भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ है. 26 सितंबर 2026 को भारतीय बाजारों में 24-कैरेट, 22-कैरेट और 18-कैरेट वाले सोने की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है. यह गिरावट उन ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है जो आने वाले त्योहारों और शादियों के लिए सोने की खरीदारी की योजना बना रहे हैं. दूसरी ओर, चांदी के बाजार में पूरी तरह से शांति का माहौल रहा और इसके दाम पिछले दिन के स्तर पर ही स्थिर रहे. वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों का असर भारतीय बाजारों पर साफ देखा जा सकता है, जिससे कीमतों में यह उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. हम विभिन्न वजन श्रेणियों में सोने और चांदी के ताजा भावों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं और उन वैश्विक आर्थिक कारकों का भी विश्लेषण कर रहे हैं जो इस समय धातु बाजार को प्रभावित कर रहे हैं, जिनमें अमेरिकी Fed की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही राजनयिक वार्ताएं शामिल हैं.
सोने की अलग-अलग शुद्धता के आधार पर कीमतों में आई कमी
भारतीय बाजार में सोने की विभिन्न शुद्धता वाली श्रेणियों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खुदरा विक्रेताओं और खरीदारों दोनों को नया मूल्य ढांचा देखने को मिला है. सबसे शुद्ध माने जाने वाले 24-कैरेट सोने के भाव में 1,600 रुपये की बड़ी कटौती देखी गई, जिससे इसका दाम घटकर 15,26,800 रुपये प्रति 100 ग्राम हो गया. इसके अलावा, 10 ग्राम वाले 24-कैरेट सोने की कीमत में 160 रुपये की कमी आई और यह घटकर 1,52,680 रुपये पर आ गया. यदि कोई ग्राहक 8 ग्राम सोने का सिक्का या आभूषण खरीदना चाहता है, तो उसे 128 रुपये की राहत मिली है और इसका भाव 1,22,144 रुपये हो गया है. सबसे छोटी इकाई यानी 1 ग्राम सोने के भाव में 16 रुपये की गिरावट आई है, जिससे अब इसकी कीमत 15,268 रुपये प्रति ग्राम हो गई है.
भारतीय परिवारों में आभूषण बनाने के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22-कैरेट सोने की कीमतों में भी नरमी आई है. इसके 100 ग्राम का भाव 1,500 रुपये घटकर 13,99,500 रुपये दर्ज किया गया. इसके साथ ही, 10 ग्राम वाले हिस्से का दाम 160 रुपये की गिरावट के साथ 1,52,680 रुपये पर आ गया. वहीं, 8 ग्राम वाले 22-कैरेट सोने के दाम में 120 रुपये की गिरावट आई और यह 1,11,960 रुपये पर आ गया. इसके अलावा, प्रति 1 ग्राम सोने की कीमत 15 रुपये घटकर 13,995 रुपये पर पहुंच गई है. यह गिरावट उन खरीदारों को आकर्षित कर रही है जो शादियों के आभूषणों के लिए पहले से बुकिंग करना चाहते हैं.
आधुनिक डिजाइनों और हल्के वजन वाले हीरों से जड़ित आभूषणों के लिए लोकप्रिय 18-कैरेट सोने की कीमतों में भी कमी आई है. 18-कैरेट श्रेणी में 100 ग्राम सोने का भाव 1,200 रुपये घटकर 11,45,100 रुपये हो गया. वहीं, 10 ग्राम सोने की कीमत में 120 रुपये की कमी दर्ज की गई, जिससे इसका भाव 1,14,510 रुपये पर आ गया. इसके अलावा, 8 ग्राम और 1 ग्राम सोने की कीमतों में क्रमश: 96 रुपये और 12 रुपये की गिरावट आई, जिससे इनका मूल्य क्रमश: 91,608 रुपये और 11,451 रुपये तय हुआ है. इस श्रेणी में गिरावट आने से मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है.
घरेलू बाजार में चांदी की कीमतें पूरी तरह स्थिर
सोने के विपरीत, शनिवार 26 सितंबर 2026 को भारत में चांदी के दाम में कोई उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला. औद्योगिक उपयोग और खुदरा निवेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली चांदी के दाम पिछले कारोबारी सत्र के स्तर पर ही टिके रहे. भारतीय बाजार में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 2.45 लाख रुपये पर बनी हुई है. खुदरा स्तर पर 100 ग्राम चांदी का भाव 24,500 रुपये और 100 ग्राम से कम यानी 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,450 रुपये दर्ज की गई है.
इसी तरह, 8 ग्राम चांदी का दाम 1,960 रुपये और 1 ग्राम चांदी का मूल्य 245 रुपये पर स्थिर बना हुआ है. चांदी के दामों में यह स्थिरता सोने की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच उन छोटे निवेशकों को राहत देती है जो चांदी में निवेश करना पसंद करते हैं. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग मजबूत रहने के कारण चांदी के दामों को नीचे से समर्थन मिल रहा है, जिससे इसमें सोने जैसी तेज गिरावट दर्ज नहीं की गई.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले संकेत और सोने पर बढ़ता दबाव
सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और वृहद आर्थिक कारक काम कर रहे हैं. वेंचुरा में कमोडिटी और CRM प्रमुख एन एस रामास्वामी ने धातु बाजार की मौजूदा स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. उनके अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ऊंचे ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी Fed द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने की संभावनाओं के कारण सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है. इस वजह से साप्ताहिक आधार पर सोने के भाव में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव नीचे आ गए हैं.
