बिहार के गया जिले में स्थित डोभी क्षेत्र औद्योगिक विकास और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है. यहां 1670 एकड़ के विशाल भूभाग में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी विकसित की जा रही है, जहां अब आधुनिक फूड प्रोसेसिंग उद्योग को जमीन पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसी महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत गया के मानपुर निवासी शशि कुमार की अगुवाई वाली कंपनी शिवा एग्रो नेचुरल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड 51 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश से शहद आधारित विशेष विनिर्माण इकाई स्थापित करेगी. इस उद्योग के लिए राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिसके तहत डोभी कॉरिडोर में लगभग 5 एकड़ जमीन पर प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाएगा.
साइकिल से सफर शुरू कर खड़ा किया 10 करोड़ से बड़ा कारोबार
शशि कुमार का उद्यमशीलता का सफर जमीनी संघर्ष और लगातार विस्तार की एक ठोस मिसाल पेश करता है. आज से करीब 30 वर्ष पहले उन्होंने मात्र 10 हजार रुपये की बेहद सीमित पूंजी के साथ काम शुरू किया था. शुरुआती दौर में उनके पास मधुमक्खी पालन के केवल 10 बॉक्स थे और वे अपने काम की निगरानी करने के लिए प्रतिदिन साइकिल से आवाजाही करते थे. तीन दशकों के सतत परिश्रम के बाद उनका यह उपक्रम कई चारपहिया वाहनों और बहुमंजिला व्यवस्थाओं वाले एक सुव्यवस्थित संस्थान में तब्दील हो चुका है.
वर्तमान में उनकी कंपनी शिवा एग्रो नेचुरल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड हर साल तकरीबन 35 मीट्रिक टन शुद्ध शहद तैयार करती है. इस नेटवर्क से बिहार के 200 से अधिक मधुमक्खी पालक किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं, जिन्हें अपनी उपज के लिए एक स्थायी खरीद तंत्र हासिल हुआ है. इस व्यापक परिचालन की बदौलत कंपनी का वार्षिक कारोबार 10 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर चुका है.
चीनी की जगह शहद: टॉफी और नींबू शरबत की नई शृंखला
बाजार में प्राकृतिक मीठे की निरंतर मांग और बच्चों के बीच कन्फेक्शनरी उत्पादों की लोकप्रियता को देखते हुए शशि कुमार अब शहद से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने जा रहे हैं. नए फूड प्रोसेसिंग संयंत्र में पारंपरिक चीनी की जगह पूरी तरह से शहद का उपयोग करके खास तरह की टॉफी बनाई जाएगी. इसके अलावा शहद और नींबू के मिश्रण से तैयार होने वाला विशेष स्वास्थ्यवर्धक शरबत भी इस यूनिट का प्रमुख उत्पाद होगा.
शशि कुमार के अनुसार इस विनिर्माण इकाई का मुख्य लक्ष्य बिहार की धरती पर पैदा होने वाले गुणवत्तापूर्ण शहद को नए स्वरूपों में ढालकर देश के अन्य राज्यों के बाजारों तक पहुंचाना है. डोभी में पांच एकड़ क्षेत्रफल में लगने वाली यह आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थानीय शहद उत्पादकों के लिए नए आर्थिक अवसर खोलेगी और कच्चे माल की बेहतर कीमत सुनिश्चित करेगी.
टेक्सटाइल सेक्टर में 110 करोड़ का अलग निवेश
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अलावा इस उद्यमी परिवार ने विनिर्माण क्षेत्र के दूसरे बड़े आयाम में भी कदम बढ़ाया है. शशि कुमार के पारिवारिक उपक्रम के जरिए टेक्सटाइल क्षेत्र में 110 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा रहा है. इसके तहत करीब 10 एकड़ जमीन पर अमरनाथ टेक्सटाइल उद्योग की स्थापना की जाएगी.
इस वस्त्र निर्माण इकाई में विभिन्न श्रेणियों के कपड़े बड़े पैमाने पर तैयार किए जाएंगे. इस पूरे टेक्सटाइल संयंत्र के प्रबंधन और दैनिक संचालन का दायित्व उनके भाई तथा परिवार के अन्य सदस्य संभालेंगे, जिससे एक ही औद्योगिक समूह के जरिए दो अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता का निर्माण होगा.
बोधगया सम्मेलन से डोभी कॉरिडोर को मिले 4092 करोड़ के प्रस्ताव
गया क्षेत्र में यह निवेश उस व्यापक औद्योगिक विस्तार का हिस्सा है जिसकी रूपरेखा हाल ही में बोधगया में आयोजित एक उच्चस्तरीय निवेशक कार्यक्रम में तय की गई थी. बिहार के मुख्यमंत्री और देश-विदेश के प्रमुख निवेशकों की उपस्थिति में हुए इस आयोजन में कुल 12 औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 4092 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर आधिकारिक सहमति बनी थी.
इन प्रस्तावों में फूड प्रोसेसिंग, कृषि, टेक्सटाइल, ऑर्गेनिक उत्पाद, ऊर्जा, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं. प्रशासन के अनुसार डोभी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के वर्ष 2027 के अंत तक पूरी तरह परिचालन में आने की संभावना है. इस परियोजना के जमीन पर उतरने से गया और आसपास के सभी जिलों में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ सहायक सेवाओं में अभूतपूर्व औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है.


















