अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती रुझानों के बीच बुधवार को वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई, जिससे अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव देखा गया। डॉलर में आई इस अचानक कमजोरी और गिरती बॉन्ड यील्ड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के खरीदारों को आकर्षित किया, जिससे कीमती धातु में हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरों में और इजाफा किए जाने की मजबूत आशंकाओं ने इस तेजी पर लगाम लगाए रखी है। व्यापारी और निवेशक वर्तमान में अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों और चुनावी परिणामों की अंतिम तस्वीर का इंतजार कर रहे हैं।
डॉलर पर दबाव और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट
अमेरिकी मुद्रा में आई गिरावट का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार और कमोडिटी कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है। शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में यूएस डॉलर इंडेक्स गिरकर 101.30 के स्तर के करीब पहुंच गया। चुनावी अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों का रुझान अमेरिकी बॉन्ड की ओर बढ़ा, जिसके परिणामस्वरूप यील्ड में खासी गिरावट दर्ज की गई। दो वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पांच आधार अंक फिसलकर 4.566 प्रतिशत पर आ गई, जबकि 10 वर्षीय बेंचमार्क यील्ड छह आधार अंक गिरकर 4.90 प्रतिशत पर दर्ज की गई। बॉन्ड यील्ड में इस नरमी ने डॉलर पर अतिरिक्त दबाव बनाने का काम किया, जिससे सोने में निचले स्तरों से लिवाली को सहारा मिला।
फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति का दबाव बरकरार
डॉलर की कमजोरी के बावजूद सोने की तेजी एक सीमित दायरे में कैद रही, जिसका मुख्य कारण फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख की उम्मीदें हैं। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत बाजार प्रतिभागी इस बात की संभावना जता रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक दिसंबर की नीतिगत समीक्षा में उधारी लागत में फिर से बढ़ोतरी कर सकता है। इन आकलनों को श्रम विभाग के जॉब ओपनिंग्स एंड लेबर टर्नओवर सर्वे यानी जोल्ट्स (JOLTS) रिपोर्ट से बल मिला। सितंबर महीने में रोजगार के अवसर बढ़कर 7.523 मिलियन दर्ज किए गए, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा संशोधित होकर 7.190 मिलियन रहा था। मजबूत आर्थिक वृद्धि और लगातार बने मुद्रास्फीति के दबाव ने आसन्न ब्याज दर वृद्धि के दांव को और मजबूत कर दिया है, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्ति जैसे सोने की कीमतों पर दबाव कायम है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर सोने की स्थिति
चार घंटे के चार्ट पर एक्सएयू/यूएसडी (XAU/USD) 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के नीचे मंदी के दायरे में बना हुआ है। अक्टूबर के मध्य में बने उच्च स्तर से आई गिरावट के सभी प्रमुख फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तरों के नीचे कारोबार जारी है। तात्कालिक रूप से 23.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 3,947 डॉलर पर ऊपरी बाधा के रूप में काम कर रहा है, जबकि इसके बाद 3,970 डॉलर का मजबूत रेजिस्टेंस क्षेत्र मौजूद है। चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 48.94 के स्तर के साथ तटस्थ स्थिति के करीब है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) 6.65 पर सकारात्मक बना हुआ है। यह मोमेंटम में स्थिरता का संकेत तो देता है, लेकिन मौजूदा गिरावट के ढांचे को चुनौती देने के लिए अभी पर्याप्त ताकत नहीं दिखा पा रहा है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड फ्यूचर्स 3,965 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 3,940 डॉलर के मुकाबले 0.62 प्रतिशत की तेजी दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,879 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी संकेतकों पर 14-दिवसीय आरएसआई 37 पर है और एमएसीडी -79.89 के स्तर पर मंदी के रुख का संकेत दे रहा है। चलती औसत व्यवस्था में ईएमए 50 (4,182 डॉलर) ईएमए 200 (4,405 डॉलर) से नीचे बना हुआ है, जो डेथ क्रॉस की स्थिति को दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 3,901 डॉलर से 4,268 डॉलर के बीच फैला है। आगामी सत्रों के लिए मुख्य पिवट पॉइंट 3,956 डॉलर पर है, जबकि ऊपरी रेजिस्टेंस स्तर आर1 3,984 डॉलर और आर2 4,002 डॉलर पर स्थित हैं। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट एस1 3,937 डॉलर और दूसरा सपोर्ट एस2 3,910 डॉलर पर देखा जा रहा है। औसत ट्रू रेंज (ATR) 79.26 डॉलर की दैनिक अस्थिरता दर्शाता है।
