अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कारोबारी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के घटनाक्रम और अमेरिका व ईरान के बीच उभरती कूटनीतिक और सैन्य परिस्थितियों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक सीमित दायरे में स्थिर बना हुआ है। ऊर्जा की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ने वैश्विक महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे बड़े वित्तीय दांव लगाने से पहले बाजार सहभागियों ने सतर्क रुख अख्तियार कर लिया है।
कच्चे तेल में उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान तनाव
कच्चे तेल की कीमतें समाचारों के बदलते प्रवाह के साथ लगातार संवेदनशील बनी हुई हैं। तेल की कीमतों पर उस समय दबाव देखा गया जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा जब्त संपत्तियों पर रियायतों को लेकर अपुष्ट सूचनाएं सामने आईं, हालांकि इसके बाद कीमतों की दिशा तेजी से पलट गई। इससे पूर्व ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल में तेजी दर्ज की गई थी।
कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना हुआ है। कारोबारी एक ओर कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को तौल रहे हैं, तो दूसरी ओर अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई के खतरों को भी देख रहे हैं। ऊर्जा की ऊंची लागत से महंगाई का दौर लंबा खिंचने का अंदेशा है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के कयासों को बल मिल रहा है।
अमेरिकी डॉलर और यूरो की मौजूदा स्थिति
केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख की संभावनाओं ने अमेरिकी डॉलर को गिरावट से सहारा दिया है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के रुख को मापने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 101.80 के करीब घूम रहा है। डॉलर सूचकांक कारोबारी सत्र के निचले स्तरों से सुधरा जरूर है, लेकिन अभी भी 102.00 के नीचे अपने पुराने दायरे में ही बना हुआ है। डॉलर को ईरान में टकराव और कच्चे तेल की मजबूत कीमतों से समर्थन मिल रहा है, हालांकि अमेरिकी घरेलू राजनीतिक अनिश्चितता इसके उछाल पर अंकुश लगा रही है।
दूसरी ओर, ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर यूरोज़ोन के लिए ईंधन का महंगा होना आयात बिल को बढ़ाने वाला और आर्थिक वृद्धि पर दबाव डालने वाला साबित हो रहा है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति के फिर से सिर उठाने का जोखिम भी बढ़ रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन साधने की कोशिश में जुटा है, वहीं फ्रांस की वित्तीय चिंताएं यूरो के लिए एक और बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं।
एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल
मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्रा युग्मों में भी मिला-जुला और सतर्क कारोबार देखा गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा 25 आधार अंकों (bps) की अपेक्षित ब्याज दर वृद्धि के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन कमजोर होकर दो सप्ताह के नए निचले स्तर पर आ गया। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का यह फैसला पूरी तरह सर्वसम्मत नहीं था, क्योंकि तीन सदस्य ब्याज दरों को 4.60% पर ही स्थिर रखने के पक्ष में थे। इस असहमति ने आगे दर वृद्धि की उम्मीदों को कमजोर किया, जिसने डॉलर की हल्की मजबूती के साथ मिलकर इस युग्म पर दबाव डाला।
उधर डॉलर और जापानी येन का युग्म मंगलवार के एशियाई सत्र में फिसल गया और पिछले दिन की 158.00 तक की बढ़त को कुछ हद तक गंवा बैठा। ईरान से जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रमों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के पहले डॉलर पर बने दबाव ने इस रुख को हवा दी। इस बीच जापान सरकार द्वारा मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया, हालांकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता ने लाभ को सीमित रखा। नतीजतन, यह युग्म अपने जाने-पहचाने दायरे में ही फंसा रहा।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर प्रभाव
जिंस बाजार में सोने ने मंगलवार को अपनी तेजी की रफ्तार खो दी। ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई की खबर के बाद जब तेल की कीमतों में तेजी लौटी, तो सोने के भाव दबाव में आ गए। हाजिर सोना (XAU/USD) 0.93% की दैनिक गिरावट के साथ लगभग $3,909 प्रति औंस पर आ गया।
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी मंदी का असर देखने को मिला। बिटकॉइन मंगलवार को छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण करते हुए फिसलकर $76,566 पर कारोबार कर रहा था। बिटकॉइन की तरह एथेरियम पर भी दबाव बना रहा और यह एक संकीर्ण समर्थन दायरे में सीमित दिखा। वहीं दूसरी ओर, रिपल मामूली बढ़त के साथ $1.25 से थोड़ा ऊपर टिका रहा। कुल मिलाकर, राजनीतिक और भू-राजनीतिक घटनाओं के स्पष्ट नतीजे सामने आने तक तमाम वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।



















