अंतरराष्ट्रीय जिंस और मुद्रा बाजारों में मंगलवार को तेज हलचल दर्ज की गई, जहां चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने वैश्विक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। चांदी का भाव फिसलकर 48.6 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया, जो लगभग एक साल का इसका सबसे निचला स्तर है। इस तेज बिकवाली के चलते सोने की तुलना में चांदी का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है, जिसका सीधा प्रमाण गोल्ड और सिल्वर अनुपात का बढ़कर 80 तक पहुंच जाना है। कमर्शबैंक के अनुसार इस समय चांदी के दामों में दिख रही यह कमजोरी जरूरत से ज्यादा आक्रामक और अतिरंजित प्रतीत होती है, क्योंकि बुनियादी मांग से जुड़े संकेत इतने कमजोर नहीं हैं।
औद्योगिक चिंताओं और धातु बाजार का दबाव
चांदी के भाव में आई इस तेज गिरावट के पीछे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में चल रहा सुधार एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में जारी बिकवाली के चलते निवेशकों में यह चिंता गहरा गई है कि इस सेक्टर से चांदी की खपत घट सकती है। इसके साथ ही सामान्य बेस मेटल्स यानी बुनियादी धातुओं की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। चूंकि चांदी की वैश्विक मांग का लगभग आधा हिस्सा औद्योगिक उपयोग से आता है, इसलिए बेस मेटल्स में जारी मंदी का सीधा असर चांदी के पूरे बाजार पर देखने को मिल रहा है।
चीन और भारत से मजबूत मांग के संकेत
बाजार की इस नकारात्मक धारणा के उलट एशियाई महाद्वीप से आने वाले आंकड़े चांदी के लिए मजबूत बुनियाद पेश कर रहे हैं। भारत ने आने वाले महीनों के भीतर चांदी की बड़ी खेप के आयात को मंजूरी दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में भौतिक मांग को मजबूत सहारा मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर चीन के सीमा शुल्क आंकड़ों से पता चलता है कि देश ने चालू वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में पिछले साल की इसी समान अवधि की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक चांदी का आयात किया है।
चीन में दर्ज किया गया यह आयात स्तर पिछले आठ वर्षों में साल के इस समय का सबसे ऊंचा स्तर है, जो पिछले पूरे साल के कुल आयात आंकड़े को भी पहले ही पार कर चुका है। यह रुझान साफ दर्शाता है कि चीन के भीतर फोटोवोल्टिक यानी सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, अन्य औद्योगिक अनुप्रयोगों और निवेश उद्देश्यों के लिए चांदी की वास्तविक मांग बेहद ठोस बनी हुई है।
सोने और कच्चे तेल में भू-राजनीतिक मोड़
जिंस बाजार के अन्य हिस्सों पर नजर डालें तो सोने की चमक मंगलवार को कुछ फीकी पड़ती दिखी। वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की जानकारी दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे सोने की तेजी की रफ्तार थम गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 0.93 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 3,909 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल में आई मजबूती ने बाजार के वित्तीय समीकरणों को तुरंत प्रभावित किया।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की चाल
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरकर एशियाई सत्र के दौरान दो सप्ताह के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में उम्मीद के अनुरूप 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी किए जाने के तुरंत बाद आई। केंद्रीय बैंक के भीतर इस निर्णय पर आम सहमति नहीं बन पाई थी और तीन सदस्यों ने ब्याज दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही स्थिर रखने का पक्ष लिया था। इस मतभेद ने आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर की हल्की मजबूती के साथ इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बढ़ गया।
वहीं जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मंगलवार के एशियाई सत्र में थोड़ा कमजोर हुआ और पिछले दिन की बढ़त गंवाकर 158.00 के स्तर की ओर आ गया। ईरान से जुड़े कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों और अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले डॉलर पर कुछ दबाव बना रहा। जापानी बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया, यद्यपि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता ने येन की तेजी को सीमित रखा। इस स्थिति के चलते यह मुद्रा जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में ही बनी रही।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और क्रिप्टोकरेंसी का हाल
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने शुरुआती निचले स्तरों से सुधरने में कामयाब रहा, हालांकि यह 102.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे अपने पिछले दायरे में ही सीमित दिखा। ग्रीनबैक को ईरान में चल रहे संघर्ष और महंगे होते कच्चे तेल से समर्थन मिला, लेकिन अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य की अनिश्चितता ने इसकी तेजी पर ब्रेक लगाए रखा।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी बिकवाली का दबाव हावी रहा। बिटकॉइन मंगलवार को गिरकर 76,566 डॉलर पर आ गया और छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण करने लगा। बिटकॉइन की तरह एथेरियम भी भारी दबाव में रहा और एक बेहद संकरे समर्थन दायरे में संघर्ष करता दिखा। वहीं दूसरी ओर रिपल मामूली बढ़त के साथ 1.25 डॉलर के स्तर से ठीक ऊपर कारोबार करता नजर आया।



















