अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खुदरा ईंधन की कीमतों में तत्काल कटौती करने की मांग किए जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा दिग्गज शेवरॉन दुनिया भर के वित्तीय और औद्योगिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। ट्रंप ने कंपनी के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) माइक वर्थ को कड़े शब्दों में फटकार लगाई और उनसे खुदरा तेल दरों को तुरंत कम करने को कहा। लगभग 400 अरब डॉलर (करीब 40 लाख करोड़ रुपये) के विशाल बाजार पूंजीकरण के साथ शेवरॉन दुनिया की 38वीं सबसे मूल्यवान सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी मानी जाती है। यद्यपि इसका मुख्य परिचालन अमेरिका, यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बड़े ऊर्जा बाजारों में विस्तृत है, लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में भी कंपनी अपने व्यापारिक आधार और निवेश पोर्टफोलियो को लगातार मजबूत बना रही है। ऐसे में कई निवेशकों और उपभोक्ताओं के मन में यह उत्सुकता है कि शेवरॉन का भारतीय बाजार से क्या संबंध है और यह यहां किन क्षेत्रों में कार्यरत है।
भारत में शेवरॉन की मौजूदगी और कारोबारी रणनीति
भारतीय बाजार में शेवरॉन की व्यावसायिक उपस्थिति अन्य पश्चिमी देशों से काफी भिन्न है। भारत में कंपनी पारंपरिक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन पर सीधे जोर देने के बजाय उच्च तकनीक वाले लुब्रीकेंट, अनुसंधान, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सेवाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। भारत के लुब्रीकेंट बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से अक्टूबर 2023 में शेवरॉन की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी शेवरॉन ब्रांड्स इंटरनेशनल ने भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के साथ एक दीर्घकालिक व्यावसायिक समझौता किया। इस ऐतिहासिक साझेदारी के तहत दोनों कंपनियों ने संयुक्त रूप से भारत में प्रीमियम लुब्रीकेंट्स के लाइसेंस, स्थानीय उत्पादन, वितरण और मार्केटिंग का जिम्मा संभाला। इसके माध्यम से प्रतिष्ठित कालटेक्स (Caltex) ब्रांड को भारतीय बाजार में पुनर्जीवित और प्रसारित किया गया। इसके अतिरिक्त, शेवरॉन अपने अन्य प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय लुब्रीकेंट ब्रांडों, जैसे कि हैवोलिन (Havoline) और डेलो (Delo), को भी भारतीय वाहन मालिकों और औद्योगिक ग्राहकों को सीधे उपलब्ध करा रही है।
बेंगलुरु में 1 अरब डॉलर का विशाल तकनीकी केंद्र
भारत की मजबूत आईटी और इंजीनियरिंग प्रतिभा का रणनीतिक लाभ उठाने के लिए शेवरॉन ने देश में बड़ा वित्तीय निवेश किया है। कंपनी ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अपना अत्याधुनिक शेवरॉन इंजीनियरिंग एंड इनोवेशन एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किया है, जिसे संक्षेप में इंजन (ENGINE) कहा जाता है। इस वैश्विक तकनीकी केंद्र की स्थापना के लिए कंपनी ने 1 अरब डॉलर (लगभग 9,500 करोड़ रुपये) का भारी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश निर्धारित किया है। इस अत्याधुनिक सेंटर का प्राथमिक उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, उन्नत डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्विन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से शेवरॉन के वैश्विक परिचालन को सशक्त बनाना है। इस तकनीकी पहल को संचालित करने के लिए कंपनी ने 1,000 से अधिक उच्च योग्य भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और आईटी पेशेवरों को नियुक्त किया है। यह केंद्र शेवरॉन के वैश्विक डिजिटल तंत्र के साथ-साथ भारत में उसके लुब्रीकेंट और रिफाइनिंग कारोबार को तकनीकी दिशा और बैकएंड सहायता प्रदान करता है।
भारतीय एडिटिव्स में हिस्सेदारी और रिफाइनरी सहयोग
तकनीकी नवाचार केंद्र और लुब्रीकेंट विपणन के अलावा शेवरॉन ने भारत के औद्योगिक रसायन और रिफाइनिंग क्षेत्र में भी गहरी जड़ें जमाई हैं। शेवरॉन की विशेष रासायनिक सब्सिडियरी इकाई, शेवरॉन ओरोनाइट ने भारतीय एडिटिव्स लिमिटेड में 50 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी हासिल की है। यह भारतीय संयुक्त उद्यम कंपनी वाहनों तथा औद्योगिक मशीनों के लिए आवश्यक विशेष लुब्रीकेंट एडिटिव्स का निर्माण और बिक्री करती है। इसके अलावा, शेवरॉन भारत की प्रमुख तेल रिफाइनरियों को ईंधन उत्पादन क्षमता में सुधार करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता वाले बेस ऑयल तैयार करने के लिए अपनी पेटेंटेड प्रोसेस टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराती है। यदि शेवरॉन के कुल भारतीय निवेश का आकलन करें तो कंपनी अब तक देश में करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज कर चुकी है, और उसका मुख्य ध्यान भारतीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी को क्रमिक रूप से बढ़ाना है।
समुद्री तेल अन्वेषण और भविष्य के अवसर
वर्तमान समय में शेवरॉन भारत की भूमि पर या तटीय क्षेत्रों में खुद तेल और गैस निकालने का काम नहीं करती है। हालांकि, भारत सरकार द्वारा हाल ही में घोषित की गई नई ऊर्जा नीतियों और समुद्री तेल खोज तथा अन्वेषण (ऑफशोर एक्सप्लोरेशन) को प्रोत्साहन देने के फैसले से शेवरॉन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए नए दरवाजे खुल सकते हैं। शेवरॉन के पास गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज करने तथा जटिल ड्रिलिंग तकनीकों को संचालित करने का दशकों का वैश्विक अनुभव है। भारतीय तेल कंपनियां जब नई समुद्री परियोजनाओं में तकनीकी और वित्तीय भागीदारों की तलाश करेंगी, तो शेवरॉन के लिए अपने व्यावसायिक दायरे को बढ़ाने के बड़े अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। फिलहाल कंपनी भारत में प्रत्यक्ष तेल निष्कर्षण की तुलना में तकनीकी सहायता, संयुक्त उपक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है।



















