अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव गहराता जा रहा है। मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान चांदी (XAG/USD) पिछले सत्र की हल्की बढ़त को गंवाकर 50.30 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार कर रही है। बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच चांदी की कीमतें 48.87 डॉलर प्रति औंस के अपने 11 महीने के निचले स्तर की ओर दोबारा फिसल सकती हैं, जो स्तर इससे पहले 30 अक्टूबर को देखा गया था। ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की 73 प्रतिशत संभावना और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की राजनीतिक उथल-पुथल ने कीमती धातुओं की धारणा को प्रभावित किया है।
ईरान के केशम द्वीप पर गुप्त हमले और ऊर्जा आपूर्ति का संकट
अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के केशम द्वीप को निशाना बनाकर किए गए हालिया हमलों के बाद बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर नए सिरे से आशंकाएं पैदा हो गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आए विवरण के अनुसार, सोमवार को किया गया यह सैन्य अभियान वॉशिंगटन द्वारा हाल के हफ्तों में ईरानी ठिकानों पर की गई सीमित और गुप्त सैन्य कार्रवाइयों की श्रृंखला का हिस्सा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के साथ पूर्ण युद्ध में लौटने की आशंकाओं को सार्वजनिक रूप से खारिज किया था।
सैन्य गतिविधियों और मध्य पूर्व में गहराते तनाव की वजह से ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने हुए हैं। तेल की बढ़ती लागत सीधे तौर पर वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव को बनाए रखती है। इस उच्च मुद्रास्फीति के कारण वित्तीय बाजारों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना 73 प्रतिशत पर पहुंच गई है। कीमती धातुओं के लिहाज से दर वृद्धि का जोखिम हमेशा प्रतिकूल माना जाता है क्योंकि चांदी और सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों को धारण करने की अवसर लागत बढ़ जाती है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और कांग्रेस में शक्ति संतुलन
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को लेकर बनी राजनीतिक अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। मंगलवार को होने वाले मतदान पर वित्तीय बाजारों की पैनी नजर है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के रणनीतिकारों का आकलन है कि चुनावी समीकरण डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में डेमोक्रेट्स की जीत की व्यापक उम्मीद की जा रही है।
सीनेट पर नियंत्रण के लिए मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है, हालांकि राजनीतिक रुझान का रुख डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर ही दिखता है। कांग्रेस के दोनों सदनों में सत्ता संतुलन के संभावित बदलाव ने नीतिगत स्तर पर अस्पष्टता पैदा की है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रौद्योगिकी शेयरों में बड़े पैमाने पर हुई बिकवाली और लिक्विडेशन ने भी बाजार की समग्र तरलता को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर सुरक्षात्मक बिकवाली के रूप में देखने को मिल रहा है।
निवेश साधन के रूप में चांदी की बुनियादी भूमिका
चांदी ऐतिहासिक रूप से मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एक प्रमुख कीमती धातु रही है। हालांकि आम निवेशकों के बीच यह सोने की तुलना में कम लोकप्रिय मानी जाती है, लेकिन कई व्यापारी अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव (हेज) के उद्देश्य से चांदी का रुख करते हैं। निवेशक इसे भौतिक रूप से सिक्कों और सिल्लियों के रूप में खरीद सकते हैं, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के भावों को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) जैसे वित्तीय साधनों के जरिए इसका व्यापार कर सकते हैं।
चांदी के भाव कई वैश्विक कारकों से संचालित होते हैं। व्यापक भू-राजनीतिक अस्थिरता या गंभीर आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी के सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) वाले दर्जे को सक्रिय कर देती हैं, जिससे इसके भाव तेजी से बढ़ सकते हैं, हालांकि सोने की तुलना में यह उछाल अपेक्षाकृत सीमित रहता है। एक ब्याज-रहित संपत्ति होने के कारण ब्याज दरों में कटौती होने पर चांदी की मांग और कीमत में तेजी आती है।
अमेरिकी डॉलर का प्रभाव और खनन आपूर्ति
