टेक कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखने के बाद विवादों में घिर गए हैं। कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उन पर व्यावसायिक लाभ और अपनी कंपनी के हितों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की खुशामद करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, श्रीधर वेम्बू ने ट्रोल्स को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न तो किसी निराधार आलोचना से प्रभावित होंगे और न ही किसी भी तरह की धमकी के आगे झुकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने जोहो के बिजनेस मॉडल और उसके वास्तविक राजस्व स्रोतों का पूरा ब्योरा जनता के सामने रख दिया है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर किया जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब श्रीधर वेम्बू ने सीजेपी विरोध प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने प्रधान की सराहना करते हुए उन्हें एक बेहतरीन और संवेदनशील जनसेवक बताया, जो देश के युवाओं और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के कल्याण के लिए बेहद चिंतित रहते हैं। वेम्बू ने उल्लेख किया कि उनके और धर्मेंद्र प्रधान के बीच इस विषय पर कई बार गहन चर्चा हुई है कि ग्रामीण युवाओं के कौशल को कैसे बेहतर बनाया जाए और उन्हें रोजगार के नए अवसर कैसे दिए जाएं।
अपनी पोस्ट में वेम्बू ने लिखा:
"श्री धर्मेंद्र प्रधान उन बेहतरीन जनसेवकों में से एक हैं जिन्हें मैं जानता हूं। वे इस देश के ग्रामीण युवाओं की काफी चिंता करते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के फैसले से उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत दुख पहुंचा है। वेम्बू के अनुसार, प्रधान ने देशहित को अपने से ऊपर रखा, जिससे उनके प्रति वेम्बू का सम्मान और अधिक बढ़ गया है। वेम्बू ने देश के प्रति उनकी समर्पित सेवाओं के लिए आभार भी व्यक्त किया। हालांकि, इस पोस्ट के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर सरकार से अनुचित लाभ लेने के आरोप लगाने शुरू कर दिए और उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा।
जोहो की कमाई का असली जरिया क्या है?
आलोचकों और ट्रोल्स को सीधे जवाब देते हुए श्रीधर वेम्बू ने 25 जुलाई 2026 को एक और पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने जोहो की वित्तीय स्थिति और उसकी सरकारी निर्भरता से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए। उन्होंने साफ किया कि जोहो का अस्तित्व किसी भी सरकारी मदद या राजनीतिक मेहरबानी पर निर्भर नहीं है। वेम्बू ने बताया कि जोहो के कुल राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत से बाहर के अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आता है। इस विशाल वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हुए अपनी योग्यता के बल पर हासिल किया है।
अपनी वित्तीय जानकारी साझा करते हुए वेम्बू ने लिखा:
"कुछ तथ्य: हमारा लगभग 90 प्रतिशत राजस्व भारत के बाहर से आता है, जिसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच हासिल किया गया है।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जोहो की कुल आय में सरकारी परियोजनाओं और अनुबंधों की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के आसपास ही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी वे सरकार के साथ किसी परियोजना पर काम करते हैं, तो उनका उद्देश्य अपनी तिजोरी भरना या मुनाफा कमाना नहीं होता, बल्कि हमेशा देश के टैक्सपेयर्स के पैसे बचाना होता है। वे टैक्सपेयर्स के पैसों का बेहद सम्मान करते हैं और लागत प्रभावी सेवाएं प्रदान करते हैं।
विचारों की स्वतंत्रता और किसी भी दबाव से इनकार
जोहो के सह-संस्थापक ने स्पष्ट किया कि उनके विचार पूरी तरह से स्वतंत्र हैं और वे किसी भी राजनीतिक विचारधारा से बंधे नहीं हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और न ही किसी फालतू की सोशल मीडिया आलोचना से उनका हौसला टूटने वाला है। वे अपनी स्वतंत्र सोच के साथ देश के विकास में योगदान देना जारी रखेंगे।
वेम्बू ने जोर देकर कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में आज तक किसी भी सरकार से कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक लाभ नहीं मांगा है। वे सरकार को जो भी सलाह या देशहित में सुझाव देते हैं, वह पूरी ईमानदारी और बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के दी जाती है। इस स्पष्टीकरण के जरिए वेम्बू ने यह साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान के लिए उनका सम्मान पूरी तरह से ग्रामीण भारत के विकास और युवाओं के कौशल सुधार की साझा सोच पर आधारित था, न कि किसी व्यावसायिक लॉबिंग पर।



