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती से जुड़े आंकड़ों ने वैश्विक बाजारों पर गहरा असर डाला है. भले ही ब्याज दरें काफी समय से उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, लेकिन वहां की आर्थिक गतिविधियों में लचीलापन देखने को मिला है. इसी मजबूती को देखते हुए निवेशक अब आगामी समय में और अधिक ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना जता रहे हैं. CME फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश ट्रेडर्स को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अक्टूबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसके लिए लगभग 70% की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा, दिसंबर में एक और बढ़ोतरी होने की संभावना को 95% तक आंका जा रहा है. इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका में महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है और आर्थिक आंकड़े लगातार सकारात्मक आ रहे हैं, जो अमेरिकी Fed को दरों में सख्ती बनाए रखने का आधार प्रदान करते हैं. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को रखने की लागत बढ़ जाती है, जिससे निवेशक सरकारी बॉन्ड और अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित होते हैं.
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा बाजार का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद सोने पर दबाव कम नहीं हुआ. शुक्रवार को अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच न्यू यॉर्क में एक महत्वपूर्ण बैठक की खबरें आईं, जिसके बाद तेल की कीमतों में नरमी देखी गई. इस बैठक में दोनों पक्षों ने एक संभावित समझौते पर चर्चा की, जिसके तहत तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा जहाजों के आवागमन के लिए पूरी तरह खोल सकता है. इसके बदले में अमेरिकी प्रशासन ईरान पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर सकता है.
आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरने से वैश्विक महंगाई की चिंताओं में कमी आती है, जिससे महंगाई के खिलाफ सुरक्षा के रूप में सोने की मांग कमजोर पड़ती है. हालांकि, इस बार तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद अमेरिकी Fed की ओर से मिल रहे कड़े संकेतों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने सोने की कीमतों को ऊपर जाने से रोका और दबाव को लगातार बनाए रखा. भू-राजनीतिक मोर्चे पर होने वाले बदलाव वैश्विक स्तर पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को लगातार प्रभावित करते हैं.
भारतीय खुदरा बाजार में त्योहारी मांग से सहारा मिलने की उम्मीद
वैश्विक स्तर पर कीमतों में गिरावट का सामना कर रहे सोने को भारत के घरेलू बाजार से थोड़ा सहारा मिल रहा है. ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, कीमतें नीचे आने से देश के भीतर खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ी है और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए मांग में हल्की सुधार की स्थिति बन रही है. भारतीय उपभोक्ता पारंपरिक रूप से सोने की गिरावट का इंतजार करते हैं ताकि वे त्योहारों पर बेहतर खरीदारी कर सकें.
भारत में त्योहारों और शादियों के इस सीजन को लेकर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिसर्च हेड कविता चाको ने अपना महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है. उनका मानना है कि जैसे-जैसे त्योहार और शादियों का दौर आगे बढ़ेगा, भारत में सोने की मांग में और सुधार होने की उम्मीद है. निवेश के लिए मजबूत मांग और शादियों के लिए होने वाली पारंपरिक खरीदारी इस मांग को बढ़ावा देगी. हालांकि, उन्होंने यह भी सचेत किया कि सोने की मौजूदा उच्च कीमतें और बाजार का उतार-चढ़ाव ग्राहकों की अतिरिक्त या विवेकाधीन खरीदारी की क्षमता को थोड़ा सीमित कर सकता है.
प्रमुख अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और नीतिगत दृष्टिकोण
आने वाले समय के बारे में कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीपी कायनात चैनवाला ने बाजार के रुझानों की व्याख्या की है. उनके अनुसार, निवेशक इस बात को मानकर चल रहे हैं कि अक्टूबर में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की लगभग 70% संभावना है. अमेरिका के मजबूत साप्ताहिक बेरोजगार दावों (जो घटकर 197,000 रह गए) और अगस्त में नए घरों की बिक्री में 6.4% की बढ़ोतरी होकर 684,000 होने जैसे आंकड़ों ने फेड के अधिकारियों को ब्याज दरों को ऊंचा रखने का संकेत दिया है.
फेडरल रिजर्व के अधिकारी लगातार कड़ा रुख अपनाए हुए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने के लिए और सख्त नीतियां अपनाई जा सकती हैं. कायनात चैनवाला का कहना है कि भविष्य में अगर कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है, तो इससे सोने को कुछ राहत मिल सकती है. इसके विपरीत, यदि अमेरिका से और अधिक मजबूत आर्थिक आंकड़े आते हैं या फेड अधिकारियों की ओर से सख्त रुख जारी रहता है, तो सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है. ऐसे में निवेशकों को वैश्विक संकेतकों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है.


















