भारतीय इक्विटी बाजारों में पूंजी के प्रवाह को लेकर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। हाल के दौर में घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के सहारे टिके रहने वाले घरेलू शेयर बाजार में अब विदेशी संस्थागत निवेशक आक्रामक लिवाली के साथ लौट आए हैं। महीनों तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों ने अपनी रणनीति में तीव्र बदलाव किया है और पूंजी की मजबूत आवक दर्ज कराई है। दूसरी ओर, गिरावट के दौर में बाजार को सहारा देने वाले घरेलू संस्थान अब ऊंचे स्तरों पर शेयरों की बिक्री कर अपनी पूंजी खाली करते नजर आ रहे हैं।
52 कारोबारी सत्रों का सबसे बड़ा लिवाली स्तर
बाजार के संयुक्त कैश आंकड़ों के अनुसार, 3 नवंबर को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने आक्रामक खरीदारी की। इस दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कुल 20,970.51 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे, जबकि उनकी तरफ से 14,133.70 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की गई। इस तरह सत्र की समाप्ति पर विदेशी निवेशकों की नेट खरीदारी 6,836.81 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
यह आंकड़ा पिछले 52 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई सबसे बड़ी दैनिक शुद्ध खरीदारी का कीर्तिमान है। इससे पहले विदेशी फंडों ने 28 अक्टूबर 2025 को लगभग 10,340 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। लगातार तीसरे सत्र में विदेशी धन का यह प्रवाह दर्शाता है कि वैश्विक फंड प्रबंधकों की धारणा में भारतीय इक्विटी परिसंपत्तियों को लेकर आकर्षण फिर से लौट रहा है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख और मुनाफावसूली
विदेशी निवेशकों की ओर से आ रहे इस मजबूत प्रवाह के विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने उसी कारोबारी सत्र में शुद्ध बिकवाली दर्ज कराई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (MSEI) के संयुक्त आंकड़ों के अनुसार, घरेलू संस्थाओं ने 16,723.91 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन इसके मुकाबले 20,402.76 करोड़ रुपये की बिकवाली कर डाली। इसके चलते दिन के अंत में घरेलू निवेशकों की नेट बिकवाली 3,678.85 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुझान यह संकेत नहीं देता कि घरेलू फंड पूरी तरह बाजार से बाहर हो रहे हैं। वास्तव में घरेलू म्यूचुअल फंड और वित्तीय संस्थान ऊंचे स्तरों पर अपने पोर्टफोलियो में लाभ सुरक्षित करने के लिए चुनिंदा शेयरों में मुनाफावसूली कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की जोरदार मांग के कारण घरेलू फंडों को लिक्विडिटी का लाभ उठाकर नकदी जुटाने का अवसर मिला है। हालांकि, केवल एक सत्र के आंकड़ों के आधार पर घरेलू निवेशकों के दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
लगातार खरीदारी और वैश्विक कारकों की भूमिका
विदेशी निवेशकों का यह सकारात्मक रुख केवल एक दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। जब अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशक घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर धन लगाते हैं, तो इससे सिस्टम में नकदी बढ़ती है और आम निवेशकों का मनोबल भी मजबूत होता है। विदेशी प्रवाह बढ़ने से ब्लूचिप शेयरों में स्थिरता आती है और पूरे सूचकांक को समर्थन मिलता है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि विदेशी लिवाली को बाजार में एकतरफा तेजी की पक्की गारंटी मान लेना सही नहीं होगा। विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह कई संवेदनशील वैश्विक और घरेलू आर्थिक चरों पर निर्भर करता है। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, भारतीय रुपये की विनिमय दर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और भारतीय कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यदि इनमें से किसी मोर्चे पर दबाव बनता है, तो विदेशी निवेशकों की रणनीति में पुनः फेरबदल की संभावना बनी रहती है।

















