खनन क्षेत्र के बड़े कारोबारी समूह वेदांता के कॉरपोरेट पुनर्गठन का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। समूह के डिमर्जर के बाद बनी नई कंपनी वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड ने कारोबार के विस्तार और वित्तीय मजबूती के लिए 1.4 अरब डॉलर यानी करीब 13,500 करोड़ रुपये का विशाल लोन जुटाने की योजना बनाई है। अरबपति अनिल अग्रवाल के इस समूह का तीन हिस्सों में विभाजन होने के बाद पूंजी जुटाने की दिशा में यह पहला और सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। देश के तीन प्रमुख निजी बैंकों का यह कंसोर्टियम नई कंपनी को इस भारी भरकम कर्ज की आपूर्ति करने जा रहा है, जिससे विभाजित इकाइयों को नए सिरे से अपने वित्त को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
बैंकों का हिस्सा, ब्याज दरें और लोन की अवधि
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस 13,500 करोड़ रुपये की लोन व्यवस्था में निजी क्षेत्र के तीन बड़े बैंकों की भागीदारी तय की गई है। इसमें एक्सिस बैंक 5,500 करोड़ रुपये का कर्ज देगा, जबकि एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक मिलकर शेष 8,000 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराएंगे। इस कर्ज का एक बड़ा हिस्सा तीनों बैंक संयुक्त रूप से मिलकर प्रदान कर रहे हैं। बैंकों ने वेदांता एल्युमीनियम को यह लोन साढ़े 6 से 7 साल की दीर्घकालिक अवधि के लिए मंजूर किया है। इस लोन पर बैंकों ने 7.9 से 8 फीसदी के बीच प्रतिस्पर्धी ब्याज दर ऑफर की है। इस नए लोन का मुख्य उद्देश्य कंपनी के मौजूदा कर्ज को रीफाइनेंस करना है, ताकि पुरानी देनदारियों का बोझ कम किया जा सके और कंपनी की बैलेंस शीट को अधिक लचीला बनाया जा सके। कोर्ट की ओर से डिमर्जर को मंजूरी मिलने के बाद समूह अपने प्रत्येक कारोबार को तेजी से बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन को सुगम बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
5 सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजन और रेटिंग में सुधार
अनिल अग्रवाल ने अपने पूरे वेदांता समूह को 5 सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित किया है। इनमें से 4 प्रमुख कंपनियां विशेष रूप से एल्युमीनियम, पावर, तेल एवं गैस और लौह अयस्क के खनन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। डिमर्जर के बाद बनीं ये सभी 5 कंपनियां फिलहाल शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं और स्वतंत्र रूप से कारोबार कर रही हैं। कारोबार को इस प्रकार अलग-अलग हिस्सों में बांटने से समूह की परिचालन क्षमता और लचीलेपन में काफी सुधार आया है। इसी आधार पर रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स ने पिछले महीने वेदांता समूह की सभी कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में बढ़ोतरी की थी। रेटिंग एजेंसी का मानना था कि इस नए ढांचे से समूह को अपने अलग-अलग बिजनेस मॉडल को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल रही है।
वित्तवर्ष 2028 तक कर्ज में कमी और बैंकिंग क्रेडिट में तेजी
वित्तीय विश्लेषक संस्थान आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने अनुमान व्यक्त किया है कि वेदांता एल्युमीनियम का कुल कर्ज वित्तवर्ष 2028 तक घटकर 10,000 करोड़ रुपये से भी कम रह जाएगा। कंपनी के कर्ज में कमी का यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में कॉरपोरेट कर्ज बांटने की गति में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। 15 जुलाई तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश के बैंकिंग क्षेत्र का कुल कर्ज 17.7 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 217.3 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। भारतीय रिज़र्व बैंक यानी आरबीआई के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन की यह वृद्धि दर पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बाजार में कंपनियों के लिए पूंजी की उपलब्धता काफी मजबूत है।



















