अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आईसीई ब्रेंट क्रूड 7.6 प्रतिशत का गोता लगाकर 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे फिसल गया है। तेल बाजार में इस तेज बिकवाली की मुख्य वजह अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की नई संभावनाएं बनना है। बाजार रणनीतिकारों का मानना है कि यदि शांति वार्ता की दिशा में ठोस प्रगति के संकेत मिलते हैं, तो कीमतों में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि फारस की खाड़ी से तेल की मजबूत आपूर्ति जारी रहने के बावजूद वर्तमान भावों में जोखिम का एक बड़ा प्रीमियम पहले से जुड़ा हुआ है।
वाशिंगटन और तेहरान से कूटनीतिक संकेत
ऊर्जा बाजार में यह आक्रामक गिरावट दोनों देशों से आए सकारात्मक बयानों के बाद देखने को मिली। जब डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या मध्यावधि चुनावों के बाद वह ईरान पर सैन्य हमला करेंगे, तो उनका सीधा जवाब 'ना' था। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सरकार को अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए देश के सर्वोच्च नेता से अधिक अधिकार दिए गए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि पहले भी ऐसी चर्चाएं बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन इस बार दोनों पक्षों से आ रहे रुख ने निवेशकों को चौंकाया है।
भू-राजनीतिक तनाव और जोखिम प्रीमियम
इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, बाजार विश्लेषक आगाह कर रहे हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह टलने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। सोमवार के दिन अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई कथित तौर पर एक अमेरिकी विमान पर ईरान की ओर से की गई गोलीबारी के जवाब में की गई थी। इसके बावजूद जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि शांति वार्ता में ठोस प्रगति होती है, तो क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है। वर्तमान में बाजार में भारी जोखिम प्रीमियम शामिल है, विशेषकर तब जब फारस की खाड़ी से तेल का प्रवाह निरंतर और मजबूत बना हुआ है।
मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलिया और जापान की स्थिति
वैश्विक वित्तीय बाजारों में कच्चे तेल और अमेरिकी राजनीति का असर विदेशी मुद्रा दरों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कमजोर हुआ और एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान दो सप्ताह के नए निचले स्तर पर आ गया। यह गिरावट रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में की गई 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद आई। इस बैठक में फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ था, क्योंकि तीन सदस्य ब्याज दर को 4.60 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने के पक्ष में थे। इस मतभेद ने आगे और सख्त कदम उठाए जाने की संभावनाओं को कमजोर कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर की मामूली मजबूती के बीच एयूडी/यूएसडी दबाव में आ गया।
दूसरी ओर, एशियाई सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई में भी नरमी देखी गई और यह पिछले सत्र की 158.00 की बढ़त को गंवाते हुए नीचे आ गया। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और ईरान से जुड़ी कूटनीतिक उम्मीदों के बीच डॉलर दबाव में दिखा। साथ ही, जापानी सरकार द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया। हालांकि बैंक ऑफ़ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता के कारण येन की बढ़त सीमित रही, जिससे यह मुद्रा जोड़ा एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।
सोना, डॉलर इंडेक्स और क्रिप्टोकरेंसी का हाल
कमोडिटी और वित्तीय परिसंपत्तियों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। सोने की कीमतों में मंगलवार को तेजी की गति कमजोर पड़ी, जब केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद तेल की कीमतों में हल्की रिकवरी आई। सोना 0.93 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 3,909 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने निचले स्तरों से कुछ सुधरा लेकिन 102.00 के नीचे ही दायरे में बना रहा। ग्रीनबैक को ईरान में चल रही सैन्य गतिविधियों और तेल की कीमतों से सहारा मिला, लेकिन अमेरिकी राजनीतिक अनिश्चितता ने इसकी बढ़त पर रोक लगाई।
डिजिटल एसेट बाजार की बात करें तो बिटकॉइन मंगलवार को कमजोर होकर 76,566 डॉलर पर आ गया, जहां इसने छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण किया। इसी तरह एथेरियम भी दबाव में रहा और एक संकीर्ण समर्थन दायरे में सीमित दिखा। दूसरी तरफ, रिपल 1.25 डॉलर के स्तर से थोड़ा ऊपर कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों के अनुसार भू-राजनीतिक हालात और आगामी अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में सभी प्रमुख वित्तीय संपत्तियों की दिशा तय करेंगे।



