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का मूल्यांकन अमेरिकी डॉलर (XAG/USD) में किया जाता है, इसलिए डॉलर के उतार-चढ़ाव का इस पर गहरा असर पड़ता है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहता है और तेजी सीमित रहती है। इसके विपरीत, डॉलर के कमजोर पड़ने पर विदेशी मुद्रा धारकों के लिए चांदी सस्ती हो जाती है, जिससे इसके भाव को गति मिलती है।
इसके अलावा निवेश मांग, खनन उत्पादन और रीसाइक्लिंग की दरें भी आपूर्ति-मांग के संतुलन को तय करती हैं। भूगर्भीय रूप से चांदी की प्राकृतिक उपलब्धता सोने के मुकाबले काफी अधिक है, जिसके चलते इसकी कुल आपूर्ति का दायरा भी सोने से कहीं बड़ा होता है। खनन आपूर्ति में किसी भी तरह का व्यवधान या नई खोज बाजार की लंबी अवधि की दिशा निर्धारित करती है।
औद्योगिक मांग और भारत-चीन की केंद्रीय भूमिका
चांदी केवल एक निवेश धातु नहीं है, बल्कि आधुनिक उद्योगों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। तांबे और सोने की तुलना में भी सबसे अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) जैसे आधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों में इसका कोई सीधा विकल्प नहीं है। जब औद्योगिक विनिर्माण में तेजी आती है तो चांदी की भौतिक मांग बढ़ती है, जबकि औद्योगिक मंदी इसके भाव घटा देती है।
विश्व की तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका, चीन और भारत के आर्थिक रुझान चांदी के मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिका और विशेषकर चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न रासायनिक और तकनीकी विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी की खपत करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में आभूषण और पारंपरिक उपहारों के लिए आम उपभोक्ताओं की मांग वैश्विक मांग का एक बड़ा हिस्सा बनती है और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के समर्थन में आधार का काम करती है।
गोल्ड-सिल्वर अनुपात और सर्राफा बाजार के संकेत
चांदी के भाव आमतौर पर सोने के कदमों पर चलते हैं। जब सुरक्षित निवेश के कारण सोने में तेजी आती है, तो चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती दिखती है क्योंकि दोनों का सेफ-हेवन स्वरूप एक जैसा है। दोनों धातुओं के बीच मूल्य तुलना के लिए निवेशक 'गोल्ड/सिल्वर रेश्यो' का उपयोग करते हैं, जो यह दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य पाने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी।
एक उच्च अनुपात यह संकेत देता है कि चांदी अपने वास्तविक मूल्य से कम (अंडरवैल्यूड) आंकी जा रही है या सोना अत्यधिक महंगा (ओवरवैल्यूड) हो चुका है। इसके उलट, कम अनुपात यह दर्शाता है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता बना हुआ है। सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोना 3,950 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रहा, जहां पिछले सप्ताह अक्टूबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर से उबरने के बाद यह मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर में नरमी ने सोने को आधार दिया, लेकिन बॉन्ड यील्ड में सुधार और फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि के दांव ने सोने की बढ़त को भी सीमित रखा।
मुद्रा बाजारों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की हलचल
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के बीच अन्य प्रमुख मुद्राओं में मिश्रित रुझान देखने को मिला। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नीतिगत फैसले से पहले एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के आसपास स्थिर रहा। बाजार को उम्मीद है कि RBA अपनी आधिकारिक नकद दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत से 4.85 प्रतिशत कर देगा। यदि यह फैसला आता है, तो यह 2026 की पांचवीं दर वृद्धि होगी और ब्याज दर 18 साल के उच्चतम स्तर को छू लेगी।
उधर डॉलर-येन (USD/JPY) जोड़ी पिछले सत्र के 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गई, जहां जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया, हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय पर अनिश्चितता ने लाभ को सीमित रखा। इस बीच प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वॉल स्ट्रीट पर दिग्गज कंपनी एप्पल के चौथी तिमाही के नतीजों ने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। कंपनी ने चौथी तिमाही में आईफोन की बिक्री 57.58 अरब डॉलर दर्ज की, जो औसत अनुमान से एक अरब डॉलर से अधिक रही। हालांकि आय और राजस्व में बढ़त के बावजूद आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में एप्पल (AAPL) का शेयर लगभग 4 प्रतिशत तक टूट गया, जिससे इक्विटी बाजारों में जोखिम धारणा कमजोर बनी रही।



















