उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में रुद्रपुर कोतवाली इलाके के अंतर्गत एक सड़क के किनारे अज्ञात महिला का पार्थिव शरीर बरामद होने के पश्चात पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। इस रहस्यमयी वारदात की छानबीन आगे बढ़ी तो चौंकाने वाली सच्चाई उजागर हुई, जिसमें कत्ल का इल्जाम किसी बाहरी अपराधी पर नहीं बल्कि मृतका के अपने ही कार्यस्थल के संचालक पर साबित हुआ। जांच अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला शादी करने के आग्रह, आपसी प्रेम प्रसंग और उसके बाद पैदा हुए गहरे मनमुटाव से जुड़ा हुआ है। आरोपी ने चलती चार पहिया गाड़ी के भीतर महिला का दम घोंट दिया और साक्ष्य नष्ट करने की गरज से शव को वाहन के पिछले हिस्से में लादकर पूरे इलाके में घंटों घूमता रहा।
तीन दिन की सघन पड़ताल के बाद पुलिस शिकंजे में आया संचालक
जांच टीमों ने बहत्तर घंटे के भीतर ब्लाइंड मर्डर की इस गुत्थी को सुलझाते हुए गोरखपुर स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान के संचालक विजय निषाद को हिरासत में लिया। जान गंवाने वाली युवती की शिनाख्त गोरखपुर के झंगहा थाना क्षेत्र अंतर्गत कन्हौली हरैया की रहने वाली रानी विश्वकर्मा के तौर पर की गई। वह आरोपी के विद्यालय में अध्यापन का कार्य संभालती थी। पुलिस छानबीन में पाया गया कि दोनों के मध्य काफी समय से व्यक्तिगत नजदीकियां थीं। हालांकि विजय पहले से गृहस्थ जीवन बिता रहा था और उसके परिवार में पत्नी के अतिरिक्त दो संतानें भी मौजूद हैं। पारिवारिक उलझनों के बीच रानी उस पर विधिवत विवाह करने का लगातार दबाव बना रही थी, जिसके चलते दोनों के बीच गंभीर तनाव गहरा गया था।
सड़क किनारे शव फेंकने की सूचना से शुरू हुई पड़ताल
इस सनसनीखेज घटनाक्रम का खुलासा 31 अक्टूबर की देर रात उस समय शुरू हुआ, जब रुद्रपुर क्षेत्र में श्री नेत्र ग्लोबल स्कूल की बाउंड्री के करीब एक वैगनआर चौपहिया वाहन से किसी महिला की देह फेंके जाने का संदेश स्थानीय लोगों को मिला। लावारिस हालत में पड़ा शव देखकर आसपास के ग्रामीण सन्न रह गए। जानकारी प्राप्त होते ही पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। पुलिस अधीक्षक अभिजित आर. शंकर ने स्वयं मौके का मुआयना किया और गुत्थी को तत्काल बेनकाब करने के उद्देश्य से कई विशेष जांच दस्ते गठित किए। मृतका की पहचान स्पष्ट होने के तुरंत बाद उसके पिता की लिखित तहरीर पर हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई और औपचारिक तफ्तीश को रफ्तार दी गई।
31 अक्टूबर की सुबह उपजा था तकरार
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पता चला कि 31 अक्टूबर के सबेरे रानी नियमित तौर पर अपने शिक्षण संस्थान पहुंची थी। परिसर में मौजूदगी के दौरान उसने संचालक विजय निषाद के समक्ष वैवाहिक बंधन में बंधने का विषय दोबारा उठाया। इस आग्रह को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई। बातचीत बिगड़ने पर विजय ने उसे बातचीत के बहाने अपनी वैगनआर गाड़ी में बैठा लिया और परिसर से दूर मिठाबेल गांव के बाहरी सुनसान इलाके की तरफ ले गया।
वाहन की सीट पर घोंटा गला, दिनभर डिग्गी में छिपाए रखा शव
सफर के दौरान गाड़ी के अंदर फिर से दोनों में जबानी जंग छिड़ गई। इसी तनातनी के बीच विजय ने गाड़ी की मध्य पंक्ति की सीट पर बैठी रानी की गर्दन को पूरी ताकत से दबा दिया, जिससे सांस रुकने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। कत्ल को अंजाम देने के पश्चात उसने शव को गाड़ी की पिछली डिग्गी में बंद कर दिया और उसे ठिकाने लगाने की जुगत भिड़ाने लगा। आरोपी अपनी गाड़ी में लाश लादकर दिनभर चौरीचौरा और आसपास के बाजारों व मार्गों पर सामान्य चालकों की भांति घूमता रहा, जिससे किसी को रत्ती भर भी संदेह नहीं हुआ।
सुराग मिटाने का प्रयास और अंतिम गिरफ्तारी
रास्ते में आरोपी ने जांच एजेंसियों को गुमराह करने के इरादे से पीड़िता का मोबाइल हैंडसेट तोड़ डाला। उसने फोन का आवरण और बैंक का एटीएम कार्ड अलग-अलग निर्जन ठिकानों पर फेंक दिए ताकि तकनीकी निगरानी से बचा जा सके। जैसे ही रात का अंधेरा फैला, वह रुद्रपुर के रास्ते श्री नेत्र ग्लोबल स्कूल के समीप पहुंचा और शव को सड़क किनारे गिराकर फरार हो गया। पुलिस दल ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और जमीनी मुखबिर तंत्र के सटीक तालमेल से निबही मोड़ के पास घेराबंदी कर विजय निषाद को दबोच लिया। आरोपी की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त वैगनआर गाड़ी को बरामद कर लिया गया है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी करते हुए पुलिस ने उसे सक्षम अदालत में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।



















