी महाराज के खान-पान की बात करें तो उन्होंने करीब ढाई दशक से अधिक समय से अनाज का एक भी दाना मुंह में नहीं डाला है। वे पूरे दिन के दौरान केवल दो कटोरी छाछ और पानी का ही सेवन करते हैं। मौसम की तमाम विषम परिस्थितियां भी उनकी इस कठोरचर्या को नहीं बदल पाती हैं और वे हमेशा एक वस्त्र में रहकर बिना किसी आराम के अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
बूसी के पास स्थित उनके इस छोटे से आश्रम में विशेष अवसरों जैसे गुरु पूर्णिमा पर भारी संख्या में लोगों का जमावड़ा होता है। दूर-दूर से आने वाले भक्त संत त्यागी जी के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं। इस दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में छाछ और टॉफियां वितरित की जाती हैं। इस पूरे आयोजन के बीच संत की एक खास बात यह भी रहती है कि वे किसी से भी पैसे या दान के रूप में दक्षिणा स्वीकार नहीं करते हैं।
वर्तमान समय में जब अमूमन बड़े और भव्य आश्रमों के साथ भौतिक सुख-सुविधाओं की प्रधानता बढ़ गई है, तब भी संत त्यागी जी एक बेहद साधारण और छोटी कुटिया में ही अपना जीवन बिताते हैं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे अपने पास आने वाले किसी भी श्रद्धालु से कभी दान-भेंट या दक्षिणा नहीं लेते। वे बिना किसी स्वार्थ के केवल अपने द्वार पर आने वाले हर भक्त को निस्वार्थ भाव से आशीर्वाद देते हैं।
भौतिकता की दौड़ से दूर संत त्यागी जी महाराज का यह जीवन समाज के लिए गहरी आस्था और प्रेरणा का स्त्रोत बन चुका है। सांसारिक मोह-माया से परे रहकर केवल ईश्वर की भक्ति में लीन रहने वाले ये संत दर्शाते हैं कि भौतिक वस्तुओं के बिना भी आत्मिक बल के सहारे जीवन जिया जा सकता है।





