मध्यावधि चुनाव का ढांचा और राजनीतिक गणित
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे सफर पर आयोजित होते हैं। इनमें मतदाता प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सभी 435 सदस्यों का चुनाव करते हैं, जबकि सीनेट के लगभग एक-तिहाई सदस्यों के लिए भी मतदान होता है। इसके साथ ही कई राज्यों में गवर्नरों और अन्य प्रांतीय व स्थानीय अधिकारियों का चयन किया जाता है। चुनाव का औपचारिक दिन नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाला मंगलवार होता है, जो 3 नवंबर 2026 तय है। कई राज्यों में डाक और अग्रिम मतदान की व्यवस्था पहले से सक्रिय थी।
यह चुनाव इस बात का फैसला करते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों के दौरान अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। बहुमत हासिल करने वाली पार्टी विधायी एजेंडा निर्धारित करती है, संसदीय समितियों के प्रमुखों का चुनाव करती है और सीनेट के माध्यम से न्यायाधीशों व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पर नियंत्रण रखती है। मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं होता क्योंकि अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में होना है। ऐतिहासिक तौर पर इन चुनावों को मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जाता है, जिसमें सत्ताधारी पार्टी को अक्सर प्रतिनिधि सभा की सीटें गंवानी पड़ती हैं। शुरुआती रुझानों में संकेत मिले हैं कि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में स्पष्ट बहुमत हासिल कर सकते हैं।
विभाजित संसद का बाजारों और संपत्तियों पर ऐतिहासिक असर
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणामों पर अमेरिकी डॉलर की प्रतिक्रिया टिकाऊ रुख के बजाय हल्की और अल्पकालिक रहने की संभावना है। दोनों सदनों में अलग-अलग पार्टियों के नियंत्रण यानी विभाजित संसद की संभावना को बाजार पहले ही काफी हद तक कीमतों में शामिल कर चुका था। बॉन्ड यील्ड चुनावी नतीजों पर अधिक तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती है। जब भी बड़े वित्तीय प्रोत्साहन की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में तेजी आती है, जबकि विधायी गतिरोध नए सरकारी खर्च को सीमित करता है जिससे दोनों में नरमी आ सकती है। इसके विपरीत, सरकारी फंडिंग या ऋण सीमा पर राजनीतिक गतिरोध संकट के समय डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर मजबूती भी दे सकता है। लंबी अवधि में यानी छह से बारह महीनों के दौरान, आर्थिक वृद्धि और केंद्रीय बैंक की नीतियां चुनाव नतीजों से कहीं अधिक मायने रखती हैं।
शेयर बाजार के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी शेयर कमजोर रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनमें उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। वर्ष 1950 से अब तक, एसएंडपी 500 इंडेक्स हर मध्यावधि चुनाव के 12 महीने बाद सकारात्मक रहा है। ऐसा लगातार 19 बार हुआ है और इस दौरान औसत बढ़त लगभग 15 प्रतिशत रही है। चुनाव के बाद अनिश्चितता खत्म होने को इस रैली का मुख्य कारण माना जाता है। हालांकि अतीत का प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता और मौजूदा उच्च मूल्यांकन इस सिलसिले के सामने चुनौती पेश कर सकते हैं। इतिहास बताता है कि एक रिपब्लिकन राष्ट्रपति के अधीन विभाजित संसद के बाद वाले वर्षों में एसएंडपी 500 ने मजबूत प्रदर्शन किया है, क्योंकि नीतिगत गतिरोध करों और नियमों में अचानक बड़े बदलाव की संभावना को रोक देता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य मुद्राओं का प्रदर्शन
चुनावी रुझानों के कारण डॉलर में आई गिरावट का असर अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी साफ देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6965 के आसपास स्थिर रहा और दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरने में कामयाब रहा। राजनीतिक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने डॉलर को कमजोर किया, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कम सख्त रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ, यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) पर बुधवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर के एक महीने के निचले स्तर पर फिसलने से यह जोड़ी गिरकर 158.00 के नीचे आ गई। वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश के रूप में जापानी येन की मांग बढ़ा दी, जिससे डॉलर के मुकाबले येन में तेजी आई। वहीं सोने का कारोबार एशियाई सत्र में सतर्कता के साथ 3,930 डॉलर के दायरे में देखा गया, जहां निवेशक आगे के राजनीतिक रुझानों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

















