रोशनी और उल्लास के पर्व दिवाली पर घरों में तरह-तरह के पारंपरिक पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं। परिवार के सभी सदस्य उत्सव के माहौल में स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाते हैं, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिलाओं के समक्ष अपनी और गर्भस्थ शिशु की सेहत को लेकर कई संशय खड़े हो जाते हैं। महिलाओं के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या त्योहार में मिठाई चखने से गर्भकालीन शुगर की समस्या हो सकती है और कितनी मात्रा में मीठा खाना सुरक्षित माना जाएगा। चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि गर्भवती महिलाओं को उत्सव के दौरान मिठाई से पूरी तरह तौबा करने की कतई आवश्यकता नहीं है, बशर्ते वे मात्रा और समय का विशेष अनुशासन बनाए रखें।
त्योहार में पूरी तरह मीठा छोड़ना जरूरी नहीं
फरीदाबाद स्थित आरजी हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पलक दीवान के अनुसार, दिवाली जैसे बड़े पर्व पर मीठा खाने की इच्छा होना स्वाभाविक है। ऐसे पावन मौके पर गर्भवती महिलाओं को भी उत्सव का स्वाद लेने की पूरी छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि उन्हें मिठाई खाने से पूरी तरह वंचित रखना उचित नहीं है। फिर भी, सावधानी की सीमा तय करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। सीमा से अधिक मात्रा में मीठा खा लेने से शरीर की प्रणाली प्रभावित हो सकती है और गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ने की आशंका बन जाती है। उत्सव के उत्साह में बहकर अपनी प्राथमिक सेहत और चिकित्सकीय निर्देशों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
भोजन की जगह मिठाई खाने की आदत से बचें
गर्भवती महिलाओं को यह समझना होगा कि मिठाइयां किसी भी सूरत में उनके नियमित और पौष्टिक भोजन का विकल्प नहीं बन सकती हैं। त्योहारों की आपाधापी और उल्लास में कई बार महिलाएं मुख्य भोजन की मात्रा घटा देती हैं और उसकी भरपाई मिठाइयों से करने लगती हैं, जो सेहत के लिहाज से सर्वथा गलत दृष्टिकोण है। दैनिक पोषण के लिए संतुलित आहार का समय पर सेवन करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। भोजन के साथ स्वाद के तौर पर आधी या अधिकतम एक मिठाई खा लेना आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता है। परेशानी की असली शुरुआत तब होती है जब महिलाएं दिनभर में बार-बार और भारी मात्रा में मिठाइयां खाने लगती हैं।
इंसुलिन स्तर में उछाल और सुस्ती का जोखिम
अत्यधिक मीठे का सेवन शरीर में इंसुलिन के स्तर को अचानक बढ़ा देता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई तात्कालिक समस्याएं उभर सकती हैं। इसके प्रभाव से शरीर में भारी सुस्ती, ऊर्जा की कमी और अत्यधिक नींद आने जैसी असहज स्थितियां पैदा हो जाती हैं। गर्भावस्था में महिला जो भी आहार लेती है, उसका सीधा असर उसके अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के समग्र विकास पर पड़ता है। ऐसे में मिठाई की मात्रा पर सख्त नियंत्रण रखना दोनों की भलाई के लिए अनिवार्य है।
संतुलित आहार और चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों का पालन
दीपावली खुशियों और आपसी मेलजोल का पर्व है, और गर्भवती महिलाएं भी अपनी दिनचर्या में संतुलन साधकर इसका पूरा आनंद उठा सकती हैं। जरूरत से ज्यादा मीठा खाने से बचना और अपने चिकित्सक द्वारा तय किए गए आहार नियमों का पालन करना सबसे सुरक्षित मार्ग है। नियमित खानपान की उपेक्षा किए बिना केवल सीमित मिठास का चयन करने से ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा नहीं रहता और त्योहार की उमंग भी बरकरार रहती है।



















