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एथनॉल निर्माण पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती, चीनी के बाद अब चावल के उपयोग पर लगाई सीमाव्यापार
4 नव॰ 2026, 11:56 am (4 मिनट पहले)· 0

एथनॉल निर्माण पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती, चीनी के बाद अब चावल के उपयोग पर लगाई सीमा

सरकार ने चीनी के बाद अब चावल से एथनॉल बनाने पर भी कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, जिससे उत्पादन कंपनियों के सामने मक्के का रुख करने का विकल्प बचा है।

देश में जैव ईंधन को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच एथनॉल उत्पादन के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार बढ़ते उत्पादन के बाद अब केंद्र सरकार ने इसके कच्चे माल पर नए सिरे से अंकुश लगाना शुरू कर दिया है। चीनी के जरिए एथनॉल बनाने पर पूर्व में लगे प्रतिबंधों के बाद अब चावल के इस्तेमाल को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में रखे अतिरिक्त स्टॉक से तैयार होने वाले एथनॉल की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है।

उत्पादन कोटा और टेंडर के नए आंकड़े

नए प्रशासनिक प्रावधानों के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम के पास मौजूद सरप्लस चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर एथनॉल ही तैयार किया जा सकेगा। इसके अलावा चीनी और चावल दोनों स्रोतों को मिलाकर कुल एथनॉल उत्पादन की सीमा 484 करोड़ लीटर निर्धारित की गई है। वहीं तेल विपणन कंपनियों की आपूर्ति व्यवस्था को देखें तो उनके लिए 1,100 करोड़ लीटर का टेंडर जारी किया गया है। इन पाबंदियों से डिस्टिलरी इकाइयों को अपनी उत्पादन रणनीति में तुरंत फेरबदल करना होगा।

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मक्के की मांग बढ़ने से अन्य उद्योगों पर असर की संभावना

चावल और चीनी दोनों प्रमुख विकल्पों पर बंदिशें लगने के कारण विनिर्माता कंपनियां अब मक्के के उपयोग की ओर आकर्षित हो सकती हैं। खुले बाजार में मक्के की मांग पहले से ही काफी मजबूत बनी हुई है। यदि एथनॉल क्षेत्र से मक्के की खरीद अचानक तेज होती है, तो पोल्ट्री फार्मिंग, डेयरी सेक्टर और स्टार्च निर्माण से जुड़ी इकाइयों की इनपुट लागत में सीधा इजाफा हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य और पशु आहार से जुड़े क्षेत्रों में कीमतों को बेकाबू होने से रोकने के लिए सरकार आने वाले समय में मक्के से एथनॉल बनाने पर भी सीमा तय करने पर विचार कर सकती है।

सवाल-जवाब

एथनॉल बनाने के लिए चावल के उपयोग पर क्या नई सीमा तय की गई है?
भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में मौजूद अतिरिक्त चावल से एथनॉल बनाने की अधिकतम सीमा 324 करोड़ लीटर तय की गई है।
चीनी और चावल दोनों को मिलाकर कुल कितना एथनॉल तैयार किया जा सकेगा?
सरकारी नियमों के अनुसार चीनी और चावल दोनों स्रोतों से मिलाकर कुल 484 करोड़ लीटर एथनॉल ही बनाया जा सकेगा।
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कितने एथनॉल का टेंडर जारी किया है?
तेल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से कुल 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति के लिए टेंडर दिया गया है।
चावल और चीनी पर रोक के बाद कंपनियां किस कच्चे माल की ओर रुख कर सकती हैं?
इन दोनों विकल्पों पर बंदिशों के बाद एथनॉल निर्माता कंपनियों के मक्के के उपयोग की ओर रुख करने की संभावना है।
मक्के की मांग बढ़ने का असर किन उद्योगों पर पड़ सकता है?
मक्के का इस्तेमाल बढ़ने से पोल्ट्री, डेयरी और स्टार्च उद्योग की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।
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