अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर दबाव गहराता जा रहा है। बुधवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान चांदी करीब 49.20 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार करती देखी गई। यह धातु 3 नवंबर को दर्ज किए गए अपने 48.62 डॉलर के एक साल के निचले स्तर के काफी नजदीक पहुंच चुकी है। लगातार दूसरे दिन दर्ज की गई इस कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती रुझान हैं, जिसमें डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बहुमत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
संसद में शक्ति संतुलन बदलने से नीतिगत अनिश्चितता
अमेरिकी मतदाताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों के लिए संसद का नियंत्रण तय करने के मकसद से मंगलवार को मतदान किया। 435 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में से 253 सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं, जहां डेमोक्रेट्स ने 152 सीटें जीत ली हैं जबकि रिपब्लिकन पार्टी के खाते में 101 सीटें आई हैं। किसी भी दल को पूर्ण बहुमत साबित करने के लिए 218 सीटों के जादुई आंकड़े की दरकार होती है। निचले सदन पर डेमोक्रेट्स की संभावित पकड़ ने वॉशिंगटन में नए संसदीय नेतृत्व की संभावनाओं को बढ़ा दिया है, जिससे देश की आने वाली राजकोषीय नीति पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
कच्चे तेल में नरमी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें
कमोडिटी बाजार के समीकरणों को देखें तो कच्चे तेल की नरम कीमतों ने बिना ब्याज देने वाली इस कीमती धातु को हल्का सहारा दिया है। हालांकि, बाजार अभी भी अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को लेकर सतर्क है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना यील्ड वाली धातुओं की चमक घटती है। इसके बावजूद बुधवार सुबह बॉन्ड यील्ड में गिरावट देखी गई, जहां 2 साल की ट्रेजरी यील्ड पांच आधार अंक फिसलकर 4.566 प्रतिशत पर आ गई, जबकि 10 साल की बेंचमार्क यील्ड छह आधार अंक घटकर 4.90 प्रतिशत पर आ गई।
मूल्य संचय और निवेश के माध्यम के रूप में चांदी
चांदी ऐतिहासिक काल से ही मूल्य संचय और विनिमय के एक भरोसेमंद साधन के रूप में जानी जाती रही है। हालांकि आम निवेशकों के बीच यह सोने की तुलना में कम लोकप्रिय मानी जाती है, फिर भी पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव के लिए निवेशक इसका रुख करते हैं। बाजार में चांदी को भौतिक सिक्कों, सिल्लियों या अंतरराष्ट्रीय बाजार को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF के जरिए खरीदा और बेचा जा सकता है।
कीमतों को तय करने वाले प्रमुख वैश्विक कारक
चांदी के भाव कई आर्थिक और राजनीतिक कारकों पर निर्भर करते हैं। भू-राजनीतिक उथल-पुथल या मंदी की आशंका के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की ओर रुख करते हैं, हालांकि सोने में यह प्रभाव अधिक तीव्र होता है। डॉलर से मूल्य तय होने (XAG/USD) के कारण अमेरिकी मुद्रा की चाल भी इस पर सीधा असर डालती है। मजबूत डॉलर कीमतों पर दबाव बनाता है, जबकि कमजोर डॉलर धातुओं को ऊपर ले जाता है। साथ ही खदानों से आपूर्ति, रीसाइक्लिंग की रफ्तार और निवेश की मांग भी बाजार के संतुलन को बदलती है।
औद्योगिक मांग और तीन बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं
सोने की तुलना में चांदी का एक बहुत बड़ा हिस्सा उद्योगों में खपता है। तांबे और सोने से भी अधिक विद्युत चालकता होने की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा सेक्टर में इसका इस्तेमाल अनिवार्य माना जाता है। अमेरिका और चीन जैसे विशाल औद्योगिक ढांचे वाले देशों में विनिर्माण की रफ्तार चांदी की खपत तय करती है। वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में सोने के साथ-साथ आभूषणों और घरेलू मांग के मामले में चांदी की खरीदारी कीमतों में उतार-चढ़ाव की अहम कड़ी साबित होती है।
गोल्ड और सिल्वर का अनुपात क्या संकेत देता है?
चांदी की कीमत आमतौर पर सोने की दिशा का अनुसरण करती है। दोनों के बीच तुलनात्मक मूल्य को समझने के लिए विशेषज्ञ गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल करते हैं। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। यदि यह अनुपात बहुत ऊपर चला जाता है, तो माना जाता है कि चांदी का मूल्यांकन कम है या सोना अधिक महंगा हो चुका है। इसके विपरीत, अनुपात में कमी यह संकेत दे सकती है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता दिखाई दे रहा है।
अन्य मुद्राओं और सूचकांकों की प्रतिक्रिया
अमेरिकी चुनाव के चलते केवल कीमती धातुएं ही नहीं, बल्कि मुद्रा बाजार भी हिल गया है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर दबाव देखा गया और यह शुरुआती एशियाई कारोबार में 101.30 के स्तर पर आ गया। डॉलर में आई इस नरमी से AUD/USD दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरकर 0.6965 के करीब स्थिर रहा। उधर USD/JPY भारी बिकवाली के चलते 158.00 से नीचे फिसल गया। सोने की बात करें तो वह भी किसी स्पष्ट दिशा की तलाश में 3,930 डॉलर प्रति औंस के आसपास सतर्क रुख अपनाए हुए कारोबार करता दिखा।

















