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भागलपुर में विकसित होगा राज्य का पहला आम गांव, 500 से अधिक जर्दालू के पेड़ लगाने की तैयारीबिहार
3 नव॰ 2026, 6:39 am (1 घंटे पहले)· 2

भागलपुर में विकसित होगा राज्य का पहला आम गांव, 500 से अधिक जर्दालू के पेड़ लगाने की तैयारी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर में खास जर्दालू किस्म का मैंगो विलेज तैयार कर रहा है, जहां 500 से अधिक पौधे लगाकर किसानों की आमदनी और निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

रेशम, मंजूषा कला और विशिष्ट जर्दालू आम की विरासत समेटे भागलपुर की कृषि पहचान को अब एक नया मुकाम मिलने जा रहा है। जिले में जर्दालू आम की खेती और उत्पादन क्षमता को बड़े पैमाने पर विस्तार देने के लिए एक पूरे गांव को समर्पित मैंगो विलेज के रूप में तैयार करने की परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। भागलपुर के लगभग हर हिस्से में इस महकदार फल की मौजूदगी पारंपरिक रूप से देखने को मिलती है, किंतु अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने एक सुव्यवस्थित पहल के तहत इसे एक केंद्रीय उत्पादन केंद्र में बदलने का खाका तैयार किया है। इस विशेष योजना का मूल उद्देश्य आगंतुकों और व्यापारियों को एक ही स्थान पर सघन बागवानी दिखाना तथा फल के कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल करना है।

सबौर के सिंदूर ग्राम के सफल प्रयोग के बाद नई पहल

बिहार कृषि विश्वविद्यालय इससे पूर्व भी इस प्रारूप पर सफल कार्य कर चुका है। विश्वविद्यालय की ओर से सबौर क्षेत्र में पहले ही एक सिंदूर ग्राम विकसित किया गया था, जहां एक ही गांव की परिधि में 1,000 से अधिक सिंदूर के पौधे रोपे गए थे और उनकी वैज्ञानिक देखभाल की जा रही है। उसी तर्ज पर अब भागलपुर में जर्दालू आम का एक सघन क्लस्टर तैयार किया जा रहा है। बीएयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ राजेश कुमार के अनुसार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ डी आर सिंह की मंशा ग्रामीण आबादी की आय बढ़ाने और गांवों के सतत विकास को गति देने की है। इसी सोच के तहत स्थानीय कृषि उत्पादों के रकबे और उत्पादन तंत्र का विस्तार किया जा रहा है।

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सप्लाई और निर्यात की चुनौतियों का समाधान

बाजार में जर्दालू आम की मांग लगातार बढ़ रही है, किंतु मौजूदा उत्पादन क्षमता इस भारी मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। जब एक ही गांव पूरी तरह जर्दालू के बागानों से आच्छादित होगा, तो वहां से फल की तुड़ाई, छंटाई और दूसरे राज्यों या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की प्रक्रिया अत्यंत सुगम हो जाएगी। प्रस्तावित गांव में 500 से अधिक उन्नत जर्दालू पौधे लगाए जाने हैं, ताकि संबंधित गांव आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके और फल उत्पादकों को सीधा वाणिज्यिक लाभ प्राप्त हो।

मैंगो मैन अशोक चौधरी के मार्गदर्शन में तैयार होंगे बाग

इस पूरे सघन पौधारोपण और संरक्षण अभियान का नेतृत्व आम विशेषज्ञ के रूप में विख्यात मैंगो मैन अशोक चौधरी करेंगे। उनकी बागवानी विशेषज्ञता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना की तकनीकी देखरेख का दायित्व उन्हें सौंपा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि जर्दालू गांव का निर्माण पूर्ण होने पर स्थानीय ग्रामीणों और कामगारों को आजीविका की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि यह पूरा क्षेत्र रोजगार, फल व्यापार और ग्रामीण पर्यटन का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरेगा।

सवाल-जवाब

भागलपुर में मैंगो विलेज की स्थापना कौन कर रहा है?
इस परियोजना को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) द्वारा विकसित किया जा रहा है।
प्रस्तावित मैंगो विलेज में कितने पौधे लगाए जाएंगे?
योजना के अंतर्गत उस गांव में 500 से अधिक जर्दालू आम के पौधे लगाए जाएंगे।
मैंगो विलेज के पौधों की देखरेख का जिम्मा किसे दिया गया है?
इसकी तकनीकी देखरेख आम विशेषज्ञ और मैंगो मैन अशोक चौधरी के मार्गदर्शन में होगी।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने इससे पहले कौन सा विशेष गांव विकसित किया था?
विश्वविद्यालय ने इससे पूर्व सबौर में सिंदूर ग्राम विकसित किया था, जहां 1,000 से अधिक सिंदूर के पौधे लगाए गए थे।
मैंगो विलेज बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य जर्दालू आम का उत्पादन बढ़ाना, निर्यात सुगम बनाना और गांव को आत्मनिर्भर बनाकर स्थानीय रोजगार देना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·12 मिनट पहले

जर्दालू आम की खुशबू अब विदेश तक जाएगी, किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद जगी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 मिनट पहले

भागलपुर के जर्दालू की खुशबू ही अलग है। पिछली बार जब उधर गया था, तो बिना खाए रह नहीं पाया था। अब पूरा गांव ही इसी महक में डूबेगा, तो मज़ा ही आ जाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·34 मिनट पहले

अर्जुन जी, जर्दालू की बात ही निराली है! वैसे क्या यह पता चल पाया है कि इसके लिए गांव का चुनाव किस आधार पर किया गया है?

Rohan Verma@rohan-verma·56 मिनट पहले

सिर्फ पाँच सौ पेड़ों से क्या ही बड़ा निर्यात हो पाएगा, संख्या कम से कम दोगुनी होनी चाहिए थी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·56 मिनट पहले

रोहन, संख्या कम है यह ठीक है, पर अशोक चौधरी इस पर कैसे काम करेंगे यह देखना दिलचस्प होगा?

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