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छतरपुर में भिंडी की खेती से बंपर मुनाफा, जानवी और राधिका F1 वैरायटी बढ़ा रही हैं पैदावारव्यापार
18 अक्तू॰ 2026, 8:31 pm (10 दिन पहले)· 0

छतरपुर में भिंडी की खेती से बंपर मुनाफा, जानवी और राधिका F1 वैरायटी बढ़ा रही हैं पैदावार

कम लागत और सही हाइब्रिड बीजों के चयन से भिंडी की खेती किसानों को तगड़ा मुनाफा दे सकती है। बाजार की मांग और सही समय पर बुवाई करके किसान बंपर कमाई कर सकते हैं।

सब्जी वर्गीय फसलों में भिंडी की खेती को एक बेहद लाभ का सौदा माना जाता है, जो कम खर्च में भी किसानों की जेब भर सकती है। कृषि क्षेत्र के जानकारों और प्रगतिशील किसानों के अनुसार, सही वैरायटी का चुनाव करके इस फसल से शानदार कमाई की जा सकती है। यदि खेती की सही तकनीक अपनाई जाए और बाजार के रुझान को समझा जाए, तो कम समय में ही बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है।

लागत और बुवाई का गणित

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव इलाके में खेती करने वाले प्रगतिशील किसान सलीम खान के अनुसार, एक एकड़ जमीन में भिंडी उगाने पर लागत काफी कम आती है। यदि खेत में पहले से ही मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो एक एकड़ में फसल तैयार करने का कुल खर्च महज 10 से 15 हजार रुपए के आसपास बैठता है, जिसमें मुख्य रूप से अच्छे बीजों का खर्च शामिल होता है।

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खेती का सही समय और अवधि

इस फसल को साल के अधिकांश महीनों में उगाया जा सकता है, सिवाय दिसंबर और जनवरी के महीनों को छोड़कर जब अत्यधिक ठंड फसलों की वृद्धि को प्रभावित करती है। किसान अक्टूबर महीने में भी इसकी बुवाई कर सकते हैं, हालांकि दिसंबर की कड़ाके की ठंड के दौरान पौधों की विशेष देखभाल करनी पड़ती है। बुवाई के लगभग 50 दिन बाद फसल से उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है और तुड़ाई का यह सिलसिला करीब ढाई महीने तक लगातार चलता रहता है।

उत्पादन और तुड़ाई की प्रक्रिया

खेती के दौरान बेड की लंबाई और उसकी देखरेख का भी फसल पर गहरा असर पड़ता है। खेत में बने एक 300 फीट लंबे बेड से एक बार की तुड़ाई में लगभग 6 से 7 किलोग्राम भिंडी प्राप्त हो जाती है। किसान एक दिन का अंतराल देकर नियमित रूप से तुड़ाई कर सकते हैं। बाजार में बेहतर दाम पाने के लिए बुवाई का समय इस प्रकार चुनना चाहिए जब या तो मंडियों में भिंडी की आवक पूरी तरह थम चुकी हो या फिर आपकी फसल सबसे पहले बाजार में पहुंच जाए।

थोक बाजार भाव और कमाई

वर्तमान समय में थोक बाजारों में भिंडी का भाव करीब 30 रुपए प्रति किलोग्राम चल रहा है, लेकिन जब फसल बाजार में उतरेगी तब इसके 40 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिकने की उम्मीद है क्योंकि उस दौरान बाजार में आवक कम हो जाती है। जानकारों का मानना है कि थोक बाजार में भिंडी का न्यूनतम भाव अक्सर 10 रुपए प्रति किलोग्राम तक रहता है।

हाई-यीडिंग हाइब्रिड वैरायटी का चुनाव

किसी भी फसल की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके लिए किस किस्म का बीज चुना गया है। आज के समय में बाजार में कई उन्नत हाइब्रिड बीज उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से बंपर पैदावार ली जा सकती है। किसान सलीम खान ने अपनी खेती में वीएनआर कंपनी की जानवी और एडवांटा की राधिका F1 जैसी नामी कंपनियों के हाइब्रिड बीजों का उपयोग किया है, जिससे बंपर उत्पादन मिल रहा है।

सवाल-जवाब

भिंडी की खेती में एक एकड़ पर कितनी लागत आती है?
यदि खेत में मल्चिंग और ड्रिप की व्यवस्था पहले से है, तो बीज का खर्च जोड़कर एक एकड़ में 10 से 15 हजार रुपए की लागत आती है।
भिंडी की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
बुवाई के लगभग 50 दिन बाद भिंडी का प्रोडक्शन शुरू हो जाता है और तुड़ाई करीब ढाई महीने तक चलती है।
कौन सी हाइब्रिड वैरायटी का उपयोग किया जा रहा है?
किसान वीएनआर कंपनी की जानवी और एडवांटा की राधिका F1 हाइब्रिड वैरायटी का उपयोग कर रहे हैं।
वर्तमान में थोक बाजार में भिंडी का भाव क्या है?
वर्तमान में थोक बाजार में भिंडी का भाव 30 रुपए प्रति किलोग्राम चल रहा है।
किन महीनों में भिंडी की खेती नहीं की जा सकती?
दिसंबर और जनवरी के दौरान अधिक ठंड होने के कारण सामान्यतः खेती करना कठिन होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·9 दिन पहले

छतरपुर के किसानों का यह तरीका वाकई बढ़िया है। कम खर्च में इतनी अच्छी कमाई की उम्मीद जगती है।

Michael Anderson@michael-anderson·9 दिन पहले

सिर्फ दस से पन्द्रह हजार की लागत में इतनी कमाई, वाकई कमाल है।

Meera Joshi@meera-joshi·9 दिन पहले

माइकल, दिसंबर और जनवरी की भयंकर ठंड में इन पौधों को बचाना असली चुनौती होगी, लागत कम होना तो बस एक शुरुआत है।

Rohan Gupta@rohan-gupta·9 दिन पहले

छतरपुर की यह भिंडी वाली बात थोड़ी अजीब लगी। एक एकड़ का खर्च सिर्फ दस पंद्रह हज़ार और वो भी मल्चिंग के साथ? अगर ड्रिप और मल्चिंग पहले से नहीं लगी हो तो खर्चा सीधा डबल हो जाएगा। किसान भाई बिना पूरी लागत जोड़े हिसाब लगा रहे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

रोहन भाई, आप ठीक कह रहे हैं, बिना ड्रिप और मल्चिंग के असली लागत कितनी बैठेगी, इसका कोई ज़िक्र है क्या इसमें?

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